उदन्ती सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में : पांच दिनों से धधक रही आग!निगरानी तंत्र पर सवालों की बौछार: क्या फील्ड ट्रेकिंग ठप या विभागीय उदासीनता?
Praveen Nishee Thu, Mar 5, 2026
रोशनलाल अवस्थी की कलम se
गरियाबंद। ( रोशनलाल अवस्थी की कलम से) उदन्ती सीतानदी टाइगर रिजर्व के इंदागांव–ध्रुवागुड़ी (बफर) क्षेत्र में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर पिछले पांच दिनों से भीषण आग धधकने की सूचना ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार आग लगातार फैल रही है और रात के अंधेरे में इसकी लपटें दूर से साफ दिखाई दे रही हैं। क्षेत्र संवेदनशील बफर जोन में आता है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही और जैव विविधता की दृष्टि से विशेष महत्व है। ऐसे में आग की यह घटना केवल वन संपदा ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे तीखे प्रश्न?
वन विभाग द्वारा नियमित गश्त, फील्ड ट्रेकिंग और फायर अलर्ट सिस्टम की व्यवस्था का दावा किया जाता है। लेकिन पांच दिनों तक आग का सक्रिय रहना कई सवाल खड़े करता है—
क्या विभागीय निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है?
क्या दैनिक फील्ड ट्रेकिंग और पेट्रोलिंग नहीं हो रही?
क्या अग्नि प्रबंधन उपकरण और त्वरित प्रतिक्रिया दल समय पर सक्रिय नहीं हुए?
या फिर यह विभागीय लापरवाही और उदासीनता का परिणाम है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर काबू पा लिया जाता, तो नुकसान सीमित रह सकता था। उनका आरोप है कि सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखी।
”वन्यजीवों पर मंडराता खतरा”
बफर जोन में विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों का निवास है। आग की तीव्रता बढ़ने से उनके प्राकृतिक आवास, घोंसले और भोजन स्रोत नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। साथ ही आसपास के गांवों के लोगों में भी भय का माहौल है कि कहीं आग रिहायशी क्षेत्र की ओर न बढ़ जाए।
जवाबदेही की मांग :
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने उच्च अधिकारियों से तत्काल जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्यालय से महज तीन किलोमीटर दूरी पर पांच दिनों तक आग सुलगती रहे, तो यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का संकेत भी हो सकता है।
”त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता“
विशेषज्ञों का मानना है कि वन क्षेत्र में आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण के लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली, ड्रोन सर्विलांस, नियमित ग्राउंड पेट्रोलिंग और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है।
अब देखना होगा कि विभाग इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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