3-4 दिन तक नहीं पहुंच रहा पानी : एसईसीएल में पेयजल संकट से मजदूर परेशान, आंदोलन की चेतावनी
Praveen Nishee Wed, Aug 26, 2026
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति नहीं होने से श्रमिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई श्रमिक कॉलोनियों में तीन से चार दिन तक पानी नहीं पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। पुराने फिल्टर प्लांट, आवश्यक रसायनों की कमी और जल वितरण व्यवस्था में प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव को इसकी प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के सहायक महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने एसईसीएल के निदेशक मानव संसाधन को पत्र लिखकर कंपनी की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा कर स्वच्छ एवं नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
उस्मानी ने कहा कि एसईसीएल के कई फिल्टर प्लांट काफी पुराने हो चुके हैं और उनके जीर्णोद्धार अथवा तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता है। प्लांटों में एलम, ब्लीचिंग पाउडर, क्लोरीन और लाइम जैसे आवश्यक रसायनों की समय पर खरीदी नहीं हो रही है। वहीं प्रेशर फिल्टरों का मीडिया भी समय पर नहीं बदला जा रहा है। जल वितरण का काम ठेकेदारी के माध्यम से कराया जा रहा है, लेकिन प्रभावी नियंत्रण और मॉनिटरिंग के अभाव में पानी की आपूर्ति निर्धारित समय तक नहीं हो पा रही है।
पांच साल से लंबित है हसदेव जल योजना
उस्मानी ने बताया कि हसदेव क्षेत्र में वर्ष 1988 में स्थापित एकीकृत जल प्रदाय योजना के जीर्णोद्धार की योजना सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) द्वारा तैयार की जा चुकी है। इस योजना को तैयार कराने के लिए एसईसीएल करीब पांच वर्ष पहले 17 लाख रुपये का भुगतान भी कर चुका है, लेकिन विशेषज्ञों द्वारा तैयार योजना अब तक मुख्यालय की स्वीकृति और फंड के इंतजार में लंबित है।
इसी तरह बैकुंठपुर क्षेत्र में भी फिल्टर प्लांट की योजना होने के बावजूद उसका निर्माण नहीं हो पाया है। चिरमिरी क्षेत्र में पेयजल के स्रोत के साथ-साथ फिल्ट्रेशन और वितरण व्यवस्था भी बड़ी समस्या बनी हुई है। पानी की सप्लाई के लिए स्पेयर पंप और आवश्यक स्पेयर पार्ट्स तक उपलब्ध नहीं होने की बात भी उन्होंने कही।
बिना फिल्टर पानी छोड़ने से पर्यावरण पर भी असर
उस्मानी ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर खदानों से निकलने वाले पानी को बिना पर्याप्त फिल्ट्रेशन के सार्वजनिक जल प्रवाह में छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। राजनगर आरओ, पैराधार और कुर्जा कॉलोनी में खराब हो चुके प्रेशर फिल्टरों के स्थान पर एकीकृत फिल्टर प्लांट स्थापित करने की आवश्यकता बताई गई है।
बिजली, सड़क, आवास और स्कूल बसों की समस्याएं भी गंभीर
उस्मानी ने कहा कि एसईसीएल की कॉलोनियों में केवल पानी ही नहीं, बल्कि बिजली, सड़क, सफाई, आवास और स्कूल बस जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी लगातार खराब होती जा रही है। कॉलोनी की सड़कों में गड्ढों की भरमार है और सफाई व्यवस्था भी नियमित नहीं है। उन्होंने कहा कि सिविल विभाग का करोड़ों रुपये का फंड खर्च नहीं हो पाने के कारण लैप्स होना गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
उन्होंने स्कूल बसों के संचालन में कमी, सीलिंग फैन उपलब्ध नहीं होने, लंबे समय से गमबूट और सेफ्टी शू नहीं मिलने तथा एलपीजी गैस सिलेंडर के भुगतान में कटौती जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया। कॉलोनी डिस्पेंसरी में डॉक्टरों की कमी, जर्जर आवासों और टपकती छतों के कारण मजदूर परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ते उत्पादन लक्ष्य के बीच सुविधाओं में कटौती पर सवाल
उस्मानी ने कहा कि एक ओर एसईसीएल लगातार उत्पादन लक्ष्य बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में कटौती की जा रही है। उनका कहना है कि जब मजदूरों से बेहतर उत्पादन की अपेक्षा की जा रही है तो उन्हें स्वच्छ पानी, सुरक्षित आवास, सड़क, बिजली, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो मजदूरों में बढ़ रहा असंतोष आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन से स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति, जर्जर मकानों एवं टपकती छतों की मरम्मत, स्कूल बसों के संचालन, सड़कों की स्थिति सुधारने तथा बिजली सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं का तत्काल निराकरण करने की मांग की है।

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