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: आज के चर्चित चेहरे, अभिनेता, कार्टूनिस्ट, व्यंग्यकार जगदीश पाठक

Admin Tue, Dec 3, 2024

मनेन्द्रगढ जिसका प्राचीन नाम कारीमाटी है इस धरा पर हमेशा से अद्भुत लोगों का निवास रहा है जिन्होंने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है ऐसे ही हमारे नगर के अभिनेता, कार्टूनिस्ट, व्यंग्यकार जगदीश पाठक हैं जिनका जन्म 03/03/1950 को छिंदवाड़ा में हुआ था, पिता पुलिस विभाग में थे इसलिए उनके स्थानांतरण के कारण कई स्थानों पर रहने का अवसर मिला पहली से लेकर तीसरी कक्षा तक की पढ़ाई रायपुर में हुई और फिर शेष शिक्षा रायगढ़ में हुई श्री पाठक जी आज अपनी कल्पनाओं में रायगढ़ में विचरते रहते हैंउनका बचपन में सुविधाएं कम थीं तब सहपाठी आपस में किताबें अदल बदल कर पढ़ते थे सन् 1965 से 1968 तक वे सशस्त्र पुलिस बल (11 वीं बटालियन)में रहे तब वे हायर सेकेण्डरी तक ही पढे थे लेकिन तब समाज को देखने समझने की दृष्टि विकसित हो रही थी और फिर उन्होंने समाज की विसंगतियों पर लिखना शुरू किया और एक व्यंग्यकार का जन्म हुआ 1968 में उनके पिता का स्थानांतरण मनेन्द्रगढ़ हो गया और साथ ही उनकी बटालियन केन्द्रीय बटालियन बन गई तब वे नौकरी से इस्तीफा देकर मनेन्द्रगढ़ आ गए और फिर अंबिकापुर से कामर्स में स्नातक किया जिससे उन्हें भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी मिली।जब वे बैकुंठपुर में पदस्थ थे तब उन्होंने अपनी ओर से संबोधन संस्था की पहली गोष्ठी आयोजित करवाई जिसमें गिरीश पंकज, जितेन्द्र सिंह सोढ़ी और रुद्र प्रसाद रूप आदि संबोधन के सक्रिय सदस्य, पदाधिकारी रहे तब तक उनके व्यंग्य वागर्थ, व्यंग्य यात्रा, दैनिक भास्कर, दैनिक नवभारत आदि में नियमित छपने लगे अभी तक सब कुछ बढ़िया चल रहा था लेकिन मंझले पुत्र की असामयिक मृत्यु ने सब उथल-पुथल कर दी, दुख से उबरने के लिए अपनी नौकरी से समय पूर्व सेवानिवृत्त ले ली और अपना मन लेखन में लगाकर दुःख भुलाने में लगाने का प्रयास किया, इसी बीच छोटे बेटे को भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए भोपाल चले गए जहां अपने मित्र शशिकांत लिमये के संपर्क से फिल्म निर्माता प्रकाश झा की फिल्म राजनीति में नाना पाटेकर, अजय देवगन आदि बड़े अभिनेताओं के काम करने का अवसर मिला घूमता दर्पण के प्रधान संपादक प्रवीण निशी, नव चिंतन के अरुण श्रीवास्तव आदि की प्रेरणा से कार्टून बनाने में गति मिली जो निरंतर जारी है उनका एक व्यंग संग्रह "छोटे छोटे तीर" प्रकाशित हो चुका है। श्री पाठक  ने कहा कि अब लोग फेसबुक पर लिखने लगे हैं जो बहुत बड़ा प्लेटफार्म है जिसमें आप अपने ही संपादक हैं,आज सोशल मीडिया या तो कचरादान, उगलदान है या फिर सुंदर फूलों भरा गमला ये आप पर निर्भर करता है कि आप अपने पेज को क्या बनाते हैं ।

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