जेल में भेदभाव नहीं, सभी बंदियों को मिले समान अधिकार : उप जेल मनेन्द्रगढ़ का प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नेतृत्व में किया गया औचक निरीक्षण
Praveen Nishee Tue, Jun 30, 2026
मनेंद्रगढ़।एमसीबी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में सोमवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण योगेश पारिक के नेतृत्व में जिला स्तरीय निरीक्षण समिति ने उप जेल मनेन्द्रगढ़ का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं, विधिक सहायता तथा जेल की व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया गया।
निरीक्षण दल में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अमृता दिनेश मिश्रा, एडिशनल कलेक्टर मनेन्द्रगढ़ अनिल सिदार, एडिशनल एसपी पुष्पेन्द्र नायक सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। समिति ने जेल परिसर का भ्रमण कर बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान समिति ने यह सुनिश्चित किया कि सभी बंदियों को समय पर विधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा उनके साथ किसी भी प्रकार का जातिगत अथवा अन्य प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है। समिति ने जेल में उपलब्ध बिस्तर, शौचालय, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल, भोजन की गुणवत्ता तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी बारीकी से निरीक्षण किया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बंदियों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा जेल परिसर में संचालित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से प्रदान की जा रही विधिक सहायता की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बंदियों के अधिकारों की रक्षा, मानवीय गरिमा और न्याय तक उनकी सहज पहुंच सुनिश्चित की जाए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जिला स्तरीय विजिटर बोर्ड द्वारा प्रत्येक तिमाही उप जेल मनेन्द्रगढ़ का नियमित निरीक्षण किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बंदियों को सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों तथा उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
निरीक्षण के दौरान पैनल अधिवक्ता कल्याण केसरी एवं पैरालीगल वालंटियर भी उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के नियमित निरीक्षणों के माध्यम से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली की सतत निगरानी कर बंदियों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

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