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: रविशंकर एक नेता नही बल्कि विचारधारा है,गांव गरीबों की आवाज़ है,जन-जन की उम्मीद है

Admin Sat, Aug 12, 2023

जनकपुर । एमसीबी। रविशंकर सिंह की पहचान आज के दौर में एक ऐसे नेता की है, जो व्यवस्था की बदहाली के विरोध में अनूठा अंदाज अपनाकर 14 बरस से वह नंगे पांव ही क्षेत्र में घूम रहे हैं। सिस्टम की बदहाली के खिलाफ उसने नंगे पाव रहने का संकल्प लिया है। वह 3 बार से जिला पंचायत सदस्य अलग अलग क्षेत्रो से निर्वाचित होते आ रहे है। जिला पंचायत रविशंकर सिंह अपने नंगे पाव चलने की कहानी बताते हुए कहते है कि मैं एक गांव जा रहा था वहां पर एक बुजुर्ग व्यक्ति तपती धूप में नंगे पाव जा रहा था उसके पैर में छाले पड़ गए थे, तो मैंने अपने पैरों के चप्पल उसी वक्त उस बुजुर्ग को दे दिया। फिर गांव जाकर देखा कि गांव के हालात बद से बदतर है तो मैंने यह ठान लिया जब तक गांव की तस्वीर नहीं बदलेगी मैं नंगे पाव ही रहूंगा। एलएलएम शिक्षा प्राप्त 36 वर्षीय रविशंकर बीते 14 साल से नंगे पैर क्यों चलते है पूछने पर बताते है कि नंगे पैर रहकर मैं यह एहसास करता हु कि, आज भी मेरे जैसे सैकड़ो लोग है जिनके पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे, ठंड में पैर ठिठुरता होगा और यही तकलीफ मुझे भी होती है तो मुझे एहसास होता है कि आज भी गांवों में लोग आभावग्रस्त जीवन जीने को मजबूर है। कहते हैं , जब तक मेरे क्षेत्र में बदलाव नही होगा तब तक मैं नंगे पैर चलकर के तकलीफ सहता रहूंगा और उनके बीच मे रहकर के काम करता रहूंगा।भरतपुर ब्लाक के निवासी जिला पंचायत सदस्य नंगे पैर नाम से क्षेत्र में प्रसिद्ध रविशंकर ने व्यवस्था से खिन्न होकर अपने पैरों से चप्पल उतार दिए थे। चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने चप्पल नहीं पहनी है। आज भी वह नंगे पांव रहते हैं । जिला पंचायत क्षेत्र में पहुंचते हैं, समस्याएं सुनकर लिखते हैं और नंगे पांव ही अफसरों से मुलाकात कर ग्रामीणों की समस्या का निदान करतें हैं। उनके इसी व्यवहार ने उन्हें जिला पंचायत सदस्य चुनाव में जीत की हैट्रिक दिलाई वो भी बड़े अंतर से जीत हासिल की । इनकी दरियादिली भी ऐसी की जहाँ आज के जमाने मे लोग अपनी एक इंच जमीन के लिए अपनों के ही दुश्मन हो जाते हैं वहीं रविशंकर ने गांव में एक गौशाला निर्माण के लिए अपनी 5 एकड़ बेशकीमती जमीन गौशाला समिति को दान कर दी । रविशंकर एक नेता नही बल्कि विचारधारा है,गांव गरीबों की आवाज़ है,जन-जन की उम्मीद है यही वजह है कि हर चुनाव में जनता जाँत-पाँत से ऊपर उठकर उन्हें एकतरफा भारी मतों से जीत का सेहरा पहनाती है।

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