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दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल मनेंद्रगढ़ : संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने का दिन है- रमेशचंद्र सिंह

Praveen Nishee Mon, Jan 26, 2026

मनेंद्रगढ़। एमसीबी । दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल मनेंद्रगढ़ में 26 जनवरी 2026 को देश का 77वा गणतंत्र दिवस का आयोजन गरिमामय एवं अत्यंत हर्षोल्लास के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस वर्ष के राष्ट्रीय थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” की अनुगूँज पूरे कार्यक्रम में अनुभव की गई, मानो विद्यालय प्रांगण स्वतंत्रता–गाथा और राष्ट्रभक्ति के एक जीवंत मंच में परिवर्तित हो गया हो।

प्रातःकालीन स्वर्णिम धूप के साथ ही संस्था के अध्यक्ष रमेशचंद्र सिंह, निदेशक व्यंकटेश सिंह, निदेशिका श्रीमती पूनम सिंह, प्राचार्य डॉ० बसंत कुमार तिवारी, शिक्षकगण तथा छात्र–छात्राएँ स्वच्छ एवं सुसज्जित परिधान में प्रांगण में एकत्र हुए। कार्यक्रम का प्रारंभ विद्यालय अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने एवं समवेत स्वर में राष्ट्रगान के गायन से हुआ, जिसके पश्चात समूचा वातावरण देशभक्ति की पवित्र भावना से आप्लावित हो उठा। ध्वजारोहण के साथ ही विद्यार्थियों की टुकड़ियों ने अनुशासित कदमताल के साथ मार्च–पास्ट प्रस्तुत किया, जिसमें हाउस–वार दलों की सुगठित पंक्तियाँ भारत की एकता, अनुशासन और संगठनशीलता का सजीव प्रतीक बन गईं।

इस शानदार प्रदर्शन के पश्चात कक्षा पांचवी से आठवीं तक के छात्र- छात्राओं ने गीत वंदे- मातरम् की सुमधुर प्रस्तुति दी तत्पश्चात् कक्षा चौथी के छात्र छात्राओं ने आकर्षक नृत्य देश रंगीला की प्रस्तुति दी। इसी क्रम में कक्षा चौथी के छात्र रिधम अग्रवाल तथा बर्बरीक चौहान ने क्रमशः अंग्रेज़ी तथा हिंदी में गणतंत्र दिवस पर भाषण प्रस्तुत किया। विद्यालय के वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र- छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण पर एक शानदार नाट्य प्रस्तुति दी।

विद्यालय की वरिष्ठ हिंदी शिक्षिका सुश्री नीरू सिंह ने बच्चों को संविधान दिवस एवम् आज़ादी के महत्त्व से अवगत कराया, शिक्षिका सुश्री श्रृष्टि सिंह ने सुमधुर कविता पाठ करते हुए माहौल को देशभक्ति से भर दिया।

संस्था के अध्यक्ष तथा अधिवक्ता रमेशचंद्र सिंह ने इस अवसर पर विद्यालय के नाम अपने संदेश में कहा कि आज का यह ऐतिहासिक दिन हमें उस स्वर्णिम क्षण की याद दिलाता है जब 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ और भारत एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। यह दिन केवल तिरंगे को फहराने का नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने का दिन है।

हमारे संविधान ने हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का अमूल्य अधिकार दिया है। यह अधिकार हमें केवल सुविधाएँ नहीं देते, बल्कि कर्तव्यों की याद भी दिलाते हैं। एक सशक्त राष्ट्र वही होता है, जहाँ नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से निर्वहन करें।

प्राचार्य डॉ बसंत कुमार तिवारी ने इस अवसर पर अपने व्याख्यान में कहा कि आज का यह शुभ प्रभात हमें इतिहास के उस स्वर्णाक्षरित क्षण की स्मृति कराता है, जब सहस्रों बलिदानों, अनगिनत तपस्याओं और असंख्य स्वप्नों के फलस्वरूप भारत ने 26 जनवरी 1950 को स्वयं को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में प्रतिष्ठित किया। यह दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्र-चेतना का उत्सव है। हमारा संविधान केवल विधि-संहिता नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है। इसमें निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व वे दीप-स्तंभ हैं, जिनके प्रकाश में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा सतत अग्रसर है। जब तक ये मूल्य हमारे आचरण में जीवित रहेंगे, तब तक भारत अडिग और अजेय रहेगा। आज इस गणतंत्र दिवस पर हम सब यह संकल्प लें कि हम अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी आदर करेंगे,विविधताओं में एकता के सूत्र को सुदृढ़ करेंगे,और अपने आचरण से भारत माता की गरिमा को अक्षुण्ण रखेंगे।मिष्ठान वितरण के साथ इस पावन पर्व का समापन किया गया।

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