छत्तीसगढ़ के इतिहास में सरगुजा स्टेट सदा अग्रणी रहा- इतिहासकार गोविंद : सरगुजा राज घराने की एनसाइक्लोपीडिया उपाधि प्राप्त इतिहासकार गोविंद शर्मा का हुआ मनेद्रगढ़ प्रवास
Praveen Nishee Wed, Sep 2, 2026
मनेन्द्रगढ। एमसीबी। सरगुजा रियासत के जानकार,इतिहास मर्मज्ञ, सरगुजा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के पूर्व प्रबंधक गोविंद शर्मा का मनेद्रगढ़ प्रवास पर , विजय नर्सरी स्कूल में सेंगर परिवार द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
सरगुजा रियासत और पैलेस से जुड़े अंबिकापुर निवासी गोविंद शर्मा, ने छत्तीसगढ़ के इतिहास में सरगुजा स्टेट की प्राचीन गौरवशाली प्रमाणित इतिहास के इतनी जानकारी हैं कि लोग इन्हें सरगुजा राजघराने के एनसाइक्लोपीडिया के रूप में जानते हैं।
वार्ड नंबर 10 निवासी वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय के पारिवारिक संबंधों के निर्वहन हेतु आए इतिहासकार गोविंद शर्मा के सम्मान समारोह में - विजय नर्सरी हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रबंधक श्रीमती इंद्रा सेंगर,संजय सेंगर, वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव पतंजलि योग समिति के जिला योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय, पुष्कर तिवारी, दैनिक समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ विनय पांडे, धार्मिक चिंतक सत्यनारायण शर्मा सतिया महाराज, महेंद्र सिंह, सुरेश सिंह, डॉ मृदुला सिंह, तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष परमेश्वर सिंह आदि उपस्थित थे।
सरगुजा पैलेस एवं रियासत के गौरवशाली इतिहास के जानकारी गोविंद शर्मा ने कहा कि- छत्तीसगढ़ के इतिहास में सरगुजा स्टेट का नाम केवल एक रियासत के रूप में नहीं बल्कि आधुनिक प्रशासन तकनीकी विकास और जन कल्याणकारी शासन व्यवस्था के अग्रदूत के रूप में लिया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिस दौर में अधिकांश रियासत थे पारंपरिक शासन पद्धति में उलझी हुई थी उसे समय हिज हाइनेस महाराजा रामानुज शरण सिंह देव ने राज्य को आधुनिकता की दिशा में आगे बढ़ने का कार्य किया उन्होंने प्रशासनिक विकेंद्रीकरण शिक्षा संचार विद्युत व्यवस्था और हवाई सेवाओं जैसी अनेक योजनाओं की नींव रखी जिनका प्रभाव आज भी दिखाई देता है।
सरगुजा स्टेट के लोकतांत्रिक सोच पर उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता से पहले ही सरगुजा स्टेट में शासन के विकेंद्रीकरण की शुरुआत हो चुकी थी ।वर्ष 1936 में राज्य के अधिकारों के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य सरगुजा स्टेट एडवाइजरी काउंसिल की स्थापना की गई सेयह उस समय की रियासतों के लिए अत्यंत प्रगतिशील कदम था।
अंबिकापुर निवासी सरगुजा रियासत के एनसाइक्लोपीडिया की उपाधि प्राप्त सुप्रसिद्ध इतिहासकार गोविंद शर्मा ने महाराजा रामानुज शरण सिंह देव की शिकार गाथा की संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि -महाराज रामानुज शरण सिंह देव ने केन्या अफ्रीका में बुलावे पर आतंकी गेंडे का शिकार किया था।
सरगुजा रियासत की और जानकारी देते हुए गोविंद शर्मा ने बताया कि वर्ष 1914 में ही सरगुजा स्टेट के 22 स्थानों को पोस्ट एवं टेलीग्राफ सेवा से जोड़ दिया गया था. उस समय यह व्यवस्था किसी आधुनिक प्रशासनिक नेटवर्क से कम नहीं थी इसके माध्यम से राज्य में कानून व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराया जाता था।
महाराजा रामानुज शरण सिंह देव स्वयं प्रतिदिन प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेते थे एवं सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे के बीच आम नागरिकों से सीधे बात करते थे सरगुजा स्टेट की तकनीकी ज्ञान की जानकारी देते हुए इतिहासकार शर्मा ने बताया कि सरगुजा स्टेट ने तकनीकी विकास में उस समय काफी तरक्की कर ली थी। वर्ष 1914 में एशलर खिलेश कर और गांगुली तीन कंपनियों द्वारा डीजल मिट्टी तेल पेट्रोल तथा भाप से चलने वाला जनरेटर आधारित पावर हाउस भी स्थापित किया गया था सरगुजा स्टेट की प्रशासनिक परंपरा की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि सरगुजा राज घराने के मदनेश्वर शरण सिंह देव ने आई ए एस परीक्षा उत्तीर्ण कर अमरावती में प्रोविजन के बाद छतरपुर और रतलाम में कलेक्टर के रूप में कार्य किया और बाद में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव बने ।इसी प्रकार देवेंद्र कुमारी सिंहदेव विधायक बनने के बाद प्रकाश चंद्र सेठी मंत्रिमंडल में विविध आवास एवं पर्यावरण तथा पंजीयन विभाग के मंत्री रहीं। बाद में अर्जुन सिंह मंत्रिमंडल में लघु एवं मध्यम सिंचाई मंत्री भी बनी वर्तमान में टी एस सिंह देव जिन्हें लोग सम्मान से टी एसबाबा कहते हैं सरगुजा राज परिवार की जन सेवा परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
मनेद्रगढ़ के 28 करोड़ वर्ष पुरानी मेरीन फॉसिल्स के प्रश्न पर उन्होंने बतलाया कि इस क्षेत्र में सर्वे के पश्चात और फासिल्स प्राप्त होने की संभावना है उन्होंने फासिल्स का क्षेत्र महाराजपुर जगतपुर एवं नागपुर के ग्रामीण क्षेत्र के नदी तटीय क्षेत्र का उल्लेख किया।
72 वर्षीय इतिहासकार गोविंद शर्मा के मनेद्रगढ़ आगमन पर नगर के साहित्यकारों समाजसेवियों ने । सम्मान समारोह के दौरान गोविंद शर्मा ने सरगुजा राजघराने की कई विशेषता एवं प्राचीन धार्मिक आख्यानों से परिचय कराया।छत्तीसगढ़ में सरगुजा रियासत की सांस्कृतिक परंपरा लोकगीत साहित्य संगीत सहित एवं छत्तीसगढ़ के इतिहास में सरगुजा रियासत की योगदान की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

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