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सुखतेल नदी का पुल नहीं, भ्रष्टाचार का दलदल!” : अमलीपदर पुल पर मुरलीधर सिन्हा के तीखे तेवर, बोले: ‘कमीशन बिना विकास नहीं?

Praveen Nishee Wed, Jan 14, 2026

गरियाबंद/अमलीपदर। (रोशन लाल अवस्थी)अमलीपदर–सुखतेल नदी पर स्वीकृत पुल अब जनता की जरूरत नहीं, बल्कि विभागीय भ्रष्टाचार की सबसे ज्वलंत मिसाल बनता जा रहा है। वर्ष 2009 में बजट में स्वीकृत यह बहुप्रतीक्षित पुल आज तक धरातल पर उतरने को तरस रहा है, जबकि उसी दौर में मैनपुर–जीड़ार–कुल्हाड़ीघाट मार्ग पर पांच-पांच पुल बनकर तैयार हो चुके हैं।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा के कद्दावर नेता सह संयोजक भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ एवं समाज सेवक मुरलीधर सिन्हा ने इस पूरे मामले पर आक्रामक हमला बोलते हुए कहा कि

“यह पुल विकास का नहीं, कमीशनखोरी का शिकार है। टेंडर पास होने के बाद भी वर्क ऑर्डर तभी निकलता है जब ठेकेदार एडवांस में कमीशन दे“।

”तीसरी बार टेंडर, फिर भी कछुआ चाल“

जानकारी के मुताबिक, पिछले वर्ष तृतीय बार टेंडर जारी होने के बाद टेंडर खोला गया, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के चलते कार्य आदेश जानबूझकर लटकाया गया। नतीजा यह कि निर्माण कार्य आज भी फाइलों में कैद है और जनता धूल फांक रही है।

विभागीय लापरवाही या संगठित भ्रष्टाचार?

मुरलीधर सिन्हा ने सीधे-सीधे सवाल दागते हुए कहा—

जब 2009 में स्वीकृति मिली, तो 16 साल में पुल क्यों नहीं बना?

क्या अमलीपदर की जनता विकास की हकदार नहीं?

क्या लोक निर्माण विभाग कमीशन के बिना काम करने में अक्षम हो चुका है?

उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर देरी कर लागत बढ़ाई जा रही है, ताकि भ्रष्ट तंत्र अपनी जेबें और भर सके।

जनता का आक्रोश, जवाबदेही तय हो

अमलीपदर क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बरसात में सुखतेल नदी पार करना जान जोखिम में डालने जैसा है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।

मुरलीधर सिन्हा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द वर्क ऑर्डर जारी कर निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो जन आंदोलन किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे।

सवाल साफ है—

क्या अमलीपदर का पुल बनेगा या भ्रष्टाचार की नदी में हमेशा डूबा रहेगा?

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