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वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे ने : डीजीपी अरुण देव गौतम को भेंट की पुस्तक “छत्तीसगढ़: अतीत से अब तक”

Praveen Nishee Wed, Dec 10, 2025

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम को वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे के द्वारा अपनी छठवीं पुस्तक “छत्तीसगढ़: अतीत से अब तक” की प्रति भेंट की। पुस्तक प्राप्त करने के बाद डीजीपी गौतम ने लेखक द्वारा राज्य के इतिहास, संस्कृति और विकास यात्रा को समाहित करने के प्रयास की प्रशंसा की एवं भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

डीजीपी गौतम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अभयपुर गांव के निवासी हैं। उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय में प्राप्त करने के बाद उन्होंने दसवीं-बारहवीं राजकीय इंटर कॉलेज इलाहाबाद से तथा बी.ए. (आर्ट्स) और एम.ए. (राजनीति विज्ञान) इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूर्ण किया। इसके बाद उन्होंने जेएनयू, दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एम.फिल की उपाधि हासिल की।

उच्च शिक्षा के बाद यूपीएससी उत्तीर्ण कर वे 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। 12 अक्टूबर 1992 को सेवा जॉइन करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग मध्यप्रदेश में प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में हुई। उन्होंने सीएसपी बिलासपुर, एसडीओपी कवर्धा, एडिशनल एसपी भोपाल, तथा 23वीं बटालियन के कमांडेंट के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया।

एसपी रहते हुए उनकी पहली जिम्मेदारी भोपाल जिला रही।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर चुना। यहां वे कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जिलों के एसपी रहे। डीआईजी के रूप में उन्होंने पुलिस मुख्यालय, सीआईडी, वित्त, योजना, प्रशासन और सीएम सुरक्षा शाखा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नक्सल प्रभावित राजनांदगांव में 2009 के हमले के बाद उन्हें विशेष रूप से जिले की कमान सौंपी गई।

झीरम घाटी कांड (25 मई 2013) के बाद वे बस्तर रेंज के आईजी बनाए गए। उसी वर्ष नवंबर–दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों को सफलतापूर्वक और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

वे रेलवे, प्रशिक्षण, भर्ती, यातायात, छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स एवं बिलासपुर रेंज के आईजी भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे गृह सचिव, जेल, परिवहन, नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक तथा संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

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