कोल इंडिया की त्रिपक्षीय बैठक में सुरक्षा पर बड़ा मंथन : एक वर्ष में 29 घातक हादसों में 36 श्रमिकों की मौत पर जताई गहरी चिंता, दोषियों पर कार्रवाई करे -अख्तर जावेद उस्मानी
29 घातक हादसे, 36 श्रमिकों की मौत पर चिंता,25 बिंदुओं पर सुरक्षा सुधार की जोरदार मांग,ठेका श्रमिकों की सुरक्षा, मुआवजा और जवाबदेही पर जोर,कोल इंडिया प्रबंधन ने सुधारात्मक कार्रवाई का दिया आश्वासन
मनेंद्रगढ़।एमसीबी। देश के कोयला उद्योग में श्रमिक सुरक्षा को लेकर कोलकाता में आयोजित कोल इंडिया लिमिटेड की त्रिपक्षीय सुरक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर व्यापक मंथन हुआ। बैठक में भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (DGMS), विभिन्न क्षेत्रों के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन, डायरेक्टर (टेक्निकल), एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (सेफ्टी), सभी अनुषंगी कंपनियों एवं सीएमपीडीआईएल के सीएमडी तथा महाप्रबंधक (सुरक्षा) सहित केंद्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय प्रतिनिधि अख्तर जावेद उस्मानी ने श्रमिक सुरक्षा से जुड़े 25 महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में 29 प्राणघातक खान दुर्घटनाओं में 36 श्रमिकों की मौत होना कोयला उद्योग के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी। प्रत्येक दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उन्होंने की।
उस्मानी ने सोहागपुर की विद्युत दुर्घटना को ठेकेदार द्वारा कथित रूप से छिपाए जाने, कुसमुंडा में कम चौड़ाई वाली हॉल रोड पर डंपर संचालन से हुई दुर्घटना, बंगवार खान में एयर ब्लास्ट, कृष्णशिला खान में बिना नियुक्ति पत्र ठेका श्रमिक से कार्य लेने तथा डब्ल्यूसीएल और बीसीसीएल में लगातार सामने आ रही सुरक्षा खामियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि कई खदानों में ठेका मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों, बिना मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और बिना व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के कार्य कराया जा रहा है, जो सीधे तौर पर श्रमिकों के जीवन से खिलवाड़ है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण हेलमेट एवं गमबूट की नियमित उपलब्धता, बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली, सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट को माइन सेफ्टी कमेटी के समक्ष रखने, इलेक्ट्रिशियनों की सीधी भर्ती, प्रत्येक खदान में मेन राइडिंग सिस्टम, भूमिगत वायरलेस संचार, मेडिकल पोर्टल की नियमित समीक्षा तथा आधुनिक सुरक्षा मानकों को लागू करने की मांग की।
बैठक में शोरजनित श्रवण हानि (Noise Induced Hearing Loss) के मामलों में उचित मुआवजा, शोर की अधिकतम सीमा संबंधी पुराने डीजीएमएस तकनीकी परिपत्र में संशोधन, केवल मूल एवं अनुमोदित स्पेयर पार्ट्स की खरीद, सुरक्षा प्रबंधन योजना (Safety Management Plan) की प्रभावी समीक्षा, अधिकारियों के लिए अनिवार्य तकनीकी एवं सुरक्षा प्रशिक्षण तथा अवैध उत्खनन रोकने के लिए खदानों की फेंसिंग जैसे विषय भी प्रमुखता से उठाए गए।
साथ ही मानसिक तनाव, एर्गोनॉमिक्स तथा खान सुरक्षा तकनीक पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा की जा रही पहल की सराहना करते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाने का सुझाव भी दिया गया।
बैठक के अंत में कोल इंडिया प्रबंधन एवं डीजीएमएस अधिकारियों ने सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने, आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने तथा सुरक्षा संबंधी कार्यों की नियमित समीक्षा एवं प्रगति परीक्षण कराने का आश्वासन दिया।

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