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दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल में खेल,अनुशासन और उत्साह का संगम : खेल जीवन की पाठशाला हैं, जहाँ हार-जीत से अधिक परिश्रम, धैर्य और अनुशासन का महत्व सिखाया जाता है- मनोज विष्णोई

Praveen Nishee Wed, Dec 17, 2025

मनेन्द्रगढ़। एमसीबी। उगते सूरज की स्वर्णिम किरणों के साथ दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, मनेन्द्रगढ़ का प्रांगण विद्यार्थियों के उत्साह, अनुशासन और आत्मविश्वास से जीवंत हो उठा। अवसर था विद्यालय के वार्षिक खेल महोत्सव का, जो खेल भावना और सर्वांगीण विकास का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया।

इस गरिमामय आयोजन के मुख्य अतिथि एसईसीएल के महाप्रबंधक मनोज विष्णोई रहे। उनके आगमन पर विद्यालय परिवार द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों में विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र सिंह, अध्यक्षा श्रीमती मीरा सिंह, निदेशक वेंकटेश सिंह, निदेशिका श्रीमती पूनम सिंह, एसडीएम मनेन्द्रगढ़ लिंगराज सिदार, एसडीएम खड़गवां विजेंद्र सारथी, विधि प्रकोष्ठ से श्रीमती नम्रता डोंगरे, श्रीमती श्रुति दुबे, श्रीमती सरिता दास, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ . अविनाश खरे, भूतपूर्व नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रभा पटेल, केंद्रीय विद्यालय झगराखांड के प्राचार्य बी. एस. श्रीवास्तव, स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सरोजबाला बिश्नोई तथा प्रिंट मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार सतीश गुप्ता, शराफत अली, विनय पांडे, राजा मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मशाल प्रज्ज्वलन, राष्ट्रीय ध्वज को सलामी एवं अनुशासित मार्च-पास्ट से हुआ। चारों सदनों के विद्यार्थियों ने एकरूप वेशभूषा में सुसंगठित कदमताल प्रस्तुत की, जिसे देख पूरा प्रांगण तालियों की गूंज से भर उठा। यह दृश्य विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और अनुशासन का जीवंत प्रमाण था।

खेल प्रतियोगिताओं की श्रृंखला में दौड़, रिले रेस, लंबी कूद, ऊँची कूद, कराटे, योग, ड्रिल सहित अनेक स्पर्धाएँ आयोजित की गईं। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मनोरंजक दौड़ों ने उपस्थित अभिभावकों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। विद्यार्थियों ने खेल को प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि उत्सव के रूप में अपनाया।

मुख्य अतिथि मनोज विष्णोई ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि “खेल जीवन की पाठशाला हैं, जहाँ हार-जीत से अधिक परिश्रम, धैर्य और अनुशासन का महत्व सिखाया जाता है।” उन्होंने विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

विद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा तभी पूर्ण होती है, जब उसमें शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास का संतुलित समावेश हो। खेल दिवस विद्यार्थियों में सहयोग, सहानुभूति, अनुशासन और सामूहिक प्रयास की भावना को सुदृढ़ करता है।

निदेशिका श्रीमती पूनम सिंह ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, सहयोग और सकारात्मक सोच का आधार होता है। खेल दिवस के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया जाता है कि परस्पर सहयोग से हर चुनौती को सरल बनाया जा सकता है और सफलता प्राप्त की जा सकती है।

समारोह के अंतिम चरण में विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार, पदक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। उल्लास, गर्व और आत्मविश्वास से दमकते चेहरों के साथ यह खेल महोत्सव सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया।

यह वार्षिक खेल समारोह न केवल प्रतिभा का उत्सव था, बल्कि अनुशासन, समर्पण और खेल भावना का प्रेरक संदेश भी देकर गया।

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