Advertisment

10th October 2026

BREAKING NEWS

सेवा संकल्प अभियान नदी-घाट स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्ति का दिया संदेश, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने की सहभागिता

कभी तो अपने अंदर भी कमियां ढूंढिये साहब.... कब तक झाँकते रहोगे दूसरों के गिरेबान में....

चनवारीडांड स्कूल के बच्चों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा, विजेताओं को किया गया पुरस्कृत

टीबी के खिलाफ समय पर जांच, नियमित उपचार और पोषण ही जीत की कुंजी- श्याम बिहारी जायसवाल

हिंद मजदूर सभा के प्रतिनिधि अख्तर जावेद उस्मानी की लगातार पहल के बाद अक्टूबर से LPG फ्यूल अलाउंस की केंद्रीकृत दर लागू

छत्तीसगढ़ राज्य वन विभाग द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर : छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा बीरेन्द्र श्रीवास्तव की पुस्तक का विमोचन

Praveen Nishee Mon, Jun 8, 2026

मनेन्द्रगढ़। एमसीबी। छत्तीसगढ़ पर्यटन के चर्चित लेखक बीरेन्द्र श्रीवास्तव की नई पुस्तक "उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनुच्छेद पर्यटन स्थल एवं उनकी विविधता" का छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित विशेष समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं वन मंत्री केदार कश्यप तथा वन बल प्रमुख अरुण पांडे के हाथों विमोचित की गई। इस अवसर पर पूर्व मंत्री राम विचार नेताम, सहित वन विभाग के उच्च पदाधिकारी उपस्थित थे, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर ऊर्जा पार्क रायपुर के विशाल प्रांगण में छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पांच पुस्तकों वेटलैंड ऑफ छत्तीसगढ़, फ्लोरल डायवर्सिटी आफ बीजापुर फॉरेस्ट डिविजन, मेमल आफ छत्तीसगढ़, उत्तरी छत्तीसगढ़ के अंनूठे पर्यटन स्थल और उनकी जैव विविधता तथा द बैगा, पुस्तक का विमोचन किया गया। वनस्पति विज्ञान के विद्वान लेखक डॉ एम एल नायक, डॉ राजेंद्र मिश्रा एवं अरुण कुमार पांडे की दो प्रमुख पुस्तक वेटलैंड आप छत्तीसगढ़ एवं फ्लोरल डायवर्सिटी आफ बीजापुर फॉरेस्ट डिविजन, जैसी पुस्तक जहां छत्तीसगढ़ के मध्य एवं दक्षिणी छत्तीसगढ़ की जैव विविधता की बढ़ती चिताओं और समाधान के उपाय को एक विशेष दृष्टि प्रदान करती है वहीं बीरेन्द्र श्रीवास्तव की पुस्तक " उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता" के माध्यम से उत्तरी छत्तीसगढ़ के वनांचल पर्यटन और वन्य जीवन तथा वनों में फैली जैव विविधता का विशिष्ट मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक छत्तीसगढ़ वन्य जनजीवन के रहन-सहन तथा जंगलों से जुड़ाव की अभिव्यक्ति को नए संदर्भ में परिभाषित करती है जो आगामी पीढ़ी के शोध छात्रों को इतिहास, वन - पर्यटन एवं उत्तरी छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के साथ हमारे तालाब तथा झीलों के संरक्षण के उपायों पर विस्तृत दृष्टि प्रदान करता है। विश्व पर्यावरण दिवस के सम्मान समारोह मंच में पुस्तकों पर विद्वान अतिथियों ने अपने उद्बोधन के माध्यम से पुस्तकों की विशेष जानकारी संभ्रांत नागरिकों से साझा की।

विमोचित पुस्तक के संदर्भ में बातचीत करते हुए बीरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि पर्यटन एवं जैव विविधता पर केंद्रित इस पुस्तक में उत्तरी छत्तीसगढ़ के पूर्वी द्वार जशपुर के चाय बागान से लेकर अंबिकापुर, बलरामपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर एवं मनेन्द्रगढ़ के 29 करोड़ वर्ष पुराने समुद्री जीवाश्म, अमृतधारा जैव विविधता पार्क, तथा कोयले की यतुत संपदा अपने गर्भ में समेटे सिद्ध बाबा मंदिर के ऐतिहासिक जानकारी सहित अंचल के जाने अनजाने पर्यटन स्थलों की ऐसी जानकारी संग्रहित की गई है जो शोधार्थीयों को एक नई दृष्टि प्रदान करेगा। अपनी विशिष्ट शैली एवं गहन चिंतन से लिखी गई यह पुस्तक छत्तीसगढ़ में पर्यटन की नई संभावनाओं को आगे विकसित करने में जिला प्रशासन को भी सहयोग प्रदान करेगा उन्होंने जोर देकर कहा कि वन- पर्यटन का विशेष लाभ यह होता है कि पर्यटन के साथ-साथ पर्यटक वन्य जनजीवन फूलों पौधों और पेड़ों तथा वनस्पतियों की विविध प्रजातियों से परिचित होते हैं और उनके प्रति एक आत्मीय लगाव महसूस करते हैं जो वन्य जन- जीवन के संरक्षण की प्रेरणा प्रदान करता है। वन जीवन से जुड़ी पुस्तकें इस दिशा में सार्थक साबित होती रही है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान मनेन्द्रगढ़, के साहित्यकार अनिल कुमार जैन, पुष्कर तिवारी, राजकुमार पांडे, कल्याण केसरी, सतीश द्विवेदी, परमेश्वर सिंह, तथा सतीश उपाध्याय और अभिव्यक्ति साहित्य संस्थान बैकुंठपुर के रुद्र नारायण मिश्रा, योगेश गुप्ता, नरेश सोनी, एवं जिला साहित्य परिषद सूरजपुर के दीपेश दुबे एवं भी आर साहू, ने आंचलिक पर्यटन के लेखक वीरेंद्र श्रीवास्तव की इस विशिष्ट उपलब्धि पर अपनी शुभकामनाएं और बधाइयां प्रेषित की है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें