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7th March 2026

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लपटों से बचने गांवों की ओर भाग रहे वन्यजीव, वन विभाग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल!

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कांदाडोंगर के पवित्र जंगल में धधकी विनाश की आग : लपटों से बचने गांवों की ओर भाग रहे वन्यजीव, वन विभाग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल!

Praveen Nishee Fri, Mar 6, 2026

गोहरापदर। गरियाबंद। गरियाबंद वनमंडल अंतर्गत गोहरापदर सर्कल के प्रसिद्ध कांदाडोंगर जंगल में इन दिनों भीषण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। जंगल के कई हिस्सों में फैली आग लगातार धधक रही है, जिससे वन्यजीवों का जीवन गंभीर संकट में पड़ गया है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई वन्य प्राणी धधकती लपटों से जान बचाने के लिए जंगल छोड़कर आसपास के गांवों की ओर भागते हुए देखे जा रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई दिनों से जंगल के भीतर आग फैलती जा रही है, लेकिन आग पर नियंत्रण पाने के लिए वन विभाग की ओर से अपेक्षित सक्रियता और ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। इस स्थिति को लेकर क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है।

कांदाडोंगर का यह घना जंगल केवल वन संपदा और वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था का भी अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। कुलेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध कांदाडोंगर पूरे छत्तीसगढ़ में आस्था के प्रमुख स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहां 84 गढ़ के देवी-देवताओं का प्रमुख आस्था केंद्र स्थित है।

हर वर्ष विजयादशमी (दशहरा) के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में देवी-देवताओं की पारंपरिक यात्राएं निकलती हैं और दूर-दराज से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यह स्थल क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है।

धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को कुछ समय पूर्व क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग भी उठाई गई थी। वहीं क्षेत्रीय ग्रामीण भी वर्षों से कांदाडोंगर को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग करते आ रहे हैं।

लेकिन विडंबना यह है कि जिस स्थान को पर्यटन और आस्था का केंद्र बनाने की बात हो रही है, वहीं आज वही पवित्र वन क्षेत्र भीषण आग की चपेट में आकर भारी संकट का सामना कर रहा है। जंगल की आग न केवल वन्यजीवों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है, बल्कि 84 गढ़ की आस्था से जुड़े देवी-देवताओं के इस पवित्र स्थल को भी खतरे में डाल रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि आग की सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की सक्रियता मौके पर नजर नहीं आ रही है। विभाग की कथित निष्क्रियता और लापरवाही के कारण जंगल, वन्यजीव और आस्था का यह महत्वपूर्ण स्थल फिलहाल भगवान भरोसे दिखाई दे रहा है।

यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो कांदाडोंगर का यह समृद्ध और पवित्र जंगल भारी पर्यावरणीय तथा धार्मिक क्षति का शिकार हो सकता है। ऐसे में अब क्षेत्र में यह सवाल उठने लगा है कि क्या वन विभाग समय रहते आग पर काबू पाएगा, या फिर किसी बड़े नुकसान का इंतजार किया जा रहा है?

अब पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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