जड़ी बूटी दिवस पर : आयुर्वेद एवं योग विशेषज्ञों ने औषधिय पौधों के गुणों के बारे में बताया
Praveen Nishee Sat, Aug 2, 2025
मनेद्रगढ़। एमसीबी। आयुर्वेद एवं योग के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने एवं लोगों को उत्तम स्वास्थ्य देने के लिए समर्पित आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ पूर्णिमा सिंह एवं पतंजलि योग समिति के जिला योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय ने 4 अगस्त को , राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने वाले जड़ी बूटी दिवस पर विभिन्न औषधीय पौधों पर अपना विचार व्यक्त किया है। डॉ पूर्णिमा सिंह का कहना है कि - जुलाई 2021 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश को हर्बल राज्य के रूप में नामित किया गया था यह पहचान राज्य के औषधीय पौधों के संसाधनों की विशाल संपदा एवं ग्रामीण समुदाय के द्वारा जड़ी बूटियां को आत्मसात करने के कारण दिया गया है ।छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों की विस्तृत श्रृंखला का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि - महुआ ,तेंदू, बीजा ,साल आदि पेड़ों का उपयोग पारंपरिक रूप से आदिवासी समुदाय द्वारा स्वास्थ्य सेवा एवं जीवकोपार्जन में किया जाता रहा है। डॉ पूर्णिमा ने चिरायता, अश्वगंधा ,शतावरी जैसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के बारे में बताया कि पौधे शरीर के इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ शरीर में व्याप्त रोगों को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखते हैं। औषधीय पौधों में दहिमन पेड़ों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कभी पेंड्रा के जंगलों में कभी बहुतायत में पाए जाने वाला दहीमन वृक्ष, अब विलुप्ति के कगार पर है, इस वृक्ष के बारे में यह मान्यता है कि किसी भी जहर, नशा ,उच्च रक्तचाप मात्र इसकी छाया में खड़े होने से नष्ट हो जाता है। छत्तीसगढ़ के और कई औषधि पौधों की विलुप्ति की चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा-आज छत्तीसगढ़ में मैदा छाल, दहिमन, चित्रक, अर्जुन ,बच, मड़िया आदि औषधि पौधे तेजी से नष्ट हो रहे हैं। चित्रक, सदाबहार झाड़ी के रूप में होता है जो सफेद दाग त्वचा रोगों और भूख बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है। इसी तरह अर्जुन सर्पगंधा ,गरुड़ शिवनाक आदि भी विलुप्ति की कगार पर है। लोगों को इन औषधि पौधों के महत्व को समझकर उनके संरक्षण हेतु पहल किया जाना चाहिए। पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी एवं वरिष्ठ योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय ने कहा कि -जड़ी बूटियां का उपयोग सदियों से भोजन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के रूप में किया जाता रहा है यह समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण साथ कोशिकाओं के पुनर्निर्माण की अद्भुत क्षमता होती है. उन्होंने हर आंगन में तुलसी के पौधे, होना चाहिए इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट एवं तनाव अवसाद को दूर करने की अद्भुत क्षमता होती है इसके साथ ही घृतकुमारी ,आंवला गिलोय ,पत्थरचट्टा ,नीम ,अकरकरा ,निर्गुंडी अश्वगंधा ,जैसे जड़ी बूटियां के उपयोग करने के बाद कही। उन्होंने सहजन ,अर्जुन वृक्ष, हरसिंगार ,मुलेठी तुलसी, पुदीना, सौंफ, भृंगराज और आंवला के गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि- गिलोय से जहां इम्यूनिटी बढ़ती है वहां प्लेटलेट्स एवं अर्थराइटिस डायबिटीज़ एवं मोटापे एवं क्रॉनिक अस्थमा में यह अत्यंत उपयोगी होता है। एमसीबी योग सेवा समिति के जिला अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने बताया की समिति के माध्यम से जड़ी बूटी का विस्तार करते हुए अभी तक सैकड़ो व्यक्तियों को औषधि जड़ी बूटियां का वितरण किया जा चुका है एवं सरस्वती शिशु मंदिर के खेल प्रांगण में प्रतिदिन लगने वाले योग कक्षा में भी विभिन्न औषधियों के गुणों के बारे में समय-समय पर बतलाया जाता है। उन्होंने अपना संपर्क नंबर जारी करते हुए बताया कि जो औषधीय पौधों के साथ योग एवं प्राणायाम को अपने दैनिक दिनचर्या में आत्मसात करना चाहते हैं वे 9300091 563 में संपर्क कर सकते हैं।
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