वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से *कॉलम 21सालों से हर सप्ताह लगातार : तुम्हारी और मेरी रात में बस फर्क है इतना.... तुम्हारी 'सो' के गुजरी है हमारी 'रो' के गुजरी है....
Praveen Nishee Fri, May 29, 2026
2014 में सत्ता हासिल करने के बाद मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कई ऐसे वादे पूरे किए, जिन्हें भाजपा ने चुनावी वादों के तौर पर जनता के सामने रखा था। बीते 12 सालों में इन मुद्दों पर लिए गए फैसले न सिर्फ संसद, अदालतों तक पहुंचे, बल्कि देश की राजनीति और सामाजिक बहस का मुद्दा भी बन गए। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण से लेकर अनुच्छेद 370 हटाने, तीन तलाक पर कानून, महिला आरक्षण और कॉल सीएए कानून जैसे कदमों को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों के रूप में गिनाती रही है।ये बात अलग है कि इन फैसलों पर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है,मगर इतना तो तय है कि इन मुद्दों से देश की राजनीतिक दिशा और नीतिगत एजेंडे को नई दिशा मिली है। भाजपा केंद्र सहित कई राज्यों में सत्ता में आई है और कई वादों पर बीते सालों में काम किए। 12 सालों में देश पऱ बढ़ता कर्ज, बेरोजगारी,बे-लगाम महगाई, विदेश नीति, संवैधानिक संस्थाओं पऱ दबाव, आदि को लेकर विपक्ष हमलावर है।देश में कर्ज़ लेना कोई नई बात नहींहै।सरकार कर्ज़ लेती है,सड़कें बनाने के लिए, योजनाएँ चलाने , युद्ध या संकट से निपटने के लिए....!लेकिन सवाल तब उठता है जब कर्ज़ की रफ्तार विकास से तेज़ हो जाए… और जनता की ज़िंदगी फिर भी आसान न बने?सन 1991–1996 पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने लगभग ₹4 लाख करोड़ कर्ज़, सन 1998 –2004 अटल बिहारी वाजपेयी सरकार, लगभग ₹22 लाख करोड़ कर्ज़, सन 2004–2014 मनमोहन सिंह सरकार लगभग 55 लाख करोड़ कर्ज़,सन 2014- 2026 तक नरेंद्र मोदी सरकार,लगभग ₹ 205 लाख करोड़+ कर्ज़....?अब सवाल पूछना तो बनता है…अगर इतना भारी कर्ज़ लिया गया तो बेरोज़गारी क्यों रिकॉर्ड स्तर पर है? महंगाई से आम आदमी क्यों पिस रहा है?किसान कर्ज़ में क्यों डूबा है? छोटे छोटे व्यापारी टैक्स, जीएसटी के बोझ तले क्यों दबे हैं? युवा डिग्री लेकर भी नौकरी के लिए भटक क्यों रहा है? कर्ज़ तब तक ठीक है जब तक उससे देश की उत्पादन क्षमता बढ़े,रोजगार बने, शिक्षा और स्वास्थ्य मज बूत हों। कर्ज़ सिर्फ इवेंट प्रचार,चुनावी योजनाओं और कॉर्पोरेट फायदे तक सीमित रह जाए…उसकी कीमत आने तो वाली पीढ़ियाँ को भी चुकानी पड़ेंगी....।आज पैदा होने वाला बच्चा लाखों के राष्ट्रीय कर्ज़ का हिस्सेदार बन चुका है। बड़ा सवाल तो यहीं उठ रहा है इतना कर्ज़ लेने के बाद भी अगर सरकार हर चीज़ बेचने पर उतर आए, एयरपोर्ट, रेलवे, बंदरगाह, सरकारी कंपनियाँ....तो फिर ये पैसा गया कहाँ...? देश भक्ति का मतलब सवाल पूछना बंद करना नहीं होता।लोकतंत्र में जनता टैक्स भी देती है हिसाब भी मांगती है...!
नहीं रहे मशहूर शायर
बशीर बद्र.....
उर्दू अदब, आधुनिक ग़ज़ल के दिग्गज शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 वर्ष की उम्र में भोपाल (मप्र) में इंतकाल हो गया,वे लंबे समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से जूझ रहे थे और उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ रही थी,उर्दू शायरी को आसान और बोलचाल की भाषा में नई पहचान देने वाले बशीर बद्र का निधन साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है,उनकी रचनाओं और गजलों में मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी के रोजमर्रा के अनुभवों की गहरी छाप है।उनके कुछ बेहद मशहूर शेर आज लोगों की जुबान पर रहते हैं....
"उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।"
"कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो।"
"दुश्मनी करो तो जमकर करो,
पऱ यह गुंजाईश रहे...
गर दोस्ती हो जाए
तो शर्मिंदगी न हो..."
बशीर बद्र को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक सेवा के लिए पद्मश्री,साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। बशीर साहब को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि...
पहाड़ी मैना की हो रही
है वंशवृद्धि.......
बस्तर के कांगेर घाटी की वादियों से सुखद खबर सामने आई है। इंसानी आवाज की हूबहू नकल करने में माहिर छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना अब विलुप्ति के खतरे से बाहर निकल कर अपनी आबादी बढ़ा रही है। पिछले 3 वर्षों से जारी सघन संरक्षण प्रयासों का ही परिणाम है कि आज जंगलों में इनकी संख्या 600 के पार पहुंच गई है, इस वर्ष बढ़कर 1200 सेअधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है।पहाड़ी मैना के संरक्षण में सबसे बड़ी भूमिका 2022 में शुरू मैना मित्र अभियान की रही है। उद्यान प्रबंधन ने कांगेर घाटी की सीमा से लगे करीब 40 गांवों के स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर संरक्षण कार्य की मुख्यधारा से जोड़ा। ये युवा न केवल पक्षियों की निगरानी कर रहे हैं, बल्कि शिकार, अवैध व्यापार को रोकने के लिए ग्रामीणों के बीच जागरूकता भी फैला रहे हैं। पहाड़ी मैना के संरक्षण को ईको-टूरिज्म से भी जोड़ दिया गया है। पर्यटक अब बस्तर की खूबसूरती के साथ- साथ बर्ड वाचिंग (पक्षी दर्शन) का आनंद भी ले रहे हैं, पहाड़ी मैना की एक विशेषता यह है कि अपना घर खुद बनाने के बजाय कठफोड़वा पक्षी द्वारा साल के सूखे पेड़ों में बनाए गए घोंसलों का उपयोग करती है।इसकी गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने कांगेर घाटी क्षेत्र में सूखे पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रति बंध लगा दिया है।पिछले सर्वेक्षण में करीब 250 सक्रिय घोंसलों में मैना की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
30 हजार साल प्राचीन
गुफाएं औऱ खजाना.....
रायगढ़ के भूपदेवपुर क्षेत्र में स्थित सिंघनपुर गुफा शैल चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इस गुफा के शैल चित्रों के सरंक्षण व शोध के लिए रायपुर से रविशंकर विवि के पुरातत्व विभाग की रिसर्च टीम सिंघनपुर पहुंची थी। टीम के सदस्य गुफा में प्रवेश कर प्राचीन शैलचित्रों का निरीक्षण कर रहे थे इसी दौरान अचा नक मधुमक्खियों के झुंड ने उन पर हमला किया इसके बाद फिर यह गुफा चर्चा में है। उल्लेखनीय है कि गुफा में जहरीली, आक्रामक मधु मक्खियों का डेरा वर्षों से बना हुआ है।सिंघनपुर गुफा रायगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 18 किमी दूर स्थित है। सिंघनपुर गुफा अपने प्राचीन शैलचित्रों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 30 हजार वर्ष पुरानी प्रागैतिहासिक गुफाओं की खोज सन 1910 में एंडरसन द्वारा की गई थी। पुरापाषाण काल का सबसे प्रमुख, छत्तीसगढ़ का पहला खोजा गया शैलचित्र स्थल माना जाता है। शैल चित्रों में शिकार करते हुए मनुष्य, घोड़े की पूंछ पकड़े मानव, पशु-पक्षियों की आकृतियां, मानव आकृतियों के समूह शामिल हैं। सिंघनपुर की पहाड़ियों में कुल 11 गुफाएँ हैं, जिनमें से मुख्य गुफा बहुत दुर्गम रहस्यमयी है।सिंघनपुर गुफा कई रहस्यों कैद किया हुआ है।मौजूद11 गुफाओ में गड़ा धन होने की बात आसपास के गांव में चर्चा है। कई बार यहां इसी धन के लालच में लोग जाते हैजिसके चलते मधुमक्खियों ने हमला कर दिया है।पूर्व में भी रायगढ़ रियासत के राजा लोकेश बहादुर सिंह पर भी सिंघनपुर में मधुमक्खियों के हमला किया था जिनसे उनका निधन हो गया था। वर्त मान में ग्रामीण उक्त क्षेत्र में जाने से मधुमक्खी तथा अन्य खतरों से डरते है।
छ्ग सत्ता औऱ संगठन,
अब बदलाव के दौर में....
केंद्र तथा छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल भाजपा में एक चर्चा जमकर है कि पुरानी पीढ़ी के नेताओं को किनारे कर नये लोगों को महत्त्व दिया जा रहा है। साय सरकार में एक दो को छोड़कर सभी नये लोगों को मंत्री बनाया गया है। वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को लोकसभा भेजकर राज्य की राजनीति से दूर करने का प्रयास किया गया है, वरिष्ठ नेता डॉ रमनसिंह को विस अध्यक्ष बना कर सक्रिय राजनीति से दूर करने का प्रयास हुआ तो वरिष्ठ नेता अमर अग्रवाल, अजय चंद्रा कर, पुन्नूलाल मोहिले, धर्म लाल कौशिक, रेणुका सिंह, लता उसेंडी आदि को मंत्री नहीं बनाया गया वहीं पहली बार के विधायक विजय शर्मा, अरुण साव को डिप्टी सीएम, ओपी चौधरी आदि को मंत्री बनाया गया है, वहीं हाल ही में भाजपा की कोर कमेटी से भी कई वरिष्ठ नेताओं की छुट्टी कर दी गई है क्या यह इस बात का संकेत नहीं है कि छ्ग की भाजपा औऱ सर कार अब बदलाव के दौर में है...?वैसे चर्चा है कि जून के पहले सप्ताह नितिन नवीन की टीम बन जायगी उसके बाद मोदी तथा छ्ग के साय मंत्रिमंडल में फेरबदल संभव है। नितिन नवीन की टीम में छ्ग के एक डिप्टी सीएम विजय शर्मा आदि को शामिल करने की जमकर चर्चा है, वहीं मोदी मंत्रिमंडल से भी कुछ लोग शामिल हो सकते हैँ..?
औऱ अब बस.....
0छग में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा- रामभद्राचार्य भाजपा के प्रचारक...,उन्हें जगतगुरु नहीं मानता..?
01994 बैच के आई एफएस अरुण पांडे पीसीसीएफ बने।
0केंद्र सरकार ने छ्ग कैडर के दो वरिष्ठ आईपीएस {2008 बैच) नीतू कमल, डी.श्रवण को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी पद के लिए इंपैनल किया है।
0छ्ग के कुछ आईजी,करीब एक दर्जन एसएसपी, एसपी के जल्दी बदलने की चर्चा है।
विज्ञापन