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एक यादगार पल : केंद्रीय विद्यालय सच में बना ‘विद्या का मंदिर’ — डॉ. अंशुमान चौधरी

Praveen Nishee Thu, Dec 11, 2025

मनेंद्रगढ़। एमसीबी। आमतौर पर हम देखते हैं कि विद्यालय अपने छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हैं, पर यह शायद पहली बार है जब किसी पूर्व छात्र ने अपनी जीवन की समूची सफलता का श्रेय सामाजिक रूप से अपने विद्यालय को अर्पित किया है।इस अवसर पर एक यादगार स्मृति में शील्ड केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य को डॉ. अंशुमान चौधरी ने दिया।

क्षेत्र के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अंशुमान चौधरी, जो पिछले 15 वर्षों से चिकित्सा सेवा एवं समाज सेवा में सक्रिय हैं, ने भावुक होकर बताया कि उनकी शिक्षा की मजबूत नींव केंद्रीय विद्यालय नार्थ झगराखांड ने रखी थी। 1990 के दशक में यहाँ पढ़े डॉ. चौधरी आज चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान रखते हैं। यह वही छात्र हैं जिनकी सेवाभावना और मानवीय कार्यों के अनगिनत उदाहरण क्षेत्र पहले भी देख चुका है।

उन्होंने कहा कि जो भी ऊँचाइयाँ उन्होंने प्राप्त की हैं, उसका श्रेय सबसे पहले अपने विद्यालय को जाता है, जहाँ से उन्होंने पूर्ण विद्यालयीन शिक्षा प्राप्त की और जीवन के मूल मूल्य सीखे।

छात्र-छात्राओं को सफलता का मंत्र देते हुए उन्होंने कहा—
“कठोर अनुशासन, गुरुजनों का सम्मान और समय प्रबंधन— यही तीन सूत्र जीवन में सफलता की नींव हैं।”

उनके वक्तव्य ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बुद्धिजीवियों ने ‘विद्यालय’ शब्द को यूँ ही विद्या का आलय नहीं कहा। सच में, केंद्रीय विद्यालय नार्थ झगराखांड आज भी अपने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों से गौरवान्वित है और क्षेत्र में ‘विद्या का सच्चा मंदिर’ होने की पहचान को सार्थक कर रहा है।

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