वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से.... 20 वर्षो से लगातार : विधाता की अदालत में वकालत बड़ी न्यारी है.. शांत रहिये, कर्म कीजिये सबका मुकदमा जारी है..
Praveen Nishee Fri, Nov 14, 2025
बंगाली लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय 1875 में वन्दे मातरम गीत की रचना की थी। यही गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए अंग्रेजों के खिलाफ एक हथियार बन गया...।आनंदमठ में प्रकाशित इस गीत में मां के उग्र और कोमल रूप का वर्णन किया था।दरअसल, बंकिमचंद्र ने इस गीत में स्त्री शक्ति को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत को एक मां के रूप में प्रस्तुत किया, मातरम गीत में स्त्री को आक्रामक (70 करोड़ हाथों में तलवारें चमकती हैं और 70 करोड़ आवाजें किनारे से किनारे तक भया नक नाम से गरजती हैं।) सौम्यता (मां सहजता, प्रदान करने वाली, धीमी और मीठी हंसी) के रूप में भी उल्लेखित किया बाद की पंक्तियों में, खास कर आखिरी की दो पंक्तियों में चटर्जी, हिंदू देवियों दुर्गा, कमला (या लक्ष्मी) और सरस्वती का उल्लेख करते हुए स्त्री रक्षक,"अद्वितीय शुद्ध और परिपूर्ण बताते हैं। 1937 में तब नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने फैज पुर में राष्ट्रीय सभा के लिए केवल पहले दो छंदों का उपयोग करने का निर्णय लिया। तर्क यह था कि हिंदू देवी- देवताओं के प्रत्यक्ष संदर्भ मुस्लिम समुदाय के कुछ सदस्यों को पसंद नहीं आएगा...! 'बहिष्कारक' माना गया। पर अब की भाजपा ने तर्क दिया है कि पंक्तियों को हटाना कांग्रेस की 'विभाजनकारी' योजनाओं को दर्शाता है।पीएम मोदी ने विभाजन का हवाला देते हुए कहा कि इन पंक्तियों को हटाने से "देश विभाजन के बीज बोये गए"।नेहरू ने बोस को जो पत्र लिखा था (जिसके कुछ पृष्ठ भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने भी साझा किए थे ), उसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि विचाराधीन पंक्तियों की व्याख्या नहीं की जानी चाहिए कि उनका देवी-देवताओं या दैवीय आकृतियों से कोई संबंध है। व्याख्या बेतुकी है...मैं समझता हूं कि पूरा गीत, उसमें लिखे सभी शब्द पूरी तरह से हानि रहित हैं, कोई भी इस पर आपत्ति नहीं कर सकता।उन्होंने मुस्लिम समुदाय के कुछ सदस्यों में बेचैनी को स्वीकार किया कहा कि "इसमें (उन छंदों पर विवाद में ) कुछ सार प्रतीत होता है" भले ही उनके विचार में बड़ा विवाद "सांप्रदायिक लोगों द्वारा निर्मित" किया गया हो...। नतीजा यह हुआ कि जब उस वर्ष (1937) 26 और 28 दिसंबर के बीच फैजपुर में कांग्रेस की बैठक हुई तो दुर्गा, लक्ष्मी सरस्वती का उल्लेख करने वाली पंक्तियों को छोड़कर 'वंदे मातरम' को अपना लिया। प्रस्ताव में कहा गया था "सभी बातों को ध्यान में रखते समिति सिफारिश करती है कि जब भी राष्ट्रीय समारोहों में ' वंदे मातरम ' गाया जाए तो केवल पहली दो पंक्तियां ही गाई जानी चाहिए।"
118 साल पहले रायपुर के टाउन हॉल में गूंजा था ‘वंदे मातरम्’,
छत्तीसगढ़ के लिए अवसर खास है क्योंकि 1907 में पं.रविशंकर शुक्ल के नेतृत्व में टाउनहॉल में वंदे मातरम का सामूहिक गायन हुआ था,1907 में जब अंग्रेजों की हुकूमत के खिलाफ पूरे देश में आजादी की लहर तेज हो रही थी, तब रायपुर में राष्ट्रवादी बुद्धिजीवियों का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया था।सम्मेलन टाउन हॉल (अभी कलेक्टर परिसर) में हुआ था,पं. रवि शंकर शुक्ला ने नेतृत्व किया था। इसी दौरान पहली बार रायपुर में वंदेमातरम का सामूहिक गायन किया था।इतिहासकारों के अनुसार, छग के स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ था।1905 में लॉर्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन किए जाने के बाद देश भर में अंग्रेजों के खिलाफ विरोध शुरू हो गया। इस विरोध को राष्ट्र वादी क्रांति नाम दिया गया। आंदोलन की लहर आंध्रप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ तक फैली कृष्णा जिले,बस्तर के आस -पास अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई, इतिहास कारों का कहना है कि आंध्र से जुड़ा यह आंदोलन छत्तीसगढ़ के बस्तर तक पहुंचा, स्थानीय लोगों में स्वतंत्रता की चेतना जागी । इतिहास कार डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र की मानें तो 1907 में राय पुर के टाउन हॉल में पहली बार वंदे मातरम गीत गाया गया था।पं.रविशंकर शुक्ला के नेतृत्व में सैकड़ों लोग आयोजन में शामिल हुए थे। डॉ. मिश्र ने 2008 में राज्यपाल को प्रस्ताव दिया था कि टाउन हॉल का नाम ‘वंदेमातरम भवन’ रखा जाए क्योंकि यह राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक गायन का साक्षी रहा है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत
का नाम ही गायब....


छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वें साल पीएम मोदी ने नवा रायपुर में बने विधान सभा भवन का उद्घाटन के दौरान पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति का भी अनावरण किया। इस मौके पर सियासत ने जोर पकड़ लिया, शिलापट्ट पर नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत का नाम न होने पर कांग्रेस,भाजपा पर छोटी सोच का आरोप लगाया। जब कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने 2020 में इसकी नींव रखी थी तब नेता प्रति पक्ष धरमलाल कौशिक का नाम भी पट्टिका पर दर्ज किया गया था। छग विधान सभा के नवीन भवन के लोकार्पण शिलापट्ट पर पी एम मोदी, राज्यपाल रमेन डेका, लोस अध्यक्ष ओम बिरला सीएम विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह का नाम है, तिथि में शनिवार 1 नवंबर 2025 अंकित है लेकिन इसमें से विपक्ष के नेता डॉ चरणदास महंत का नाम गायब है।दूसरी तरफ नवीन विधानसभा भवन की भूमि पूजन कार्यक्रम में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार द्वारा 23 अगस्त 2020 को भूमि पूजन कराया गया था जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी मुख्य अतिथि थे। इस शिलापट्ट में बतौर सीएम भूपेश बघेल,विस अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत, लोक निर्माण विभाग के मंत्री ताम्रध्वज साहू, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे,विस उपाध्यक्ष मनोज मंडावी के नाम शामिल थे।
प्रमोटी आईपीएस पर
साय सरकार को भरोसा...
छग में क़ानून व्यवस्था प्रमोटी आईपीएस के ही भरोसे चल रही है, विष्णु देव सरकार ने प्रमोटी अफसरों पर भरोसा कर राज धानी रायपुर, बिलासपुर , दुर्ग,अंबिकापुर जैसे बड़े जिलों की कमान दी है, अनुभवी होने के चलते कई जिलों की क़ानून व्यवस्था ठीक-ठाक भी है, यह बात और है कि इससे डायरेक्ट आईपीएस बने कुछ अफसर नाराज भी हैं, हाल ही में नई राजधानी के एक पुलिस कार्यक्रम के बाद कुछ सीधे आईपीएस बने अफसरों की गोपनीय बैठक लेने की भी खबर है इस बैठक में कुछ ऐसे अफसर शामिल थे जो पहले एसपी रह चुके हैं...! विष्णु देव की छ्ग में सरकार बनने के बाद प्रमोटी आईपीएस को जिलों की लगातार जिम्मेदारी देने का सिलसिला जारी है, हाल ही में जारी तबादला सूची में भी 2 जिलों की कमान भी प्रमोटी अफसरों को दी गई है,आज की स्थिति में प्रमोटी आईपीएस लाल उम्मेद सिंह रायपुर,विजय अग्रवाल दुर्ग, रजनेश सिंह बिलासपुर, सूरज सिंह परिहार कोरिया, धर्मेंद्र सिंह छवई कबीरघाम,विजय पांडे जांजगीर,राजेश अग्रवाल अंबिकापुर,शशि मोहन सिंह जशपुर प्रशांत ठाकुर सूरजपुर, पंकज चंद्रा कोंडागांव, प्रफुल्ल ठाकुर सक्ति, रवि कुर्रे बैकुंठपुर में बतौर एसएस पी या एसपी पदस्थ हैं।
और अब बस.....
0 बिहार विस में भाजपा -जेडीयू की सरकार फिर बन रही है,कांग्रेस-आरजे डी की बुरी हार चर्चा में है।
0अहमदाबाद में छत्तीसगढ़ को 33 हजार 321 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं,15 हजार रोजगार का मार्ग खुल गया है।
0छग की लोक संस्कृति, परंपरा, कला ने अमेरिका की धरती पर अपनी चमक बिखेरी। सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय दूतावास में राज्य स्थापना दिवस का भव्य आयोजन किया गया।
0छग के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने माओवादी हिड़मा हिड़मा, बारसे देवा की बुजुर्ग माताओं से मुलाकात की,बेटों को आत्म समर्पण कराने का अनुरोध किया।
0भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा है..... 'भाजपा सरकार लगातार छग की संपदा को लुटाने का काम कर रही है। भयंकर विरोध के बावजूद धरमजयगढ़ खदान अडानी समूह को आवंटित कर दी है।
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