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7th April 2026

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प्राकृतिक रहस्य का एक और पन्ना...    छत्तीसगढ़ का तातापानी

वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..*(कॉलम 20 सालों से लगातार) : न जाने कौन से दरबार का 'दिया' समझ बैठे हैं लोग.... जिसका दिल चाहता है 'जला' कर चला जाता है....

Praveen Nishee Fri, Feb 6, 2026

छत्तीसगढ़ के फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास तेज है, जंगल की कटाई जारी है, बस्तर के अबूझमाड़ को बूझने का अब प्रयास तेज हो गया है, छ्ग राज्य के पहले आईएएस,आईपीएस और आईएफएस कौन हैं... और अब गरीबों के लिये बनाये गये 128 आवास गृहों एक होटल को बेचने का मामला भी चर्चा में है....?

छ्ग का फेफड़ा भी

अब असुरक्षित.....हसदेव अरण्य को ‘मध्य भारत के फेफड़ों’ के रूप में जाना जाता है।विशालकाय पेड़ों का ये जंगल 01लाख 70 हज़ार हेक्टेयर में फैला हुआ है। यहाँ 23 कोयले के ब्लाक हैं,जहां अनुमति दी गयी है, कोयले खनन हेतु पेड़ काटने का सिलसिला जारी है, कोयले की ‘ओपन कास्ट’ या खुली खदानें इस जंगल को निगलती जा रहीं हैं।जंगलों के साथ- साथ 54 गांवों पर भी ख़तरा मंडराता जा रहा है।सरगुजा स्थित हसदेव का जंगल मप्र, झारखण्ड़, छत्तीसगढ़ के केंद्र का सबसे बड़ा जंगल है वहीं छत्तीसगढ़ का फेफड़ा माना जाता है, इस जंगल के भूगर्भ में बड़ी मात्रा में कोयला पाया गया है।इस क्षेत्र में परसा,केते समेत कुछ क्षेत्र कोयला कम्पनी को खनन के लिये दिया गया है।अभी तक हस देव क्षेत्र से लाखों पेड़ काटे जा चुके हैं।आदिवासी लगा तार विरोध कर रहे हैं। पऱ कोयला कम्पनी राजनीतिक तौर पर काफ़ी मजबूत है, इसलिए आदिवासियों की आवाज सख़्ती से दबाई जा रही है? वैसे पिछली बघेल सरकार ने पेडोँ की कटाई का भी आदेश निकला था, तब के डिप्टी सीएम टी एस सिंहदेव के विरोध के चलते पेडों की कटाई रोक दी गई थी,लिखित में कोई आदेश सरकार की तरफ से नहीं किया गया था। छ्ग में विष्णु सरकार बनने के बाद फिर पेड़ों की कटाई में तेजी आई है जबकि सीएम विष्णुदेव साय,आदिवासी मामलों के मंत्री रामविचार नेताम भी सरगुजा निवासी हैं, साथ ही आदिवासी समाज से ही आते हैं। यहां यह बताना भी जरुरी है, हसदेव अरण्य में ही रामगढ है,जहाँ रामगढ़ी की पहाड़ी भी है। मान्यता है अपने 14 साल के वनवास के दौरान राम लक्ष्मण और सीता ने इस इलाक़े में, ख़ास तौर पर रामगढ़ी की पहाड़ी पर पड़ाव डाला था।ये वो जगह भी है जहां कभी महाकवि कालिदास ने मेघदूत की रचना की थी!

अबूझमाड़ का होगा

अब सर्वेक्षण.....

छग सरकार ने नक्सलियों के गढ़ रहे अबूझमाड़ क्षेत्र के 5 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक हिस्से के मान चित्रण के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) के साथ एक समझौता पर हस्ताक्षर किए हैं। घने जंगलों, नक्सली गतिविधियों के कारण यह अब तक आधिकारिक मान चित्रों से बाहर रहा है। सीएम विष्णुदेव साय ने बताया कि नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद आईआईटी -रुड़की के साथ समझौता किया गया है। मानचित्रण का कार्य 2030 तक पूरा होने की संभावना है, हालांकि सरकार पहले पूरा करने का प्रयास करेगी।अबूझमाड़ क्षेत्र का पहले कभी सर्वेक्षण नहीं किया गया था, लेकिन अब सर्वे कर सभी प्रशासनिक सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी।अबूझमाड़ लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जहां न सड़कें हैं और न ही गांवों का कभी सर्वेक्षण हुआ है।

छ्ग का पहला आईएएस,आईपीएस

और आईएफएस कौन........

छत्तीसगढ़ में में वर्तमान में प्रशासनिक मुखिया 1994 बैच के आईएएस विकास शील हैं, पुलिस विभाग के मुखिया 1992 बैच के आई पी एस अरुणदेव गौतम हैं।अब चर्चा करें छत्तीसगढ़ राज्य में पहला आई एएस आईपीएस और आईएफएस कौन बना यानि जिसे छग कैडर मिला हो...?मप्र:कॉडर से छग काडर में आने वाले राष्ट्रीय सेवा के अफसर तो कई थे पऱ सवाल उठा कि पहला आईएएस,आईपीएस आईएफएस कौन था..?जाहिर था कि राज्य बनने के बाद 2001 बैच में जो सीधी भर्ती से आईएएस /आईपी एस/आई एफएस पहला बना हो वही पहला कहलाएगा। जांच के बाद पता चला कि छग में पहली 2001 बैच की आईएएस शहला निगार हैं।बिहार में 31 मार्च 1973 को जन्मी एम फिल (राजनीति शास्त्र)हैं तो 2 सितंबर 2001 को आईएएस में चयन हुआ, 2001 बैच आबंटित हुआ,इन के बाद 2002 बैच के 07 आईएएस बने जिसमें रोहित यादव,कमलप्रीत सिंह,(बृजेशचंद्र मिश्रा, हेमंत पहारे, दिलीप वासनीकर, अमृत खलखो, आलोक अवस्थी (सभी प्रमोटी आईए एस)शामिल थे।2003 बैच में अविनाश चंपावत,रितु सेन, परदेशी कोमल सिद्धार्थ, रीना बाबा कंगले शामिल हैं इस तरह 2001से 2003 के बीच शहला, रितु और रीनाबाबा 3 महिला आईएएस छग कॉडर में आई थीं।छ्ग कॉडर बनने के बाद मप्र काडर छोड़कर आने वालों में तो आईपीएस श्री मोहन शुक्ला,पीके दास, आरएलएस यादव, अशोक दरबारी,ओपी राठौर, आरएन उपाध्याय, डी एमअवस्थी गिरधारी नायक,मो.अंसारी, संजय पिल्ले, आरके विज, अशोक जुनेजा,मुकेश गुप्ता आदि कई बड़े नाम हैं।जिनमें से कई डीजीपी,डीजी भी बन चुके हैं पर छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहला आईपीएस कौन था जिसे सीधे छग कॉडर मिला,छग में पहले आईपीएस बनने वाले डॉ.आनंद छाबड़ा हैँ। 2001बैच के आईपीएस 17 जनवरी 1976 को पंजाब में जन्में हैं।एमबीबीएस डॉ. आनंद छाबड़ा 2 सितंबर 2001 को आईपीएस ज्वाईन किया,2001 बैच इन्हें मिला।वर्तमान में एडीजी हैं। छाबड़ा के बाद 2002 बैच में के सी अग्रवाल (प्रमोटी) 2003 बैच में 5 आईपीएस अफसर वरिष्ठता क्रम में सुंदरराज पी, ओपी पाल, रतनलाल डांगी, एसएस सोरी, टीआर पैकरा शामिल हैं, 2004 बैच 5 आईपीएस को छग कॉडर सीधे मिला, जिसमें नेहा चंपावत,अभिषेक पाठक, अंकित गर्ग,अजय यादव, बद्रीनारायण मीणा शामिल हैं। 12 आईपीएस में नेहा चंपावत को छग की पहली महिला आईपीएस होने का गौरव प्राप्त है।अजय यादव को पहला छत्तीसगढिय़ा (बस्तर में जन्म) होने का गौरव प्राप्त है।छग में जन्में वन विभाग के पूर्व मुखिया राकेश चतुर्वेदी मप्र के 1985 बैच के आईएफएस थे। छग से पहले आईएफएस बनने का भी रिकार्ड उनके नाम बना था। छग राज्य में केरला मूल की परणिता पाल (जन्म 21जून1975 जून ) एमएस सी (फारेस्टी) पहली आईएफएस बनने का सौभाग्य हासिल किया वहीं इसी 2001 बैच के राकेश कलाजे,शालिनी रैना, मो. शाहिद, जनकराम नायक अभय श्रीवास्तव, 2002बैच के सोमादास, राजेश कुमार पांडे, सुरेश प्रसाद पैकरा,भानुप्रताप सिंह, सोबरन सिंह कंवर 2003 बैच के राजेश कुमार चंदेले अनुराग श्रीवास्तव,एफजे टोप्पो शामिल हैं। वैसे राज्य बनने के बाद जनकराम नायक पहले छत्तीसगढिय़ा है जिन्हें आईएफएस का एवार्ड मिला था।

गरीबों के 128 आवास

होटल मेकफेयर समूह को.....नवा रायपुर अटल नगर में आर्थिक रूप से कमजोर, निम्न आय वर्ग के लिए बनाए गए आवास अब बड़े निजी समूहों के हाथों में जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल ने सेक्टर- 16 में पीएम और सीएम आवास योजना के तहत निर्मित एलआईजी श्रेणी के 2 आवासीय ब्लॉक एक साथ मेफेयर होटल समूह को बेच दिए गए हैं।कुल 128 फ्लैट का सौदा लगभग 16 करोड़ रुपये में हुआ है,जो प्रति फ्लैट कीमत करीब 12.66 लाख तय है।यह फैसला सवालों में है क्योंकि ईडब्ल्यूएस, एल आइजी श्रेणी के मकान मूल रूप से निर्धारित आय वर्ग के जरूरतमंद हितग्राहियों के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे आवासों पर शासन की ओर से अनुदान और रियायतें भी इसी उद्देश्य से दी जाती हैं, कमजोर वर्ग को सस्ता आवास मिल सके। अब इन्हीं फ्लैट का एक साथ एक बड़े होटल समूह को विक्रय होना आवासीय नीतियों की मंशा पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर रहा है।जानकारी के अनुसार सेक्टर-16 में बड़ी संख्या में एलआईजी फ्लैट पहले ही बिक चुके हैं, लेकिन अब 400 से अधिक आवास खाली हैं। गृह निर्माण मंडल फरवरी से नई बुकिंग प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। इसी तरह सेक्टर-34 में भी फ्लैट्स के बल्क विक्रय की जानकारी सामने आई है, सेक्टर-27 में अविक्रित दुकानों और हाल का विक्रय किया गया है। गृह निर्माण मंडल ने वर्ष 2025 में कुल 4,689 संपत्तियों की बिक्री कर 1,022 करोड़ रुपये की आय दर्ज की। इनमें लगभग 70% आवास कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए निर्मित थे।वन टाइम सेटलमेंट योजना के तहत 30% तक की छूट देकर 1,452 संपत्तियां बेची गईं, जिनकी कीमत 220 करोड़ ₹ रही।गृह निर्माण मंडल के अधिकारियों का कहना है कि इन फ्लैटों के लिए 3 बार विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन अपेक्षित संख्या में खरीदार नहीं मिले। बाद शासन स्तर पर नियमों में संशोधन कर अविक्रित संपत्तियों के थोक में विक्रय की अनुमति दी गई। मंडल का दावा है कि इस तरह बेचे गए फ्लैट पर किसी भी प्रकार का शासकीय अनुदान लागू नहीं होगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि योजना का मूल उद्देश्य ही कमजोर वर्ग को आवास उपलब्ध कराना था। यदि मांग कम थी तो हित ग्राहियों की पात्रता शर्तों में राहत या भुगतान की सरल व्यवस्था जैसे विकल्प तलाशे जा सकते थे, न कि आवासों को थोक में निजी संस्थाओं को सौंप दिया जाए।

चर्चित डी एस पी

कल्पना निलंबित,

छत्तीसगढ़ शासन ने दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में गृह विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।प्रारं भिक जांच में उनके खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने के बाद शासन ने यह कार्रवाई की है,शिकायत की प्राथमिक जांच में डीएसपी कल्पना वर्मा पर वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप,जांच के दौरान दिए गए कथनों, व्हाट्सएप चैट में विरोधाभास,कर्तव्य के दौरान अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त करने,अपने पद का दुरुपयोग करने, अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। शासन ने इन कृत्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम,19 65 के नियम-3 के विपरीत माना है।

और अब बस......

0छग के चर्चित पोराबाई नकल प्रकरण में 18 साल बाद चार दोषियों को अदालत ने 5 साल की कठोर और जुर्माने की सजा सुनाई, 500 में से 484 अंक लाने वाली पोराबाई का मामला 2008 का है।

0 कवर्धा में 7 करोड़ का धान चूहे और कीड़ों द्वारा खाने का बयान देने वाले डीऍमओ अभिषेक मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है।

0 सशर्त जमानत पऱ रिहा पूर्व शराब मंत्री क़वासी लखमा का फिलहाल ठिकाना ओड़िसा का मलकानगिरी होगा.....

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