वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से : अटलजी की 101 वीं जयंती पऱ यादें... दो अच्छी मुलाक़ातें और बातचीत......
Praveen Nishee Thu, Dec 25, 2025
अटलजी उस समय विपक्ष के बड़े नेता थे वे (छत्तीसगढ़ उस समय मप्र का हिस्सा) 1984 में लोक चुनाव के दौरान रायपुर प्रवास पर आए थे,उस समय इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद चुनाव हो रहे थे,मैं बतौर पत्रकार अटलजी से मिलने उनकी भतीजी करुणा शुक्ला (चाची)के साथ गया था,उस समय अटलजी से मुलाक़ात और बातचीत की बहुत इच्छा थी। अटलजी से सर्किट हॉउस में मुलाकात हुई। मेरा परिचय जाने बिना ही उन्होंने करुणा शुक्ला से कहा कि इस बार लगता है भाजपा अपने सबसे बुरे दौर पर रहेगी...हमने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी फिर ज़ब चाची ने मेरा परिचय पत्रकार के रूप में कराया तो उन्होंने कहा...ये छापने की बात नहीं है...? खैर बाद में लोकसभा चुनाव का परिणाम आया तो समूचे भारत में भाजपा के केवल 2 सांसद ही चुने गये थे।तब लगा की जनता की नब्ज पहचानने का पूर्वानुमान अटलजी जैसे नेता को ही हो सकता है।1984 में भाजपा को देश में केवल 2 सीटें हीं मिली थीं..पहली लोसहनाम कोड़ा(आंध्रप्रदेश)1984 के आम चुनाव में देशभर में इंदिरा सहानूभूति लहर के बावजूद यहां भाजपा के चंदू पाटिया रेड्डी ने जीत का पर चम लहराया था।1984 के आम चुनाव में भाजपा के चंदू पाटिया ने कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व पीएम नरसिम्हा राव को पटखनी दी थी, 1984 की इंदिरा सहानूभूति लहर के बावजूद कांग्रेस के नेता पीवी नरसिम्हा राव को 209564, भाजपा के चंदूभाई को 26 3762 वोट मिले थे, नरसिम्हा राव चुनाव हार गए थे।सात साल बाद 1991 में हुए आम चुनाव में नरसिम्हा राव नांदियाल सीट से रिकॉर्ड मतों से जीते थे। 1984 के पहले हुए आमचुनावों में बीजेपी कभी भी इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई थी।दूसरा लोक सभा था, मेहसाणा (गुजरात)1984 के आम चुनाव में भाजपा को गुजरात के मेहसाणा में ए के पटेल ने जीत दर्ज की थी।1984 के आम चुनाव में पटेल ने कांग्रेस के आर एस कल्याण भाई को हराया था।एके पटेल भाजपा को 287555, कांग्रेस के राय नका सागर भाई कल्याण भाई को 243659 वोट मिले थे।इसके बाद के कई चुनावों में यह सीट पटेल के खाते में ही दर्ज रही..
दूसरी मुलाक़ात....
अटलजी से मुलाक़ात का दूसरा मौका था ज़ब अटलजी का फिर रायपुर प्रवास हुआ.. उनकी पत्रकार वार्ता सर्किट हॉउस (आज के राजभवन) में आयोजित थी...पत्रकार वार्ता शुरू होने के पहले अटलजी ने पूछा... शंकर पांडेजी कौन हैं...?मैंने कहा.. मैं...फिर पूरी पत्रकार वार्ता हुई... समाप्त होने तक मैं, उपस्थित कुछ पत्रकार यही सोचते रहे कि अटलजी ने मेरा नाम क्यों पूछा..? बाद में पत्रकार वार्ता समाप्त होने पर मैंने निकलते -निकलते पूछ ही लिया कि... भाई साहब आपने मेरा नाम क्यों पूछा...? वरिष्ठ नेता अटलजी ने कहा-मेरे मित्र पत्रकार मधुकर खैर से मैंने रायपुर आकर फोन किया था, पूछा था कि आपसे पत्रवार्ता में मुलाक़ात होगी क्या..?तो उन्होंने कहा था कि तबियत ठीक नहीं होने के कारण नहीं आ सकूंगा... पत्रकार शंकर पांडे से मेटर लेकर आपकी पत्रवार्ता बनाकर भेज दूंगा.. इसीलिये मैंने तुम्हारा नाम लिया था और कोई बात नहीं थी... तब मेरी जान में जान आई... मै तनाव में था कि मुझ जैसे पत्रकार को अटल जी कैसे जानते हैं...(फोटो 1984 यानि लगभग 41 साल पुरानी)
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