: 181 तालाबों में अधिकांश ख़ो गये ....? बूढातालाब में तो विवेकानंद से पृथ्वीराज कपूर तक तैर चुके हैं...
Admin Wed, Nov 13, 2024
छत्तीसगढ़ राज्य, उसकी राजधानी रायपुर बनने से पहले तक यह तालाबों की नगरी कहलाती थी , ना कभी नलों में पानी की कमी रहती थी और ना ही आंख में। लेकिन अलग राज्य क्या बना,शहर को बहुत से दफ्तर, घर, सड़क की जरूरत हुई, देखते-ही-देखते ताल-तलैयों की बलि चढ़ने लगी।कोई 181तालाबों की मौजूदगी वाले शहर में अब बमुश्किल एक दर्जन ही तालाब बचे हैं और वे भी हांफ रहे हैं अस्तित्व बचाने के लिए....? वैसे यहां भी सुप्रीम कोर्ट आदेश दे चुकी है कि तालाबों को उनका समृद्ध अतीत लौटाया जाए लेकिन लगता है, गुमनामी की उन गलियों में खो चुके हैं और लौटना नामुमकिन होता है।जीई रोड पर समानांतर तालाबों की श्रँखला है जिसकी खासियत है कि निचले हिस्से में बहने वाले पानी को यू-शेप का तालाब बना कर रोका गया, ब्लाक सिस्टम के तहत हांडी,कारी धोबनी, घोडारी,आमा तालाब, रामकुंड,कर्बला,चौबे कालोनी के तालाब जुड़े हुए हैं।बूढ़ा-बंधवा तालाब के ओवर फ्लो का खारून नदी में ही मिलना विरली पुरानी तक नीक रही है। बेतरतीब निर्माण ने तालाबों के अंत र्संबंधों,नहरों, जल आवक रास्तों को ही निरूद्ध नहीं किया, अपनी तकदीर पर भी सूखे को जन्म दे दिया।
कभी बूढ़ा तालाब शहर का बड़ा-बूढ़ा हुआ करता था। करीब 1402 में राजा ब्रम्ह देव ने रायपुर शहर की स्थापना की थी, तभी यह ताल बना। वैसे इसे लेकर भी पूरे देश की तरह बंजारों, मछुआरों की कहानियां मशहूर हैं। बूढ़ा तालाब पहले इस तरह अन्य तालाबों से जुड़ा था इसका पानी लबालब होते ही महाराजबंध तालाब में पानी जाने लगता थाऔर उसके आगे अन्य किसी में।इन तालाब-श्रँखलाओं के कारण ना तो रायपुर कभी प्यासा रहता, ना ही तालाब की सिंचाई,मछली, सिंघाड़ा आदि के चलते भूखा....! कहते हैं कि इस तालाब के किनारे कोलकाता-मुंबई और जगन्नाथपुरी जाने के रास्ते निकलते थे। 1950 में पृथ्वी थियेटर के बैनर तले 'काबुलीवाला 'नाटक के मंचन के सिलसिले में पृथ्वीराज कपूर भी रायपुर आये थे, पृथ्वीराज कपूर तो बूढ़ातालाब को देख मंत्र- मुग्ध हो गए थे। वे जितने दिन भी यहां रहे, हर रोज यहां नहाने आते थे।आज यह जाहिर तौर पर कूड़ा फेंकने व गंदगी उड़ेलने की जगह बन गया है। इसका नाम विवेकानंद तालाब हो गया, क्योंकि बीचों-बीच विवेकानंद की एक प्रतिमा स्थापित की गई है, लेकिन यहां जानना जरूरी है-बूढ़ा से विवेकानंद तालाब बनने की प्रक्रिया में इसका क्षेत्र 150 एकड़ से घटकर 60 एकड़ हो गया।बताते हैं कि जब स्वामी विवेकानंद 14 साल के थे तो रायपुर आये थे,वे तैरकर तालाब के बीच में बने टापू तक जाते थे, जलकुंभी से पटे तालाब के बड़े हिस्से पर लोग कब्जा कर चुके हैं,यही कहानी दीगर तालाबों की है, दल दल, बदबू,सूखा, कचरा! शहर के कई चर्चित तालाब देखते-देखते ही ओझल हो गए। रजबंधा तालाब का फैलाव 7.975 हेक्टेयर था, आज वहां चौरस मैदान है। प्रेस काम्प्लेक्स बन गया है। 6 हेक्टेयर से बड़े सरजूबंधा को पुलिस लाइन लील गई तो डेढ़ हेक्टेयर के विशाल खंतो तालाब पर शक्ति नगर कालोनी बन गई। पचारी, नया तालाब, गोगांव तालाब को उद्योग विभाग के हवाले करदिया गया,ढाबा(कोटा) डबरी तालाब (खम्हारडीह) पर कब्जे हो गए। कंकाली तालाब,ट्रस्ट तालाब,नारून तालाब आदि दसियों पर या तो कब्जे हो गए या फिर वे सिकुड़ कर शून्य की ओर ही बढ़ रहे हैं। बानगी है कि शहर के बीच तालाब किस तरह शहरीकरण की चपेट में आए।यहां जानना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ में तालाब लोकपरंपरा एवं सामाजिक दायित्व रहा है। लोनिया, सबरिया, बेलदार, रामनामी जैसे समाज पीढ़ियों से ही तालाब गढ़ते आए हैं अंग्रेजों के शासन के समय भीषण अकाल के दौरान तब, सरकार ने खूब तालाब खुदवाये थे और ऐसे कई सौ तालाब ‘लंकेटर तालाब’ के नाम से आज भी विद्यमान हैं। ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ को यहां पहली हिंदी पत्रिका कहा जाता है। इसके मार्च- अप्रैल,1900 के अंक में प्रकाशित एक आलेख गवाह है कि उस काल में भी समाज तालाबों को ले कर कितना गंभीर, चिंतित था। आलेख कुछ इस तरह था' रायपुर का आमातालाब प्रसिद्ध है इसे शोभाराम साव रायपुर निवासी के पूर्वजों ने बनवाया था,अब पानी सूख कर खराब हो गया है। सावजी ने मरम्मत पर 17 हजार रुपए खर्च करने का निश्चय किया है। काम भी जोरशोर से जारी हो गया है।आपका औदार्य प्रदेश में चिरकाल से प्रसिद्ध है।सरकार को चाहिए कि इस ओर ध्यान देवे।’ खैर उसी रायपुर का तेलीबांधा तालाब,भ्रष्टाचार, लापरवाही संवेदनहीनता की बानगी बना हुआ है।1929 -30 के राजस्व रिकार्ड में इसका रकबा 35 एकड़ था लेकिन आज आधे पर भी पानी नहीं है। उस रिकार्ड के मुताबिक जीई रोड का गौरवपथ तालाब पर ही है। इसके अलावा जलविहार कालोनी की सड़क,बगीचा, आरडीए परिसर, लायंस क्लब का सभागार भी पानी की जगह पर बना है। यहां 12 एकड़ जमीन खाली करवा कर बसे लोगों को बोरियाकला में विस्थापित किया गया।जब यह जमीन खाली हुई, करीब 2 एकड़ जमीन पर नगरनिगम मकान बनाने के लिए मांगने लगा। वह तो भला हो जनवरी 20 11 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य के मुकदमें के फैसले का....! जिसमें अदालत ने देश के सभी राज्यों को आदेश दिया था कि तालाब के पानी, निस्तार की जमीन पर कोई भी निर्माण ना हो।छग सरकार ने तेलीबांधा से हटाए लोगों को उनकी ही पुरानी जगह पर ही 720 मकान बना कर दे दिया है।भीमा तालाब में अब तो नया रायपुर बन गया है, जो अभनपुर के सामने तक फैला है और इसको बनाने में ना जाने कितने ताल- तलैया, जोहड़,नाले दफन हो गए हैं। वहां खूब चौड़ी सड़केँ हैं,भवन चमचमाते हुए हैं, सब कुछ उजला है, लेकिन सवाल खड़ा है कि इस नई बसाहट के लिए पानी कहां से आएगा......?
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