वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से.*(कॉलम 21 सालों से लगातार) : मैंने ऐ सूरज तुझे पूजा नहीं,समझा तो हैं..... मेरे हिस्से में भी थोड़ी, धूप आनी चाहिये....
Praveen Nishee Fri, Jul 3, 2026
रायपुर नकटी गांव से सामने आई तस्वीरें सिर्फ मकानों के ढहने की नहीं,गरीबों के सपने भरोसे टूटने की कहानी बयां कर रही हैं। प्रस्तावित विधा यक कॉलोनी निर्माण के लिए प्रशासन का पुलिस बल की मौजूदगी में करीब 80 घरों पर बुलडोजर चला। सवाल यह है कि इनमें 32 घर वही थे,जो प्रधानमंत्री आवास, इंदिरा आवास योजना के तहत बने थे। जिस सरकार ने गरीबों को पक्का घर देने का दावा किया उसी सरकार ने अपने विधायकों के आलीशान आवासों के लिए उन्हीं गरीबों की छत छीन ली,यह कैसा विकास है..? भाजपा के सांसद बृजमोहन अग्रवाल नहीं चाहते थे लोगों को उजाड़कर विघायक कॉलोनी बने, वे लगातार इसका विरोध भी करते रहे, एक साल पहले 7 जून 2025 को सीएम को पत्र भी लिखा था पर.......वैसे अपनी ही साय सरकार में मोहन भैया की उपेक्षा की खबर आती ही रहती हैं....!कहा जाता है, नकटी मामले में एक मंत्री की बड़ी भूमिका रही है...?
छ्ग के सबसे वरिष्ठ अफसर
हैँ डीजीपी अरुण देव....
मुख्य सचिव, राज्य सरकार का सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी,सिविल सेवक होता है। राज्य सिविल सेवा बोर्ड, सचिवालय,कैडर, भारतीय स्वतंत्रता सेवा, राज्य सरकार के कार्य के अंतर्गत सभी सिविल सेवाओं का पदेन प्रमुख होता है।मुख्यसचिव राज्य प्रशासन के सभी मामलों में सीएम के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य करता है। मुख्य सचिव सबसे वरिष्ठ अफसर होता हैं पर मौजूदा समय में सीएस, डीजीपी से 2 साल जूनियर हैं।आईपीएस अरुणदेव 1992 बैच के हैं,प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह ने 16 मई को आदेश जारी उन्हें स्थायी डीजीपी बना दिया हैं । सरकार ने 17 महीने पहले प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी दी थी।वैसे वरिष्ठता के हिसाब से डीजीपी गौतम 1992 बैच के आईपीएस हैं, मुख्य सचिव विकासशील 1994 बैच के आईएएस हैं यानि 2 साल जूनियर हैं पर उनका ओहदा बड़ा हैं,अधीन गृहविभाग ही डीजीपी की पद स्थापना का आदेश जारी करता है। इधर छ्ग के वन विभाग के मुखिया 1994 बैच के आईएफएस अरुण पांडे को पीसीसीएफ बनाया गया हैं।
बस्तर आईजी मीणा
के नाम हैं कई रिकार्ड...
बिलासपुर, दुर्ग के बाद अब बस्तर के आईजी के रूप में आईपीएस बद्रीनारायण मीणा ने कार्यभार सम्हाल लिया है, मूलत: राजस्थान के रहने वाले आईपीएस बद्रीनारायण मीणा 2004 बैच के हैं।मीणा के पास पुलिसिंग कानून- व्यवस्था संभालने का लंबा अनुभव है।अब उनके कंधों पर छग के सबसे चुनौतीपूर्ण,संवेदनशील बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने, सुरक्षातंत्र को दुरुस्त रखने की बड़ी जिम्मे दारी हैँ, वे पुलिस मुख्यालय,नवा रायपुर में आई जी पद पर कार्यरत थे, छग में संभवत:सबसे अधिक 9 जिलों में एसपी,एस एसपी रहने का रिकार्ड है।बलरामपुर,कवर्धा,राजनांदगांव, जगदलपुर,कोरबा,बिलासपुर,रायपुर,रायगढ़,दुर्ग के एसपी, एसएसपी भी रहे हैँ। मीणा, बिलासपुर के एसपी रहे तो वहीं आईजी भी बने, दुर्ग एसपी रहे वहीं आईजी भी बने, सुन्दरराज पी,की प्रति नियुक्ति के बाद बस्तर आईजी बने हैँ,वे जगदलपुर के भी एसपी रह चुके हैं,सुंदरराज पी,5 वर्षों से लगातार बस्तर रेंज की कमान संभाल रहे थे। अपने करियर में बस्तर एएस पी, एसपी, डीआईजी,आईजी जैसे पदों पर करीब 14 वर्षों तक सेवाएं दीं। भारत सरकार के एनआईए में नई जिम्मेदारी निभाएंगे।
एसपी की बस्तर में
प्रशिक्षण-पाठशाला...
छत्तीसगढ़ के मूल निवासी डीएसपी से आईपीएस बने कोंडागांव जिले में एसपी बने पंकज चंद्रा अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल प्रति योगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे बच्चों के लिये शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं, साहब सक्रिय हैं तो एडीशनल एसपी डीएसपी, प्रशिक्षण में सहयोग दें रहे हैं, बस्तर नक्सलमुक्त हो गया है अब यहां के बच्चे आगे बढ़ना चाहते हैँ, सबसे बड़ी बात यह है कि एसपी की पाठशाला में लड़कियों की संख्या भी बहुत है।आईपीएस चंद्रा का मानना है कि बस्तर के बच्चे प्रतिभाशाली हैं, शारीरिक दक्षता में तो ये बेजोड़ हैं, केवल शैक्षणिक वातावरण नहीं मिलता , प्रतियोगी परिक्षाओं की कैसे तैयारी करें इसे लेकर मार्गदर्शन किया जाता हैं वहीं सेना के रिटायर अधिकारी बच्चों को शारीरिक मापदंड के अनुरूप प्रशिक्षित कर रहे हैं। प्रशिक्षण निशुल्क है।केवल 15 बच्चों,बच्चियों से शुरू प्रशिक्षण में आज 117 लोग शामिल हो चुके हैं।
औऱ अब बस....
0 एसपी, एडीशनल एसपी, डीएसपी की तबादला सूची कहां अटक गई है.....?
0रायपुर के ही 10वीं पास किसान अश्विनी बांधे (53) का दावा है, स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग,सामने बना गार्डन उनके ही पूर्वजों की जमीन पर बना है। इस जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में करीब साढ़े 3 हजार करोड़ का मुआवजा मांगने गये हैं।
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