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ऐसे भी लोग आज भी है जो जीते है दूसरों के लिए : कड़कड़ाती ठंड में मानवता की मिसाल—डॉ. अंशुमान चौधरी ने किया 43 वां रक्तदान

Praveen Nishee Mon, Dec 1, 2025

मनेंद्रगढ़। एमसीबी। जब रात की ठंड अपने चरम पर हो और लोग घरों में बिस्तरों में दुबके हों, ऐसे समय पर मानवता फिर एक बार जीती दिखी। रात 8:45 बजे रक्त की जरूरत की सूचना मिलते ही डॉ. अंशुमान चौधरी तत्काल अस्पताल पहुँचे और स्वयं रक्तदान कर एक जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ज्ञात हो कि बीते 17 सितंबर 2025 को ही उन्होंने अपने पिताजी की पुण्यतिथि पर 42वां रक्तदान किया था। तीन महीने भी पूरे न होने के बावजूद उन्होंने स्वेच्छा से अपना 43वां रक्तदान कर यह सिद्ध किया कि मानव सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।

इस नेक कार्य में रूपेन्द्र सिंह, ब्लड बैंक प्रभारी, सेंट्रल हॉस्पिटल की भूमिका भी अनुकरणीय रही। वर्षों से शिविरों और ब्लड बैंक में निरंतर निश्छल सेवा देते आ रहे श्री सिंह के सहयोग के बिना जरूरतमंद को समय पर रक्त मिलना कठिन था। क्षेत्रवासी उनके सेवाभाव को भली-भांति पहचानते हैं, परंतु एसईसीएल प्रशासन की उदासीनता अब भी प्रश्नों के घेरे में है, जो ऐसे कर्मठ कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।

मरीज के परिजनों सहित क्षेत्र की जनता ने डॉ. अंशुमान चौधरी और रूपेन्द्र सिंह के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।
समाज और प्रशासन—दोनों को ऐसे समर्पित व्यक्तित्वों का सम्मान अवश्य करना चाहिए। ऐसा हमारा मानना है, हम इन्हें सेल्यूट करते है।

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