: अकाल,लखनी देवी (लक्ष्मी)मंदिर और पुष्पक विमान का आकार.
Admin Sat, Nov 2, 2024
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से करीब 25 किमी दूर रतनपुर गांव में देवी लक्ष्मी का प्राचीन मंदिर इकबीरा की पहाड़ी पर है। धन वैभव, सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी मां महालक्ष्मी का ये प्राचीन मंदिर करीब 845 साल से ज्यादा पुराना माना जाता है। ये मंदिर लखनी देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है।'लखनी देवी' शब्द लक्ष्मी का ही अपभ्रंश है, साधारण बोलचाल की भाषा में रूढ़ हो गया है यहां दीपावली में भव्य पूजा होती है,पंडितों के मुताबिक यह मंदिर 1179 में बना था। स्थापित प्रतिमा भी प्राचीन काल की मानी जाती है, रतनपुर में महालक्ष्मी का प्राचीन मंदिर है, इकबीड़ा पहाड़ी पर स्थित मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, दीपावली के अवसर पर इस मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होती है।लोग धन, वैभव, सुख और समृद्धि के लिये विशेष पूजा अर्चना करते हैं।कहा जाता है कि जब रतनपुर में राजा रत्न देव राजकाज था,किसी समय भीषण अकाल पड़ा था और प्रजा दाने-दाने की मोहताज हो गई थी,तब ही महालक्ष्मी देवी का मंदिर बनया गया था,मंदिर में धन धान्य, वैभव, समृद्धि, सुख और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की गई, तब राज्य में खुश हाली आई थी।रतनपुर प्राचीनकाल में छत्तीसगढ़ की राजधानी भी थी,यहां राजा रत्नदेव राज करते थे, पहले रतनपुर का नाम रत्नपुर था। कहा जाता है कि करीब 845 साल पहले रत्नपुर राज्य में अकाल की स्थिति पैदा हो गई थी और तब राजा को राज पुरोहित ने कहा कि धन-धान्य और ऐश्वर्य की देवी का मंदिर बनवाएं तो यह समस्या दूर हो जाएगी तब ही मंदिर का निर्माण कराकर यहां देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की गई।
लखनी देवी मंदिर के
नाम से विख्यात...
लक्ष्मी का मंदिर लखनी देवी मंदिर के नाम से क्षेत्र में मशहूर है,लखनी देवी शब्द साधारण बोल चाल की भाषा में बोली जाती है। 845 साल से ज्यादा पुराना मंदिर होने की वजह से ख्याति भी बहुत है।जिस पर्वत पर ये मंदिर है,इसके भी कई नाम है, इकबीरा पर्वत, वाराह पर्वत, श्री पर्वत, लक्ष्मीधाम पर्वत भी कहा जाता है,मंदिर कल्चुरी राजा रत्नदेव तृतीय के प्रधानमंत्री गंगाधर ने 1179 में बनवाया था। उस समय इस मंदिर में जिस देवी की प्रतिमा स्थापित की गई उन्हें इकबीरा,स्तंभिनी देवी भी कहा जाता था।
मंदिर का आकार
पुष्पक विमान जैसा....
मंदिर का आकार पुष्पक विमान जैसा है,प्राचीन मान्यता के मुताबिक राजा रत्न देव तृतीय के 1178 में राज्यारोहण करते ही प्रजा अकाल और महामारी से परेशान हो रही थी और राजकोष भी खाली हो चुका था. ऐसे हालात में राजा के विद्वान मंत्री पंडित गंगाधर ने लक्ष्मी देवी मंदिर बनवाया था,मंदिर के बनते ही अकाल और महामारी राज्य से खत्म हो गई, सुख, समृद्धि, खुशहाली फिर से लौट आई,मंदिर की आकृति शास्त्रों में बताए पुष्पक विमान की जैसी है और इसके अंदर श्रीयंत्र भी बना हुआ है।यही वजह है कि इस मंदिर में दीपावली के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है।
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