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: रुक गई है नदी,बदल रही है रास्ता..... शायद सागर ने उसे, तलाक दे दिया है....

Admin Fri, Nov 1, 2024

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने तलाक के मामले में पति -पत्नी के रिश्तों पर धार्मिक ग्रंथों रामायण, महाभारत में वर्णित मान्यताओं का हवाला एक फैसले में दिया है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक की मंजूरी दी, परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। न्यायालय के इस फैसले को पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, मप्र के डिंडोरी जिले के करंजिया निवासी नेहा, मसीही धर्म का पालन करती हैं, उसने 7 फरवरी 2016 को बिलासपुर निवासी विकास चंद्रा से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। विवाह के कुछ माह बाद नेहा ने हिंदू धार्मिक मान्यताओं, देवी- देवताओं का उपहास करना शुरू कर दिया। दिल्ली में नौकरी कर रहे विकास के साथ कुछ समय बिताने के बाद नेहा वापस बिलासपुर लौट आई, फिर क्रिश्चियन धर्म अपनाते हुए चर्च जाना शुरू कर दिया। पत्नी के व्यवहार से परेशान विकास ने परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी दी।सुनवाई के बाद,परिवार न्यायालय ने विकास के पक्ष में फैसला सुनाते तलाक की डिक्री जारी की। पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस रजनी दुबे,जस्टिस संजय जायसवाल के डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई,सुनवाई के दौरान पाया गया कि नेहा ने खुद स्वीकार किया है कि बीते10 वर्षों में वह किसी भी हिंदू धार्मिक अनुष्ठान में शामिल नहीं हुई हैं, पूजा- अर्चना के बजाय उन्होंने चर्च जाना शुरू कर दिया है।विकास ने कोर्ट को बताया कि उनकी पत्नी ने बार-बार धार्मिक भावनाओं को आहत किया, देवी- देवताओं का अपमान किया, मामले की सुनवाई के बाद, हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि इसमें किसी भी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और नेहा की अपील को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पत्नी ने खुद स्वीकार किया है कि पिछले 10 वर्षों से उसने किसी भी तरह की पूजा नहीं की है, इसके बजाय वह अपनी प्रार्थना के लिए चर्च जाती है।यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह दो अलग- अलग धर्मों के व्यक्तियों के बीच विवाह का मामला नहीं है,धार्मिक प्रथाओं की पारस्परिक समझ की अपेक्षा की जाती है। यहां, पति ने बताया कि पत्नी ने बार- बार उसकी धार्मिक मान्यताओं को अपमानित किया, देवताओं का अपमान किया उसे अपमानित किया।कोर्ट के विचार में, पत्नी से ऐसा व्यवहार जिसे ‘सहधर्मिणी’ होने की उम्मीद है- एक धर्म निष्ठ हिंदू पति के प्रति मानसिक क्रूरता के बराबर है।महाभारत-रामायण में ही नहीं बल्कि मनु स्मृति में भी कहा गया है कि पत्नी के बिना कोई भी यज्ञ अधूरा है। धार्मिक कर्म में पत्नी -पति के साथ बराबर की भागीदार होती है। पति अपने परिवार का इकलौता बेटा है,परिवार के सदस्यों के लिये धार्मिक अनुष्ठान करना होता है।विद्वान ट्रायल कोर्ट ने दोनों पक्षों के मौखिक, दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर प्रतिवादी के पक्ष में सही फैसला किया है। ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज किया गया निष्कर्ष न्याय संगत, उचित और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार है, इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट नेअपील को सारहीन बता खारिज कर दिया। छत्तीसगढ़ का आंख फोड़वा कांड.. (2) छ्ग में दूसरा आँख फोड़वा कांड हो गया है, दोनों में समानता यह है कि 2024 के मौजूदा कार्यकाल में भाजपा की सरकार है तो 2011 के आंख फोड़वा कांड के समय भी छ्ग में भाजपा की सरकार थी, आदिवासी तथा नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान भारी लापरवाही बरती गई है। बीते 22 अक्टूबर को अस्प ताल में मोतियाबिंद ऑपरे शन का कैंप लगाया गया था।जिस ऑपरेशन थिएटर में ऑपरेशन किया गया वह कमरा कई दिनों से बंद था।यहां तक कि उसेसैनीटाइज भी नहीं किया गया था।आरोप है कि ऑपरेशन थियेटर में फंगस वाला वायरस फैलने से मोतियाबिंद ऑपरेशन किये जाने के बाद कई मरीजों की आंखों में संक्रमण फैल गया,इससे करीब 10 मरीजों को तो दिखना भी बंद हो गया।इसके पहले भी छ्ग में 2011 में भी आंख फोड़वा कांड (1) हो चुका है।22 सितंबर 2011 यही वह मनहूस तारीख थी, जिस रोज सूबे में करीब 65लोगों ने अपनी आँखों की रोशनी को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया। दो सरकारी शिविरों में मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान लापरवाही की वजह से 5 दर्जन लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी।बालोद में 48, बागबाहरा में 12,राजनांदगांव-कवर्धा में 4-5 लोग इसके शिकार हुए। इस मामले में दुर्ग सीएमओ समेत बालोद बीएमओ, तीन नेत्र सर्जन सस्पेंड हुए थे।इस लापरवाही को आंख फोड़वा कांड के नाम से जाना जाता है। हथियों की कब्र पर पहुंचा बड़ा झुण्ड..... जानवरों में भी अपनी संवेदनाएं हैं ,उनकी भी एक अलग दुनिया है,जो मानव से दूर जंगलों में बसती है। वे भी अपने साथियों की मौत पर मातम और दुख व्यक्त करते हैं। पहली बार छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जंगल में विहंगम नजारा देखने को मिला,हाथियों का झुंड अपने 3 साथियों की मौत के बाद उस स्थान पर पहुंचा,जहां उन्हें कब्र में दफनाया गया था।अचानक हाथियों को झुंड क्रब के पास जुट गया,इससे आस पास ग्रामीणों में हड़कंप मचा गया और लोगों ने जब देखा कि हाथी के क्रबों के पास सारे हाथी जुटे और पेड़ के पत्ते उस कब्र पर समर्पित कर आंसुओं और रोकर श्रद्धांजलि देने लगे, इस दौरान उनके रोने और उनकी हरकतों को किसी ने मोबाईल में भी कैद कर लिया है। बीते 26 अक्टूबर को रायगढ़ जिले में करंट की चपेट में आने से एक ही परिवार के 3 हाथियों की मौत हो गई थी, मामले में हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर डीएफओ को तलब किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी। वहीं रायगढ़ वन मंडल के डीएफओ ने मामले में कार्र वाई करते हुए एक बीटगार्ड को सस्पेंड कर दिया है, डिप्टी रेंजर के निलंबन के लिए सीसीएफ बिलासपुर को भेजे गए अनुशंसा पत्र के बाद सस्पेंड किया गया है इधर बिजली विभाग के जेई को नोटिस भेजा गया है। बस्तर चाँवल की एक किस्म से कैंसर का इलाज....! रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विवि के जेनेटिक एंड प्लांट ब्रीडिंग विभाग ने बस्तर की विलुप्त होती चावल की एक किस्म पर रिसर्च कर ये पाया है कि इस चावल के सेवन से कैंसर की कोशिकाओं को ख़त्म किया जा सकता है इस चावल को संजीवनी नाम दिया गया है।संजीवनी चावल को पौधा किस्म संरक्षण,कृषक अधिकार प्राधिकरण से पेटेंट मिल चुका है।कृषि विवि अब इस चावल को पीएम मोदी के हाथों दुनिया के सामने लांच करने की तैयारी में है।छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, छग में विश्व में सबसे अधिक धान की किस्म है,यहां की संस्कृति में धान का अपना महत्व है। तीज-त्यौहार में धान की पूजा से लेकर घर की साज -सज्जा के काम आता है, लेकिन अब बहुत जल्द ही बस्तर के सुकमा की विलुप्त हो रही धान की प्रजाति से कैंसर के मरीजों का इलाज होगा,असल में रायपुर के इंदिरा गांधी विवि के प्रो. दीपक शर्मा,रिसर्च स्कॉलर सलाखा जॉन ने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के रेडिएशन बायोलॉजी एंड हेल्थ साइंस विभाग के साथ मिल कर साल 2016 से धान की एक किस्म की मेडिसिनल प्रॉपर्टी पर शोध शुरू किया है।डॉ शर्मा के अनुसार संजीवनी धान में इम्मुनो बूस्टर के साथ कैंसर सेल को ख़त्म करने के गुण पाए गए हैं।खासकर ब्रैस्ट कैंसर के लिए ज्यादा कार गर है।बीते एक साल से वे खुद इस चावल का सेवन कर रहे हैं तब से वे बीमार नहीं हुए हैं।संजीवनी चावल का भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में चूहों पर परीक्षण किया गया, चमत्कारिक परिणाम देखने को मिले, इतना ही नहीं सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टिट्यूट ने भी कैंसर से लड़ने के गुण संजीवनी चावल में पाए हैं।डॉ शर्मा के अनुसार संजीवनी चावल का मेडिसिनल ह्यूमन ट्रायल जनवरी से टाटा मेमोरियल कैंसरहॉस्पि टल में शुरू करने कीतैयारी है।संजीवनी चावल में 213 तरह के बायोकैमिकल पाए गए हैं, जिसमें 7 तरह के केमिकल कैंसर रोधी माने जाते हैं।

और अब बस.....

0 छ्ग में रायपुर दक्षिण के चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल संभव है...? 0 जल्दी ही कुछ आईजी, एसपी की नई पदस्थापना होगी।

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