वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..(कॉलम 20 सालों से लगातार) : कहां सवालों के तुमसे,जवाब मांगते हैँ... हम अपनी आँखों के हिस्से के ख्वाब मांगते हैं...
Praveen Nishee Fri, Jan 30, 2026
हमीँ को दरिया पऱ ,जाने से रोकने वाले.... हमीं से पानी का सारा,हिसाब मांगते हैं...
मणिकर्णका घाट पर मृत्यु का जश्न है,मनुष्य आखिर जिन्दा क्यों है,एकमेव प्रश्न है...... बनारस के मणिकर्णिका घाट के बारे में यह कहा जाता है कि यहां 24 घंटे 365 दिन कभी चिता की आग नहीं बुझती, जलने वाली चिताओं से निकलने वाली भस्म कॉरिडोर तक आती हैं, बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में अब कॉरिडोर बिल्कुल मणिकर्णिका घाट से सट गया है,इसके कायाकल्प की जरूरत भी महसूस की जा रही थी,हालांकि यहां एक चबूतरे के विध्वंस के बाद हंगामा मच गया क्योंकि वहां कई मूर्तियां थीं, सरकार नये तरीके से इसे बना रही है,औरंगजेब द्वारा काशी विश्वनाथ के विध्वंश के बाद इंदौर की ही महारानी अहिल्याबाई ने काशी में कई बड़े कार्य कराये थे। विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ अहिल्याबाई ने मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार कराया, उसी कालखंड में मढ़ी को भी बनवाया गया था। बाद में मढ़ी के निचले हिस्से में अहिल्याबाई की प्रतिमा के साथ और भी प्रतिमाएं लगी थीं। ड्रिल करते समय इन्हीं मूर्तियों को हटाने के तरीके का स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू किया था। मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों कायाकल्प का काम चल रहा है, जिसको लेकर तोड़फोड़ और मूर्तियों के नुकसान के आरोपों पर सियासी घमासान मचा हुआ है।सरकार का कहना है कि घाट को 'विश्वस्तरीय सुविधाओं' के साथ नए सिरे से विकसित किया जा रहा है।इसके लिए पहले चरण में 35 करोड़ ₹ आवंटित किए हैं, बड़ा प्लेटफार्म बनाया जाएगा ताकि एक साथ अंतिम संस्कार की बेहतर व्यवस्था हो सके..!
गंगाराम, मोहिले और
मारवाड़ी शमशानघाट..
मणिकर्णका घाट विवाद को लेकर रायपुर का एक प्रसंग याद आ रहा है।रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष गंगा राम शर्मा को हटा कमिश्नर ए डी मोहिले को प्रभारी बनाया गया। गंगाराम ने शिकायत की-आप मेरे कार्यकाल की योजना की उपेक्षा कर रहे हैं, मैंने मारवाड़ी कब्रिस्तान की बाउंडीवाल बनाने की योजना बनाई थीं, उसे स्थगित कर दिया...तब वरिष्ठ आईएएस ने कहा था- देखिये गंगारामजी "बाहर वाले लोग कब्रिस्तान के भीतर नहीं आना चाहते और अंदर वाले (मृतक) बाहर नहीं जाना चाहते"फिर बाउंड्रीवाल में इतना खर्च करने की क्या जरूरत हैं...कुछ ऐसा मणि कर्णकाघाट का हाल है, अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिये आते हैं वहाँ विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत देने निर्माण कार्य कर नये विवाद को जन्म देने के पीछे आखिर क्या तुक है...?
साबित करें वो
शंकराचार्य हैं......!
शँकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बीते 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज संगम में स्नान करने जा रहे थे,इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद से धरने पर बैठे थे, उनके समर्थकों से उप्र पुलिस का व्यवहार भी अशोभनीय ही रहा, दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग नहीं पूरी होने पऱ वे बिना स्नान के ही लौट गये, सनातन की वकालत करने वाली भाजपा, योगी जैसे सीएम के रहते इस तरह की घटना में भाजपा में भी मतभेद है। खैर योगी की सरकार ने नोटिस दिया है कि शंकराचार्य साबित करें वे शंकराचार्य हैं...? वैसे ज़ब से केंद्र और कुछ राज्यों में भाजपा की सरकारें बनी है वहाँ एक नई चर्चा ने जन्म लिया है।नागरिक साबित करे वो नागरिक है...? वोटर साबित करे वो ही वोटर है...? किसान साबित करे वो किसान है...? निर्दोष साबित करे वो निर्दोष है...? देशभक्त साबित करे वो देशभक्त है...?अक्लमंद साबित करे कि वो अक्लमंद है...? पहाड़ साबित करे वो पहाड़ है.? नदी साबित करे वो नदी है...? जंगल साबित करे वो जंगल है...? इतिहास साबित करे वो इतिहास है...?इंसान साबित करे वो इंसान है...? वाह रे अमृतकाल की सरकार....!
महाकाल की नगरी, घोड़े की
सवारी,सीएम और मिथक....
धार्मिक नगरी उज्जैन में 'राह गीरी आनंदोत्सव' के दौरान एक बड़ा हादसा होते- होते टल गया। कार्यक्रम के दौरान जब सीएम डॉ.मोहन यादव घुड़सवारी कर रहे थे, अचानक ही उनका संतुलन बिगड़ गया और वे घोड़े से नीचे गिर पड़े। इस अचानक हुई घटना से वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। बाबा महाकाल उज्जैन के राजाधिराज हैं। यह आस्था नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही परंपरा है। इस नगरी को लेकर पुरानी मान्यता है, महाकाल के अलावा दूसरा 'राजा' टिक नहीं सकता। इतिहास में केवल सम्राट विक्रमादित्य ही ऐसे राजा माने जाते हैं... जिन्होंने उज्जैन में रात्रि विश्राम किया, वे सिर्फ रुके ही नहीं,बल्कि उज्जैन में रहते हुए घोड़े की सवारी करते थे,आत्मविश्वास था,तेज था, शायद बाबा महाकाल का आशीर्वाद भी...। फिर युग बदला,राजे गए,लोकतंत्र आया। राजा की जगह सीएम आए। लेकिन परंपरा नहीं बदली। मप्र के किसी भी सीएम ने उज्जैन में रात नहीं बिताई। सिंहस्थ जैसे महापर्व पर भी शिवराज सिंह चौहान दिन में ही निरीक्षण कर लौट जाते थे। उनसे पहले वाले भी यही करते रहे। शायद सबको पता था, उज्जैन में ताज नहीं, त्रिशूल चलता है। फिर सीएम बने डॉ. मोहन यादव। 16-17 दिसंबर 23 की रात उज्जैन में रुक कर वर्षों पुराने मिथक को तोड़ दिया। बयान आया, बाबा महाकाल ही एकमात्र राजा हैं,मैं तो उनका बेटा हूँ। बात सुनने में बड़ी विनम्र लगी। बेटे के साथ पूरा सीएम वाला काफिला, सुरक्षा घेरा, प्रोटोकॉल और शाही ठाठ भी मुफ्त में चला आया। ताज नहीं पहना। बस पूरा दरबार साथ ले आए।अब उज्जैन का ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें घोडे डॉ. यादव को बैठाने से इंकार कर दिया।विक्रमादित्य,घोड़े पर सवार होते थे और आज…..घोड़े ने डॉ. यादव को नकार दिया। इसे संयोग कहिए या संकेत। तस्वीर साफ़ है। जिस नगरी में सम्राट की सवारी सहज थी, वहीं सीएम को घोड़ा स्वीकार नहीं कर पा रहा, इतिहास तलवार से नहीं, संकेतों से बोलता है, उज्जैन में तो संकेत भी बहुत भारी पड़ते हैं। कहने को डॉ. मोहन यादव स्वयं को बाबा महाकाल का बेटा बताते हैं,पर संदेश बड़ा सीधा है,उज्जैन में सिर्फ महाकाल राजा हैं, बाकी सब… अस्थायी यात्री। महाकाल की नगरी में मेहमान बनकर आया जा सकता है, पर राजा बनने की कोशिश…भारी पड़ती है।
बस्तर को नक्सलमुक्त
करने के बाद क्या ...!
छग को नक्सलवाद से मुक्ति मिलना अब तय हो चुका है। केंद्रीय बल, छ्ग पुलिस की मुहिम से कई बड़े नक्सली लीडर या तो मारे जा चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं, इक्के दुक्के भूमिगत हो चुके हैं। वैसे छ्ग में 02 वर्षों में 529 नक्सली मारे जा चुके हैं,1975 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं 26 28 नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया है।यह सिलसिला जारी भी है।बस्तर में आतंक का पर्याय हार्डकोर नक्सली लीडर बसवराजू , लक्ष्मी नर सिम्हा चालम उर्फ सुधाकर, माडवी हिड़मा को न्यूट्रलाइज किया गया इन पर करोड़ों का ईनाम घोषित था। जाहिर है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह केआदेश,सीएम विष्णु देव साय के मार्गदर्शन, डीजी पी अरुणदेव गौतम के नेतृत्व, बस्तर आईजी सुन्दर राज पी.की कुशल रणनीति में नक्सली नेतृत्व दम तोड़ रहा है। निर्धारित समय 31 मार्च के पहले ही छ्ग नक्सल मुक्त हो जाएगा। पऱ बस्तर का नक्सल मुक्त होने के बाद क्या होगा.... क्या बस्तर अभी की स्थिति में रहेगा या उसका स्वरूप बदल जाएगा क्योंकि अभी तक नक्सल मुक्त होने के बाद बस्तर के विकास का ब्लू प्रिंट सामने नहीं आया है....!
एक भी पुलिस पदक
नहीं... दोषी कौन....?
2020 से 25 तक तो राज्य को राष्ट्रपति का पुलिस वीरता पदक मिलता रहा है, 2026 में 206 नक्सलियों सहित कुछ बड़े नक्सली लीडरों को छ्ग में मारने, एक साथ 30- 35 नक्सलियों को मारने पऱ भी एक भी पुलिस पदक नहीं मिलना चर्चा में है? सूत्रों की माने तो कुछ एसपी ऑफिसों से पुलिस पदक की पुलिस मुख्यालय अनुशंसा भेजी गई, वहाँ से भी छ्ग के गृह विभाग भी सूची भेजी गई पऱ राज्य के गृह विभाग से केंद्रीय गृह मंत्रालय निर्धारित समय में अनुशंसा भेजनें में कोताही बरती गई जिससे छ्ग को एक भी पुलिस पदक नहीं मिल सका... जबकि 2020 में 8,सन 21 में 205, सन 22 में 10, सन 23 में 7, सन 24 में 26, सन 25 में 14 पुलिस पद क छ्ग को मिले थे वहीं 2026 में एक भी मैडल नहीं मिला है?
और अब बस....
0छग के निजी अस्पतालों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर आयुष्मान भारत योजना के तहत बकाया 1700 करोड़ रुपये का भुगतान 31 जनवरी तक नहीं हुआ, तो 1 फरवरी से सभी निजी अस्प तालों में इस योजना के मरीजों का इलाज बंद हो जाएगा।
Oछग सरकार के नये नये मंत्री गुरु खुशवंत साहब दुबई विदेश यात्रा पर गए हैं। सीएम की अनुमति से मंत्री की इस यात्रा की लेकर सवाल खड़े हो रहे थे।
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