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18th June 2026

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लोक संचेतना फाउंडेशन : नगर में कोई चौराहा, पार्क या मूर्ति स्व. रतनलाल मालवीय की होनी चाहिए

Praveen Nishee Sat, Sep 20, 2025

मनेन्द्रगढ। एमसीबी। नगर में कोई चौराहा, पार्क या मूर्ति स्व. रतनलाल मालवीय की होनी चाहिए, मालवीय जी भारत की संविधान सभा के सदस्य थे यह हमारे नगर के लिए गौरव की बात है, नगर के जनप्रतिनिधियों को इस बारे में विचार करना चाहिए

विगत दिवस विश्वकर्मा फर्नीचर में लोक संचेतना फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कवि गोष्ठी में अपनी बात कहते हुए नगर के कवि नारायण तिवारी ने कहा कि दिवस कमजोरों का मनाया जाता है जैसे महिला दिवस, विकलांग दिवस इसी तरह हम हिन्दी दिवस मनाते हैं जो हिन्दी पट्टी के लिए शर्मिन्दा करने वाली बात है, इसके बाद उन्होंने ने अपनी कविता पढ़ी- "मेरे एक शिष्य ने पूछा

आम आदमी सुनाई देता है

आम रास्ता दिखाई देता है

लेकिन आम आदमी का नेता

न दिखाई देता है और न सुनाई देता है"

लोक संचेतना फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राधेश्याम शर्मा के मुख्य आतिथ्य में व कमल किशोर विश्वकर्मा के संयोजन में आयोजित कवि गोष्ठी की अगली कड़ी में पुष्कर तिवारी ने अपनी क्षणिका पढ़ी - "राखी सावंत, बाबा रामदेव के पीछे पड़ी है/बाबाजी उसे अभी तक नहीं बोले हैं

इसलिए सद्भावना बढ़ी है"

इसी तारतम्य में परमेश्वर सिंह मरकाम ने छत्तीसगढ़ी भाषा में सुमधुर गीत प्रस्तुत किए इसके बाद कवि राजेश बुंदेली ने अपनी रचना पढ़ी - "वाह मेरे रामलाल, क्या जीवन जी रहे हो

सत्ता में हो तो, कंबल ओढ़कर घी पी रहे हो"

अगली कड़ी में कासिम फूलवाला ने कहा -"क्या लिखे कलम कोई,

क्या जुबां करे बयां

तेरी शान-ए-हिन्दोस्तां

तेरी आन-ए-हिन्दोस्तां"

इसके बाद लोक संचेतना फाउंडेशन के संरक्षक व क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद मिश्र ने आदमी के स्वार्थी स्वभाव पर कटाक्ष करते हुए कहा -" आदमी की जात को लजाई रहा आदमी,

आग से खेलने का कैसा जुनून है,

कि अपने ही घर को जला रहा आदमी"

डॉ राधेश्याम शर्मा ने भारत भूमि की वंदना में एक मधुर गीत प्रस्तुत किया

कार्टूनिस्ट व व्यंग्यकार जगदीश पाठक ने अपना व्यंग्य प्रस्तुत किया -" गाड़ियां, गाड़ी नहीं ड्रायवर के इशारे पर चलने वाला डब्बा होता है"

इसी क्रम में छंदबद्धता के लिए प्रतिबद्ध बालकृष्ण गौतम ने बेटी के लिए अपनी रचना पढ़ी -" मत मार मुझे नहीं बोझ बनूं

घर को खुशहाल दूंगी

किलकारी से घर आंगन में

सुख की चादर आज बिछा दूंगी"

इसी तारतम्य में श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने तीन ताल सुनाई तो वहीं नगर के गायक व अध्यक्ष ग्रीन वैली फाउंडेशन नरोत्तम शर्मा ने गीत प्रस्तुत किए

इसके बाद गिरीश तिवारी ने अपना गीत प्रस्तुत किया

"मैं हूं निर्झर, मैं तो हर पल बढ़ता जाता हूं, पत्थर के हिय से फूटा, पर्वत के सिर से छूटा, हरदम बढ़ता जाता हूं"

इसके अंतिम कड़ी में हसदेव धारा साहित्य व कला मंच के संस्थापक सदस्य व नगर के फोटोग्राफर मृत्युन्जय सोनी ने बेटे को संबोधित करते हुए अपनी रचना पढ़ी -" इतने भले भी मत बनना, जितना सड़क किनारे आम का पेड़ होता है/हर आता जाता

छाया में आराम भी करता है

और पत्थर मारकर, आमों से झोला भी भर लेता है

कार्यक्रम के अंत में विश्वकर्मा फर्नीचर के संचालक कमल किशोर विश्वकर्मा ने सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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