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Admin Wed, Dec 11, 2024

देवभोग। गरियाबंद। श्रीमज्ज ज्योतिर्मयानंद जी व्यास गद्दी से गणेश हनुमत स्मरण श्री नारायण और गुरु वंदन के साथ उपस्थित भक्तों की मंगल कामना के साथ भारत अखंड हो हिन्दू प्रचंड हो की जयघोष लगाकर ध्रुव जन्म और ध्रुव चरित्र पर प्रकाश डाला ।भागवत कथा अनुसार उत्तानपाद की कथा सुनाया जिसका पैर उलटा हो उसे ही उत्तानपाद कहा गया है उत्तानपाद की दो रानियां थी कुमति और सुमति मतलब जीव के अंदर भी दो विचार रहता है। उत्तानपाद का अर्थ उल्टा पांव वाला होता है उल्टे पैर होते किसके है आज जो माता पिता गुरु धर्म की सेवा ना करे जो विपरीत कार्य करे वही उलटा पांव वाला है। धर्मसिद्ध कार्य करे शास्त्र सम्मत बात कर मातापिता गुरु की सेवा करे मांस मदिरा पान ना करे वह सही पैर वाला बन जाता है।सुमति और कुमति सब जीवों के अंदर विद्यमान होता है जीव हमेशा कुमति से प्रेम करने लगता है सुमति से प्रेम करना छोड़ कर।जीव हमेशा कुमति विचार को ही जल्दी अपनाता है सुमति विचार को सोचता भी नहीं है,इसलिए आज ध्रुव जैसा पुत्र पैदा नहीं हो रहा। उत्तानपाद राजा की एक रानी सुमति थी जहां ध्रुव जैसा पुत्र उत्पन्न हुआ।ध्रुव पिता और सौतेली माता के व्यवहार से दुखी हो अपनी माता के समझने पर घर बार महल का सुख त्याग परमपिता की प्राप्ति के लिए जंगल निकल जाता है।जंगल में घोर तपस्या कर भगवान की आराधना कर भगवान विष्णु ईश्वर को प्राप्त कर लेता है। स्वामी जी ने उपस्थित श्रोताओं को कहा क्या सही है क्या गलत है इसका शास्त्रो में उचित वर्णन है।उत्तम विचार और श्रेष्ठ समाज के निर्माण के लिए बुराइयों से बचना होगा समाज को अधोगमन से रोकना होगा।समाज सुधार के लिए राम राज्य लाना होगा जहां कोई दुख नहीं कोई तकलीफ नहीं होता स्वामी तुलसी दास जी ने रामायण में बहुत उत्तम बात कही है दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज काहु नहीं व्यापा।'' इसका अर्थ यह हुआ कि राम के राज्य में शारीरिक रोग मन संबंधित रोग, दैवीय प्रकोप और भौतिक आपदा का किसी प्रकार से कोई प्रभाव नहीं होता था। स्वामी ने धर्मजागरण पर कहा हमारा धर्म सनातन धर्म है जिसे कोई नष्ट नहीं कर सकता ।आज बहुधा जन कुमति की ओर चल रहे है इस कारण जीवन मरण से मुक्ति नहीं पा सकते ।समाज में ध्रुव जैसा चरित्र का निर्माण करना होगा । एक दृष्टांत सुनाते समाज की पूर्व वर्ण व्यवस्था पर कहा अंग नाम का राजा था जिसको वेन नाम का पुत्र हुआ पुत्र बहुत नालायक हो नीच कार्यों में लिप्त रहता । शास्त्रों में लिखा है जो पुत्र पुत्रियां है कर्मो के फल स्वरूप ही आते है। परीक्षित ने शुकदेव से पूछा गुरुदेव यह तो अच्छे कुल में पैदा हुआ फिर यह कैसा दोष आ गया शुकदेव मुनि ने कहा अंग से पूर्व में एक गलती हुई कि अवर्ण से प्रेम विवाह किया जिस कारण यह पुत्र हुआ है।शास्त्र में वर्णित है पाणिग्रहण संस्कार स्व _वर्ण में अपने वर्ण में ही होना चाहिए नहीं तो समाज में वर्ण शंकर संताने पैदा होती है जिससे पूरा कुल नरक गामी बन जाता है। दंडी स्वामी ने प्रवचन में आगे कहा स्वच्छता और पवित्रता में बहुत अंतर है आप शौचालय को स्वच्छ बना सकते है पवित्र नहीं पूजा घर को पवित्र बनाएंगे अपवित्र नहीं वैसे ही जीव को पवित्र विचार रख कर ही ईश्वर का ध्यान कर कल्याण मार्ग पर चलना होगा।क्योंकि पवित्रता सनातन धर्म की श्रेष्ठता को दर्शाता है। जीव जब तक पवित्र नहीं होगा तब तक वह ईश्वर को नहीं देख सकता । दंडी स्वामी ने अपने धार्मिक प्रवचन को संक्षिप्त करते गुरु महत्ता पर प्रकाश डाला आज के समय में गुरु ही ब्रह्म विष्णु और महेश है, जो हमें गलत मार्ग से हटाकर सत्कर्म मार्ग पर ले आते है।जितना जल्द हो ईश्वर भक्ति और संत से संपर्क करना चाहिए संत मिलन संत समागम समाज में होना ही चाहिए आदि गुरु शंकराचार्य ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया ।देश की चारों सीमाओं में चार मठ की स्थापन कर हिंदू सनातन धर्म को जीवित रखा कहा गया है जैसे लोहा पारस के संपर्क में सोना बन जाता है वैसे ही मनुष्य सज्जन और संत का सान्निध्य पाकर श्रेष्ठ हो जाता है। दंडी स्वामी ने आगे कहा साधु का अपमान कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि साधुओं के दूर होने से पुण्य नष्ट हो जाता है संत हमेशा धर्मानुरागी है उनके रूष्ट होने से मनुष्य का पुण्य पाप में बदल जाता है, मृत्यु काल निकट आने लगता है। रामायण में रावण के साथ वही हुआ उसने विभीषण को लात मार कर भगाया उसी क्षण रावण अधोगामी हो चला साधु अपमान संकट का समय ला देता है। आग योगी पवन जल ये अतिशय में आ जाय तो समाज और संसार में उथलपुथल मचा सकते है इनका सम्मान सदैव करना चाहिए।जब विपति का समय आता है तो बुद्धि विपरीत हो ही जाती है सब भगवान की लीला है।इसलिए हमेशा शास्त्र सम्मत धर्म सम्मत कार्य करें। उन्होंने कहा भागवत कथा और श्री रुद्र यज्ञ 15 दिसम्बर तक चलेगा आप सब ज्ञान गंगा में डुबकी लगा अपने जीवन को कृतार्थ करें।कल के धार्मिक आयोजन अपने साथ समस्त धर्म प्रेमियों को साथ लेकर आएं।क्योंकि अंत भला तो सब भला। आज दंडी स्वामी जी का स्वागत डॉ सेंगर सनत कुमार राजपूत ओमन सिंह डॉ साहनी दीपक पांडेय धरम सिंह वर्मा देवी प्रसाद मिश्रा गिरवर साहू लोकेश्वर शुक्ला प्रदीप गिल धरम सिंह वर्मा श्रीमती सुषमा साहु सीमा बाई साहू रानू मुप्ता,रानी डेनिम सेन. ममता साहू कमला साहू द्वारा किया गया। व्यवस्थापन कार्य में शत्रुघन सिंह साहू लेखमणि पाण्डेय विजय सिन्हा ताराचंद साहू मनोज शर्मा सतीश कसार जितेंद्र शुक्ला ललित विश्वकर्मा महेंद्र गुप्ता रोशन दत्ता प्रांजल गौतम हितेंद्र साहू प्रहलाद मिश्रा नीतू कोठारी सीमा साहू वर्षा गौतम ज्योती सिंघानिया रश्मि मिश्रा माधवी शर्मा नीति अग्रवाल महेश शर्मा लोकेश्वर शुक्ला पूर्ण सक्रिय रहे। आज धर्म कथा में वरिष्ठ भाजपा नेता योगेश तिवारी भी शामिल हुआ।

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