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रोशनलाल अवस्थी की कलम से.... : धधकते अंगारों पर अटूट आस्था: देहारगुड़ा में अनूठी परंपरा ने जगाई श्रद्धा की ज्योति

Praveen Nishee Tue, Mar 3, 2026

मैनपुर ।गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत देहारगुड़ा में होलिका दहन के अवसर पर आस्था, साहस और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां वर्षों पुरानी मान्यता के अनुसार ग्रामीणों ने धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलकर अपनी श्रद्धा और विश्वास का परिचय दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि ग्राम की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

रात्रि जागरण के साथ प्रारंभ हुए इस पारंपरिक आयोजन में पूरे गांव के महिला-पुरुष, बुजुर्ग, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। देर रात तक भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। प्रातः लगभग 5 बजे ग्राम के झांकर और ग्राम पटेल के नेतृत्व में विधि-विधान से होलिका दहन संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार और विशेष पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने जलते अंगारों पर चलने की परंपरा निभाई।

धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते ग्रामीणों का दृश्य रोमांच और श्रद्धा से भर देने वाला था। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से शारीरिक कष्टों का निवारण होता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है। ग्राम के बुजुर्गों के अनुसार यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसे गांव के लोग आज भी पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ निभाते हैं।

ग्राम झांकर ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की एकजुटता और भाईचारे को सुदृढ़ करने का माध्यम भी है। सामूहिक सहभागिता से यह संदेश मिलता है कि परंपराएं समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं और सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखती हैं।

पूरे आयोजन के दौरान गांव में उत्साह, अनुशासन और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, वहीं युवाओं ने व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।

देहारगुड़ा का यह अनूठा होलिका दहन ग्रामीण संस्कृति, आस्था और साहस का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। धधकते अंगारों पर पड़ते कदमों ने यह साबित कर दिया कि विश्वास की लौ जब प्रज्वलित होती है, तो हर चुनौती उसके आगे छोटी पड़ जाती है।

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