: वीर बाल दिवस-पर वीर बालकों के शौर्य एवं अद्भुत साहस की चर्चा करेगी पतंजलि योग समिति
Admin Sun, Dec 22, 2024
मनेंद्रगढ़। एमसीबी।पतंजलि योग समिति की जिला इकाई 26 दिसंबर को "वीर बाल दिवस-" का आयोजन करेगी। कार्यक्रम के संयोजक सतीश उपाध्याय ने कहा कि दुनिया में जब भी वीर बालकों की बात चलेगी तो उसमें बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा ।गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों ने सिर्फ 7 और 9 साल की आयु में धर्म की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी, जिनके सम्मान में देश ने 26 दिसंबर 2023 को पहला-" वीर बाल दिवस" मनाया ।
पौराणिक युग से लेकर आधुनिक काल तक वीर बालक बालिकाएं भारत की परंपरा का प्रतिबिंब रहे हैं। देश के नौनिहालों को वीरता की वास्तविकता से परिचित कराने वाले -"वीर बाल दिवस कार्यक्रम प्रति वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है। श्री उपाध्याय ने कहा कि बलिदानों की पीढ़ियों को देश सदा से याद करता हुआ आया है उसे एकजुट होकर राष्ट्र के रूप में नमन करने के लिए 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में एक नई शुरुआत की गई है ।वीर बाल दिवस हमें याद दिलाता रहेगा कि शौर्य की पराकाष्ठा के सामने कम आयु मायने नहीं रखती हमें यह भी याद दिलाता रहेगा की दसवें गुरुओं का योगदान क्या है? देश के स्वाभिमान के लिए सिख परंपरा का बलिदान क्या है ?वीर बाल दिवस हमें बताया कि भारत क्या है भारत की पहचान क्या है। वीर साहबजादों के बलिदान का स्मरण करते हुए एवं श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सतीश उपाध्याय ने कहा कि 26 दिसंबर के दिन वीर बाल दिवस घोषित करने से लोगों में शौर्य और बलिदान की इतिहास में छुपे शौर्य से राष्ट्र के प्रति देश प्रेम का भाव पैदा होगा उन्होंने कहा एक और लाखों की फौज और दूसरी और अकेले होकर भी निडर खड़े गुरु के वीर साहिबजादे यह वीर साहिबजादे किसी धमकी से डरे नहीं किसी के सामने झुके नहीं। अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया उन्होंने कहा कि हमें साथ मिलकर वीर बाल दिवस के संदेश को देश के कोने-कोने तक लेकर जाना है ।हमारे साहबजादों का जीवन संदेश देश के हर बच्चे तक पहुंचे वह उनसे प्रेरणा लेकर देश के लिए समर्पित नागरिक बने हमें इसके लिए भी प्रयास करना है ।अगर हमें भारत को भविष्य में सफलता की शिखर तक लेकर जाना है तो हमें अतीत के संकुचित नजरों से भी आजाद करना होगा इसीलिए आजादी के अमृत काल में देश ने गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का प्राण फूंका है ।
"वीर बाल दिवस -"देश के उन पांच प्राणों के लिए प्राण वायु की तरह है जिसका संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश के सामने रखा है। वीर बाल दिवस की जानकारी देते हुए पतंजलि योगपीठ के वरिष्ठ योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय ने बतलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी 2022 को गुरु श्री गोविंद सिंह जी के प्रकाश वर्ष पर साहब ज्यादा जोरावर सिंह और साहबजादा फतेह सिंह जी की शहादत की याद में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसी दिन साहब जादे जोरावर सिंह और साहब जादे, फतेह सिंह जी को एक दीवार पर जिंदा चुनवा दिए जाने के कारण भी शहीद हुए थे।
इन दोनों महान बालकों ने धर्म के सिद्धांतों से विचलित होने के बजाय मृत्यु का वरण किया था माता गुजरी, श्री गोविंद सिंह जी और चार साहिबजादों की वीरता और आदर्श लाखों लोगों को शक्ति प्रदान करते हैं ,वे अन्याय के आगे कभी नहीं झुके उन्होंने एक ऐसे विश्व की कल्पना की जो समावेशी और सामंजस्यपूर्ण हो ।
गुरु गोविंद सिंह जी का अटल संकल्प था- राष्ट्र प्रथम का मंत्र, व्यक्ति से बड़ा विचार, विचार से बड़ा राष्ट्र ,राष्ट्र प्रथम का यह मंत्र गुरु गोविंद सिंह जी का अटल संकल्प था ।जब वे बालक थे तो यह प्रश्न आया कि राष्ट्र धर्म की रक्षा के लिए बड़े बलिदान की जरूरत है उन्होंने अपने पिता से कहा आपसे महान आज कौन है यह बलिदान आप दीजिए जब वह पिता बने तो इस तत्परता से उन्होंने अपने बेटे को भी राष्ट्र धर्म के लिए बलिदान करने में संकोच नहीं किया ।जब उनके बेटों का बलिदान हुआ तो उन्होंने अपने संगत को देखकर कहा -"चार मुए तो क्या हुआ ,जीवित कई हजार -"अर्थात मेरे चार बेटे मर गए तो क्या हुआ संगत के कई हजार साथी हजारों देशवासी मेरे बेटे ही हैं राष्ट्र प्रथम को सर्वोपरि रखने के लिए परंपरा बहुत बड़ी प्रेरणा है।
26 दिसंबर 1705 का दिन।
दसवें सिख गुरु गोविंद सिंह के छोटे पुत्रों साहब जादे जोरावर सिंह और साहब जादे फतेह सिंह 9 और 6 साल की छोटी उम्र में सिख पंथ की गरिमा और सम्मान की रक्षा हेतु 26 दिसंबर 1705 को दिए गए उनके सर्वोच्च और अप्रतिम बलिदान के लिए सम्मान स्वरूप 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है कृतज्ञ श्रद्धांजलि के रूप में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित किया गया प्रहलाद, ध्रुव, नचिकेता से चली आ रही बालकों की वीरता ज्ञान तप और धैर्य की परंपरा रही है यही आने वाली पीढियां के लिए आदर्श हो सकते हैं वीर बाल दिवस देश के स्वाभिमान के लिए सिख परंपरा के बलिदान और दसवें गुरुओं के योगदान की याद दिलाने के साथ ही भारत की पहचान बताने ,अतीत पहचानने और आने वाले भविष्य के निर्माण की भी प्रेरणा देता रहेगा ।
यह एक भारत श्रेष्ठ भारत के विचार के लिए प्रेरणापुंज भी है इनकी शौर्य गाथा का स्मरण किया जाना चाहिए । बलिदानी बालकों की शौर्य गाथा की उल्लेख करते हुए पतंजलि योग समिति के योग प्रशिक्षक ने कहा कि बालको की शौर्य गाथा हमारी विरासत है, गुरु गोविंद सिंह के बच्चे अजीत सिंह ,जुझार सिंह जोरावर सिंह, फतेह सिंह का बलिदान मानवता के विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक है ।अजीत सिंह और जुझार सिंह, चमकौर की लड़ाई में बलिदानी हुए तो वहीं जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवारों में चुनवा दिया जाता है। इतिहास से हमें प्रेरणा लेना चाहिए यही इतिहास त्याग और बलिदान की परंपरा हमारी थाती और प्रेरणा है।
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