वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से ..... लगातार 20 वर्षों से : जिस समंदर को मेरे दर्द का एहसास नहीं..... मिलने आया भी तो कह दूंगा मुझे प्यास नहीं.....
Praveen Nishee Sat, Dec 13, 2025
वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पऱ मूल राष्ट्रीयगीत से ही कुछ पंक्तियाँ हटाने को लेकर पीएम मोदी ने फिर से पहले पीएम नेहरू को निशाना बनाया,वैसे आजकल बुजुर्ग नेताओं पऱ टीका- टिप्पणी का दौर कुछ सालों से तेज है। दिल्ली हवा में जहर, जिम्मेदार नेहरू..डॉलर 90 क्रॉस, जिम्मेदार नेहरू..बेरोजगारी उच्च स्तर पर,जिम्मेदार नेहरू.. कमरतोड़ महंगाई, जिम्मेदार नेहरू..विदेश नीति फेल,जिम्मेदार नेहरू..मीडिया बिक गया,जिम्मेदार नेहरू.. संविधान खत्म, जिम्मेदार नेहरू..वोट चोरी,जिम्मेदार नेहरू..भीख,कटोरा राशन, सिक्का सबके जिम्मेदार नेहरू..फिर क्या कोई यह बताएगा विश्वगुरु 11 साल से कुर्सी पर किसलिये बैठे हैं...? नेहरू कौन थे....? नेहरू एक ऐसा दूरदृष्टा, वैज्ञानिक और तकनीकी सोच के धनी व्यक्ति थे जिसने 1947 में सुई तक न बनाने वाले देश में विज्ञान, तकनीक से जुड़े कई संस्थानों को पैदा किया, बनाया,सींचा और उन्हें शीर्ष पर पहुंचाया, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र,परमाणु ऊर्जा विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की शुरुआत 1962 में, रक्षा अनुसंधान-विकास संगठन, वैज्ञानिक औद्योगिक अनुसंधान परिषद,तेल और प्राकृतिक गैस निगम,भारतीय तेल निगम। नेहरू ने सरकारी पैसे से 75 से अधिक संस्थान बनाए जो गुलाम भारत के अंदर रीढ़ पैदा किया, आधुनिक भारत की नींव रखा,जब शिक्षा संसाधन,वैज्ञानिक सोच और पैसे के लाले पड़े थे, दूर -दूर तक कोई आस-उम्मीद और सपोर्ट नहीं था,तब नेहरू ने ये सारे प्रगति के द्वार खोले, उसे नए सिरे से सृजन किया।उनके पास वक्त कम था,काम ज्यादा,उनके पास कोरी बक वास...भाषण के लिए वक्त नहीं था, उनके पास उनके कद,काठी से बड़ा था उनका विजन, वे चाहते तो गरीबी, गुलामी का रोना रो सकते थे, चाहते तो अंग्रेजों की गुलामी, गरीब देश की आड़ लेकर मुंह छुपा सकते थे..? लेकिन ऐसा नहीं किया,16 साल के कार्य काल में देश को महाशक्ति बना दिया। जलसेना, वायु सेना,थलसेना,रेलवे, सड़कों का जाल बिछा दिया, देश प्रगति की नई ऊंचाइयां छू रहा था, चिकित्सा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में नेहरू ने बड़ा काम किया, भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नेहरू स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान संस्थान,राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान जैसे संस्थानों को बनाना ही इसका प्रमाण है। उच्च शिक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में नेहरू ने जो काम किया,अंतर्राष्ट्रीय विजन से नेहरू ने विश्वस्तर के शिक्षण संस्थान बनाए।भारतीय प्रबंधन संस्थान, जेएनयू , राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान की नीव रखी।योजना आयोग जिसका नाम बदल कर नीतिआयोग कर दिया, जीवन बीमा निगम, भारत हेवीइलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान , भार तीय राष्ट्रीय पुस्तकालय,खादी और ग्रामोद्योग आयोग भी नेहरू की ही देन है, विकास, उपलब्धियों के साथ संगीत, नाटक, कला, फ़िल्म आदि में भी कई संस्थान नेहरूकाल में ही स्थापित किये गए, नेहरू ने कभी नहीं रोया , गुलाम, गरीब भारत में ये सब कैसे संभव होगा,नेहरू ने 16 साल के कार्यकाल में इतना कुछ एसेट्स बनाया जिसे 11 साल में भी बेच नहीं पाए...? जिन संस्थाओं का निजीकरण हो रहा है बेच रहे हो, उन संस्था ओं का सृजन,सरकारी एसे ट्स नेहरू ने बनाया था।जिस पीएम ने कमज़ोर,कंगाल और आज़ाद भारत की नींव दूर दर्शी तरीके से रखी,आज बजाय उनके प्रति कृतज्ञ होने के उन पर ही उंगलियां उठाई जा रही है..? झूठी,मनगढ़ंत कहानियों से उन्हें बदनाम किया जा रहा है, राजनीति की जा रही है।कृतघ्न संतानेँ अपनी थाती कभी सम्भाल कर नहीं रख सकतीं, देश जानता है कि कौन बनाने के लिए नहीं बल्कि नाम बदलने, एसेट्स बेचने, नेहरू का नाम मिटाने को प्रयासरत है,लेकिन इतिहास तो मिटाने से नहीं मिटेगा...?
छग में भी पुलिस
कमिश्नर प्रणाली
अभी नहीं.....?
शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है,स्थितियां बदल रही हैं,ऐसे में कानून व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं, पड़ोसी मप्र के भोपाल, इंदौर में कानून व्यवस्था की बेहतरी के लिए कमिश्नर सिस्टम लागू किया है,छग में इस प्रणाली को राजधानी रायपुर में लागू करने की घोषणा भी सीएम विष्णुदेव ने की थी, पहले राज्योत्स्व फिर 1 जनवरी से प्रणाली रायपुर में लागू होने की चर्चा थी, पर फिलहाल माहौल नहीं लग रहा है। सूत्रों का कहना है कि आईए एस लाबी इस प्रणाली को लागू करने के पक्ष में नहीं है?छ्ग के पहले सीएम,आईपीएस, आईएएस रहे अजीत जोगी ने भी इसके लिए पहल की थी, नए राज्य में तत्काल संभव नही हो सका था।कमिश्नर प्रणाली को आसान भाषा में समझें तो फि हाल पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं।आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम, कमिश्नर या शासन के दिए निर्देश पर ही काम करते हैं। पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर कलेक्टर,एक्जी क्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस अधिकारियों को मिल जाएंगे,इसमें होटल,बार के लाइसेंस,हथियार के लाइसेंस का अधिकार उन्हें मिल जाता है।इसके अलावा धरना, प्रदर्शन की अनुमति देना,दंगे के दौरान लाठीचार्ज या कितना बल प्रयोग हो ये निर्णय सीधे पुलिस ही करेगी, उनके अधिकार, ताकत बढ़ जाएगी, खुद फैसला लेने की हकदार हो जाएगी। माना जाता है कि कानून व्यवस्था के लिए कमिश्नर प्रणाली ज्यादा बेहतर है, ऐसे में पुलिस कमिश्नर कोई भी निर्णय खुद ले सकते हैं, पुलिसिंग व्यवस्था अधिकार जिलाधिकारी (डीएम) के पास होते हैं, कमिश्नरी प्रणाली लागू होने से बल बढ़ जाएगा,सबसे पहले कमिश्नर का मुख्यालय बनेगा,एडीजी/आईजी स्तर के अधिकारी कमिश्नर के पद पर तैनात होंगे,शहर जोन में बांटा जाएगा, जोन में डीसीपी की भी तैनाती की जाएगी, प्रणाली लागू होने पर पुलिस आयुक्त या कमिश्नर-सीपी संयुक्त आयुक्त या ज्वॉइंट कमिश्नर–जेसीपी,डिप्टी कमिश्नर-डीसीपी, सहायक आयुक्त एसीपी। आजादी से पहले के दौर में कमिश्नर प्रणाली लागू थी,आजादी के बाद पुलिस ने अपनाया, कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर का सर्वोच्च पद होता,अंग्रेजों के जमाने में ये कोलकाता, मुंबई,चेन्नई में हुआ करता था।इसमें ज्यूडिशियल पावर कमिश्नर के पास होता है,पुलिस प्रणाली अधिनियम 1861 पर आधारित है। यह बताना जरुरी है, रायपुर की आबादी 15 लाख पार कर गई है (2011 की जन गणना में 10 लाख की आबा दी हो चुकी थी) 215 वर्ग किमी क्षेत्रफल है।कानून व्यवस्था के संचालन में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होनी ही चाहिये।
मंत्रालय में बायोमेट्रिक अटेंडेंस
शुरू करना स्वागतेय....
छ्ग के 25 साल होने के बाद विष्णुदेव सरकार के निर्णय के बाद मंत्रालय, सचिवालय में ड्यूटी पर लेट लतीफी आने और ऑफिस से जल्दी,जाने वाले अफसरों, कर्मचारियों पर अब अंकुश लग गया है।सुबह से सरकारी अधिकारी- कर्मचारी लाईन लगा ऑफिस पहुंच रहे हैं।संचालनालय में 01जनवरी से बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य होगा। 01 दिसंबर से मंत्रालय में बायो मेट्रिक अटेंडेंस शुरू हो गई।बता दें कि आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का ट्रायलरन 20 नवंबर से जा रहा था। 01 दिसंबर 20 25 से आधार सक्षम बायो मेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से ही अवर सचिव, वरिष्ठ समस्त अधिकारियों का कार्यालय में उपस्थित होने, कार्यालय पश्चात वापसी के समय उपस्थिति दर्ज करना शुरू हो गया है।सामान्य प्रशा सन विभाग ने सभी निर्धारित प्रवेश द्वारों पर आधार- सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित कर दिए हैं,नई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई या अनुपालन न करने को गंभीरता से लिया जा रहा है।नए प्रोटोकॉल में सभी कर्मचारी को रोज़ाना दो बार प्रवेश के समय इन और प्रस्थान के समय आउट उप स्थिति दर्ज करनी पड़ रही है। इसके लिए दो विकल्प उप लब्ध किए गए हैं,मोबाइल ऐप के माध्यम से फेसियल ऑथेंटिकेशन।कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर आधार- आधारित फेसियल वेरिफिकेशन के माध्यम से इन-आउट उप स्थिति दर्ज करा रहे हैं।इसके अलावा मंत्रालय भवनों के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर दीवार पर लगे थम्ब-बेस्ड आधार- सक्षम बायो मेट्रिकडिवाइसेज़ स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से कर्मचारी उप स्थिति दर्ज करा रहे हैं। दोनों प्रणालियां समानांतर रूप से संचालित होंगी,कर्मचारी अपनी सुविधानुसार किसी भी विकल्प का उपयोग कर रहे हैं।
महादेव सट्टा: 3 हजार संदिग्धों में
कुछ पत्रकार भी.....!
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप नेटवर्क पर अब पुलिस का शिकंजा लगातार कस रहा है। दुर्ग पुलिस ने 3 हजार संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की है। इनकी मोबाइल गतिविधियों, बैंकिंग लेनदेन,डिजिटलवालेट की गहन निगरानी की जा रही है,क्योंकि जांच में सट्टा कारो बार में संलिप्तता का संदेह सामने आया है।इस हाई- प्रोफाइल सूची में स्थानीय नेताओं,सरकारी अफसरों, कर्मचारियों के साथ कुछ पत्रकारों के नाम भी शामिल हैं। इस मामले में अब तक 70 एफआईआर दर्ज की गई हैं,300 से अधिक गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की जांच सीबीआई और ईडी भी कर रही है।दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल के अनुसार अपराध में शामिल किसी व्यक्ति को राजनीतिक, सामाजिक या प्रशासनिक प्रभाव के आधार पर राहत नहीं मिलेगी।आने वाले दिनों में कई गिरफ्तारी, संपति जब्ती,आर्थिक अप राध की कार्रवाई की जाएगी।
और अब बस.....
0 रक्षा मंत्री ने कहा -बाबर को महाराणा प्रताप ने हराया, हम भी प्रताप की तरह पाक को हराएँगे, अरे भाई, बाबर की मौत सन 1530 में होने के 10 साल बाद महाराणा प्रताप का जन्म 1540 में हुआ था।इतना सा भी ज्ञान देश के रक्षा मंत्री राजनाथ को नहीं है। खैर उम्र का तक़ाज़ा है....?
0 मुख्य सचिव विकास शील की विकास सम्बंधित बैठक में तेवर देखकर अफसरों के पसीने छूट गए..?
0छ्ग में करीब 500 करोड़ के डीऍमएफ घोटाले की जाँच सी बीआई करेगी।
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