: कश्तियाँ खूटों में बांध दो अपनी..... ये साहिल ऐतबार के काबिल नहीं रहा....
Admin Fri, Dec 20, 2024
'एक देश एक चुनाव' लोक सभा में पारित हो गया है, राज्यसभा तथा जेपीसी में भी प्रस्ताव जाएगा। इसके पीछे कई तर्क हैं,आईडी एफसी नामक इंस्टिट्यूट ने 2015 में एक रिपोर्ट दी थी यदि एक साथ लोस- विस चुनाव होते हैं तो 77%लोग एक ही पार्टी को वोट देते है, दोनों चुनावों में अंतर 6 माह या अधिक होता है तो यह अंतर 61% तक गिर जाता है।भाजपा का मानना है कि 2019 से 2023तक लोस सहित 40 विधानसभा चुनाव हुए हैँ, भाजपा को वह लाभ नहीं मिल पाया जो एक साथ चुनाव कराने से मिलता..? पर उन्हें यह भी सोचना चाहिये कि 20 14 में लोस के साथ ही ओड़िशा के विस चुनाव भी हुए थे ओड़िशा में बीजू जनता दल को भाजपा से साढ़े 7% अधिक वोट मिले थे? पर हाल ही में लोस के साथ ओड़िशा विस चुनाव में भाजपा जरूर जीत गई, हाल ही में महाराष्ट्र विस चुनाव में भाजपानीत की सरकार बनी पर एक मात्र लोस उपचुनाव में कांग्रेस का प्रत्याशी विजयी रहा था।खैर लोकतंत्र के लिए 'वन नेशन,वन इलेक्शन' बहुत सराहनीय कदम होगा पीएम मोदी ने कुछ साल पहले इच्छा जाहिर की थी कि ग्राम पंचायत से लेकर, विधानसभा,लोस चुनाव एक साथ हों। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्ष ता में कमेटी गठन हुआ था, इस पर कमीशन भी बन सकता था, कमीशन बनता तो पूर्व राष्ट्रपति शामिल नहीं हो सकते थे। इस कमेटी ने रिपोर्ट दे दी है।अभी बहुत सारी चीजें तय होनी है।चुनाव आयोग की भी इसमें बड़ी भूमिका रहेगी। ऐसे में अभी कुछ तुरंत नहीं होने जा रहा है।एक साथ चुनाव कराने के लिए संविधान में कम से कम 5 संशोधन करने होंगे संसद के सदनों की अवधि से संबंधित अनुच्छेद 83, राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग करने से संबंधित अनुच्छेद 85,राज्य विधान मंडलों की अवधि से संबंधित अनुच्छेद 172, राज्य विधानमंडलों के विघटन से संबंधित अनुच्छेद 174, राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने से संबंधित अनुच्छेद 356शामिल हैं। साथ ही संविधान की संघीय विशेषता को ध्यान में रखते हुए सभी दलों की सहमति जरूरी होगी। वहीं यह अनिवार्य है कि सभी राज्य सरकारों की सहमति प्राप्त की जाए।इसमें 14 राज्यों की मंज़ूरी की ज़रूरत होगी ये मुश्किल नहीं है,भाजपा या उसके सह योगी दलों की इतने राज्यों में सरकारें हैं।2/3 राज्य तो आने को भी तैयार हैं,आंध्र, ओडिशा के लिए तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वहां लोस के साथ ही विस के भी चुनाव होते हैं। सबसे बड़ी समस्या राज्यसभा में हो सकती है। कांग्रेस सहित विपक्ष इसका समर्थन नहीं कर रही है तो राज्यसभा में इसको पास कराना कुछ मुश्किल होगा। कांग्रेस के लिए भी इस विधेयक को गिराकर चुनाव में जाना मुश्किल होगा।इतनी शर्तें सरकार पूरी भी कर ली जाती है तो एक सवाल फिर भी रहेगा कि क्या सभी राज्यों की विधानसभाओं को भंग किया जाएगा..? वैसे "पहले भी इस बारे में दो प्रस्ताव थे..(1) इसे दो चरण में किया जाए, लोक सभा चुनाव से कुछ महीने पहले,बाद के विधानसभा चुनावों को जोड़ दिया जाए (2)भाजपा और उसके सह योगी दलों की सरकारें विधानसभा खुद भंगकर दें, बाकी राज्यों की सरकारें भंग कर दी जाएं लेकिन इसमें क़ानूनी उलझाव है।किसी राज्य- सरकार के गिरने पर क्या होगा? वन नेशन-वन इलेक्शन विधेयक में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि अगर किसी राज्य की सरकार अविश्वास प्रस्ताव या अन्य कारणों से गिरती है,उस स्थिति में मध्यावधि चुनाव कराए जाएंगे,नई विधान सभा का कार्यकाल उस समय तक सीमित होगा जब तक अगले आम चुनाव न हो जाएं,इसका अर्थ यह है कि मध्यावधि चुनाव से चुनी गई नई सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं करेगी, बल्कि शेष अवधि के लिए सत्ता में रहेगी।
नक्सलगढ़ पहुंचने वाले
पहले गृहमंत्री शाह...
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिनों के छत्तीसगढ़ दौरे पर रहे, रायपुर उसके बाद बस्तर बीजापुर में दौरा किया सुकमा- बीजापुर की सीमा पर घोर नक्सल प्रभावित गुंडम इलाके का अमित शाह ने दौरा किया, इलाका माओ वादियों का गढ़ माना जाता था, पहली बार कैंप खुला, उसके बाद से इस इलाके की तस्वीर बदल गई,महुआ पेड़ के नीचे गृहमंत्री ने चौपाल लगाई, लोगों से बात की,अमित शाह ने गुंडम फोर्स कैंप का जाय जालिया जवानों के कैंप से चौपाल तक एक किमी सड़क मार्ग से चौपाल पहुंचे, नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों से मुलाकात की,उसके बाद महुआ पेड़ के नीचे चारपाई पर जन चौपाल भी लगाई।स्कूली बच्चों, ग्रामीणों से संवाद किया।अमित शाह, हिड़मा के गांव से 7 किमी पहले पड़ने वाले गांव गुंडम पहुंचे, बीजापुर- सुकमा के बॉर्डर पर स्थित है, नक्सलियों के जनताना सरकार का इलाका था, शाह ने गांव वालों से कई वादे भी किये। गुंडम गांव में चर्चा में अमित शाह ने कहा कि यहां पहले माओवादी रहते थे, इसी लिए विकास नहीं हो रहा था,अब वो इलाके को छोड़ कर भाग गए हैं और मार्च 2026 तक हम उनको पूरी तरह खत्म कर देंगे इसी लिए अब किसी को डरने की जरूरत नहीं है,जवानों का कैम्प स्थापित हो चुका है, आप लोगों को अब स्वास्थ्य और शिक्षा की कोई कमी नहीं होगी, जवान आपकी पूरी मदद करेंगे।
डबल इंजन की सरकार,
हाईकोर्ट की खंडपीठ..?
देश और छ्ग में भाजपा की सरकार है,छ्ग के पूर्व मंत्री, अब सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छग उच्च न्यायालय के खंडपीठ की स्थापना से संबंधित प्रश्नोत्तर की जान कारी मिली।खंडपीठ को लेकर उनकी रूचि, प्रयास सराहनीय है।इस संबंध मे कुछ तथ्य इस तरह हैं।छग विस सचिवालय के पत्र 2 जनवरी 16 को तब विधि मंत्री को लिखे पत्र अनुसार सदन का यह मत है कि छ्ग के सरगुजा, बस्तर, रायपुर जिला मुख्यालयोँ में उच्च न्यायालय की खंडपीठ की स्थापना की जाए।उक्त विषयक अशासकीय संकल्प विधानसभा मे 23 दिसंबर 2015 को सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ है, सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र 11 मार्च 2016 द्वारा प्रमुख सचिव छग ने विधानसभा सचिवालय को सूचित किया गया कि विधानसभा के दिसंबर 2015 सत्र मे सरगुजा बस्तर,रायपुर जिला मुख्यालयोँ मे हाईकोर्ट की खंड पीठ की स्थापना के पारित अशासकीय संकल्प को विभाग के समसंख्यक पत्र 2 मार्च 2016 द्वारा भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय,नई दिल्ली को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।उपरोक्त सभी तथ्योँ की परख की जा सकती है फिर स्वयं ही तय करें कि डबल इंजन की सरकार कैसे काम कर रही है...?और क्या यह जनहित मेँ हो रहा है...यह सवाल वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज दुबे ने उठाया है।
27 आईएएस के
खिलाफ शिकायतें...
छत्तीसगढ़ सरकार ने 27 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है,जिसमें उन पर 2019 से 2024 के बीच भ्रष्टाचार,सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है, जिसमें आईएएस राजेश एस टोप्पो भी शामिल हैं, जो संवाद के पूर्व सीईओ थे,उन्होंने कथित तौर पर बिना उचित निविदा के 75. 74 लाख रुपये का काम करवाया, जिससे वित्तीय कुप्रबंधन हुआ।आईएएस संजय अलंग,जो पहले पाठ्य पुस्तक निगम के एम डी थे, वित्तीय अनियमितताओं और अधिकार के दुरुपयोग का आरोप है।कोरबा जिला कलेक्टर रह चुकी आईएएस रानू साहू पर फंड की हेराफेरी का आरोप है,जिसके कारण सरकारी को 8 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। उन पर जबरन वसूली और आय से अधिक संपत्ति रखने का भी आरोप है।खनन निदेशालय के निदेशक रहे,आई एएस समीर बिश्नोई पर सरकारी को चूना लगाने, आय से अधिक संपत्ति रखने की भी साजिश का आरोप है।स्कूल शिक्षा के पूर्व प्रमुख सचिव,आईएएस डॉ.आलोक शुक्ला पर ईओ डब्ल्यू के एक मामले में अवैध धन लाभ के लिए पद का दुरुपयोग करने, गवाहों को दबाव में लेने का आरोप है वाणिज्य-उद्योग विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा पर भी इसी तरह के आरोप हैं, साथ ही 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार, करोड़ों रुपये के शराब घोटाले में शामिल होने का आरोप है,इसके अलावा आईएएस विवेक ढांढ पर भी रेरा के चेयरमैन रहते सरकारी जमीन पर अति क्रमण करने का आरोप है।आबकारी आयुक्त आईए एस निरंजन दास करोड़ों की अवैध कमाई,आय से अधिक संपत्ति,शराब घोटाले की जांच के घेरे में हैं।आईएएस कुलदीप शर्मा ने जशपुर जिला पंचायत के सीईओ रहते कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया।आईएएस सुरेन्द्र जायसवाल जैसे अन्य अधिकारियों पर ठाकुर प्यारे लाल पंचायत और ग्रामीण विकास संस्थान में निदेशक रहने के दौरान बिना सरकारी मंजूरी के ही करोड़ों रुपये के फ्लैट खरीदने का आरोप है।
और अब बस......
0छ्ग विधानसभा में सत्ताधारी दल के राजेश मूणत, धर्मलाल कौशिक, अजय चंद्राकर अपने ही मंत्रियों को क्यों घेर रहे हैं?
0आईएएस सुबोध सिंह की छग वापसी हो गई है, वे सीएम के प्रमुख सचिव बनाये गये हैं....?
0छत्तीसगढ़ में निकाय चुनाव से पहले क्या जोगी परिवार की कांग्रेस वापसी हो पाएगी ....?
0पहली बार विस सत्र में विधायकों के निजी सहायकों को भवन में इंट्री नहीं मिली?
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