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8th July 2026

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श्रद्धा महिला मंच द्वारा राजमोहिनी देवी जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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गोंडवाना रत्न पद्मश्री माता राजमोहिनी देवी की 112वीं जयंती : श्रद्धा महिला मंच द्वारा राजमोहिनी देवी जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

Praveen Nishee Wed, Jul 8, 2026

मनेंद्रगढ़ । एमसीबी। श्रद्धा महिला मंच ग्राम सिरौली एवं ग्राम पंचायत सिरौली के संयुक्त तत्वावधान में गोंडवाना रत्न पद्मश्री माता राजमोहिनी देवी की 112वीं जयंती बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

सर्वप्रथम माता राजमोहिनी देवी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । मुख्य अतिथि की आसंदी से सभा को संबोधित करते हुए जनजाति गौरव समाज के संभागीय अध्यक्ष सेवा निवृत प्रधान पाठक एवं समाजसेवी परमेश्वर सिंह मरकाम ने सभा को संबोधित करते हुए बतलाया कि माता राजमोहिनी देवी का जन्म विकासखंड वाड्रफनगर के ग्राम शारदापुर के एक साधारण गोंड समाज परिवार में 7 जुलाई 1914 को हुआ था अल्पायु में ही उनका विवाह हो गया था तथा विधि की विडंबना वश उन्हें अल्पायु में वैधव्य का सामना करना पड़ा ।

उनके जीवन में आए इस आकस्मिक संकट वज्रपात के कारण उनके समक्ष बच्चों के पालन पोषण की विकट समस्या आन खड़ी हुई । विपरीत परिस्थितियों का सामना करते-करते उनका धर्म आध्यात्म की ओर झुकाव हो गया।

भुखमरी की कगार पर खड़ा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया था, और एक दिन वे कंदमूल फल की तलाश में जंगल गई परंतु दुर्भाग्यवश उन्हें उस दिन कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ। भूख प्यास से हताश निराश होकर भी सत नदी के वृक्ष नीचे चट्टान में बैठकर व्यथित होकर रोने लगी ।

कुछ पल बाद ध्यानस्थ हो गई। कुछ समय बाद उनका ध्यान टूटा ध्यान टूटने के पश्चात उन्हें अपने आप में अद्भुत एवं अपूर्व ऊर्जा का एहसास हुआ। उन्हें लगा जैसे कि परमात्मा ने उन्हें विशिष्ट उद्देश्य को लेकर ही इस दुनिया में भेजा है, उन्हें उनके जैसे हजारों लोगों का सहारा बनना है समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों, नशा पान और मांसाहार के खिलाफ जन जागरण कर सुधार और परिवर्तन लाना है । इस घटना के बाद से माताजी ने सफेद वस्त्र को परिधान के रूप अपना कर आजीवन मांसाहार त्यागने का व्रत ले लिया इसके बाद माता राजमोहिनी देवी ने गांव-गांव जाकर नशा पांन मांसाहार के खिलाफ जन जागरण कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने 1951 से 40 साल नंगे पांव एवं सफेद वस्त्र धारण कर जन जागरण कार्य किया नशा पान और मांसाहार के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा,स्वास्थ्य, स्वच्छता,बाल विवाह,छुआछूत ,जादू टोना ,कन्या भ्रूण हत्या आदि कुरीतियों एवं को विचारों को भी समाज से उखाड़ फेंकने की दिशा में भी आजीवन संघर्ष किया। उनकी सेवा और जन जागृति कार्य से प्रभावित होकर हजारों लाखों लोग उनके शिष्य बन गए उनका प्रिय भजन था

॥राम भजो भाई गोविंद भजो भाई ,राम के नाम में तो दुख बिसराई॥

माताजी की दिनों दिन लोकप्रियता बढ़ती गई और देखते ही देखते गांव की सीधी शादी साधारण राजमन बाई माता राजमोहिनी देवी बन गई। परमेश्वर सिंह अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बतलाया कि माता राज मोहिनी देवी के समय की तुलना में आज नशाखोरी हजार गुना बढ़ गया है इसमें किशोर युवा प्रौढ़ और महिला पुरुष आदि सभी वर्ग धर्म के लोग शामिल हैं। शासन प्रशासन द्वारा नशा उन्मूलन की दिशा में अनेकों प्रयास किया जा रहा है परंतु जन सहयोग के अभाव के कारण इसका नियंत्रण नहीं हो पा रहा है आज माता जी की जयंती पर हम सबको उनका पूण्य स्मरण करते हुए यह संकल्प लेना होगा कि हम और हमारा परिवार गांव और समाज कैसे नशा मुक्त हो नशा पान के कारण आज मानव के स्वास्थ्य धन और जीवन की क्षति व विनाश हो रहा है इसके पहले कि यह सुरसा मुखी नशा पूरे समाज को लील ले इसके पहले हम सबको इसकी परित्याग का संकल्प लेना होगा । छोटी-छोटी शुरुआत करके भी समाज को बड़ा से बड़ा संदेश दिया जा सकता है। सभा में बैठे सभी विद्वत जनों व प्रबुद्ध जनों से मेरा निवेदन है कि आज सभी इस पर विचार कर ग्राम पंचायत सिरौली को ही नशा मुक्त पंचायत बनाने का संकल्प लें और इस अवसर यही संकल्प माता राजमोहिनी देवी के कार्यों व विचारों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।

सभा को पूर्व सरपंच अमोल सिंह मरावी ने माता राजमोहिनी देवी के प्रति अपनी भाव पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके त्याग संघर्ष व मानव सेवा कार्य की प्रशंसा करते हुए नारी प्रेरणा पुंज व महिला सशक्तिकरण की मिसाल बतलाया ।

नशा मुक्ति सहित उनके बताएं मार्ग पर चलने का प्रयास ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी । कार्यक्रम में श्रद्धा महिला मंच की श्रीमती कौशल्या सिंह द्वारा भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम माता राजमोहिनी देवी ने नशा उन्मूलन मांसाहार त्याग शिक्षा स्वास्थ्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अपने जन जागरण कार्यों से विशाल जन आंदोलन खड़ा कर दिया उनके आह्वान पर लाखों लोगों ने नशा व मांसाहार का परित्याग कर दिया उनके अंनुयायी छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में रहकर उनके बताएं मार्गों पर आज भी चल रहे हैं। सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री वह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है जो हम सब सरगुजा वीडियो के लिए घरों का विषय है कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कौशल्या सिंह व आभार प्रदर्शन मदन सिंह द्वारा किया गया इस कार्यक्रम में श्री रघुबर सिंह श्रीमती ललिता पाव प्रेमवती रिजवाना शिव देवी वार्ड पंच ग्रामीण जन पुरुष महिलाएं बच्चे आदि शामिल थे।

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