E-30 टीम की सटीक कार्रवाई से नक्सली हिंसा की साजिश नाकाम : सतमारही पहाड़ी में माओवादियों का बड़ा हथियार डंप ध्वस्त
Praveen Nishee Mon, Feb 16, 2026
गरियाबंद/मैनपुर, (रोशनलाल अवस्थी की कलम से) 16 फरवरी 2026 जिला पुलिस गरियाबंद ने नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए थाना मैनपुर अंतर्गत ग्राम बड़ेगोबरा के सतमारही पहाड़ी क्षेत्र में माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए घातक हथियारों के जखीरे को बरामद किया है।
विश्वसनीय खुफिया सूचना के आधार पर 16 फरवरी 2026 को जिला मुख्यालय से ई-30 ऑप्स टीम को रवाना किया गया। सघन सर्चिंग अभियान के दौरान पहाड़ी क्षेत्र में माओवादियों द्वारा डंप कर रखे गए ऑटोमैटिक हथियारों और गोला-बारूद को जब्त करने में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली।
बरामद हथियारों का विवरण—
पुलिस कार्रवाई में निम्न सामग्री जब्त की गई—
02 नग एसएलआर,01 नग इंसास रायफल
01 नग 12 बोर बंदूक,03 नग एसएलआर मैगजीन,01 नग इंसास मैगजीन,28 नग जिंदा एसएलआर कारतूस
पुलिस के अनुसार यह हथियार प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के ओडिशा राज्य कमेटी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा डंप कर रखे गए थे, जिन्हें क्षेत्र में संभावित हिंसक वारदातों के लिए उपयोग किया जाना था।
आत्मसमर्पण से मिली थी अहम सूचना
जनवरी 2026 में गरियाबंद क्षेत्र में सक्रिय धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन के माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद गहन पूछताछ में इस डंप की जानकारी सामने आई थी। उसी सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने यह ऑपरेशन अंजाम दिया।
”नक्सल उन्मूलन अभियान में बड़ी उपलब्धियां (2024 से 2026 तक)”
जिला पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक—
मुठभेड़ों में मारे गए माओवादी: 31,
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली: 29,
जब्त ग्रेडेड हथियार: 31
अन्य हथियार: 42 (कुल 73)
जब्त नकद राशि: ₹62,50,000/-
इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 304
नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 22
आईईडी बम: 14
कॉर्डेक्स वायर: लगभग 114.49 मीटर
बीजीएल सेल: 57
”हिंसक साजिश पर बड़ा प्रहार”
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बरामदगी से क्षेत्र में नक्सली हिंसा की संभावनाओं को निर्णायक रूप से विफल कर दिया गया है। लगातार आत्मसमर्पण और हथियार जब्ती की कार्रवाई से गरियाबंद जिला अब नक्सल प्रभाव से मुक्त होने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
जिला पुलिस की यह कार्रवाई न केवल सुरक्षा बलों की सतर्कता और रणनीतिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट संकेत देती है कि नक्सल नेटवर्क की कमर अब टूटने लगी है।
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