Advertisment

9th August 2026

BREAKING NEWS

स्काउटिंग की जिला भारत स्काउट्स एवं गाइड्स जिला संघ एम सी बी के जिला कार्यकारिणी बैठक संपन्न,

बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा स्वस्थ, संस्कारित एवं नशामुक्त समाज के निर्माण में सहभागी बने

शासकीय हाई स्कूल पिपरिया में डॉ. विनोद कुमार पांडेय की पहल से वर्षों से तैयार हो रहे सीड बॉल,

SECL के 35,800 कर्मचारियों के गैस सिलेंडर भुगतान में हर माह ₹31.88 लाख की कमी!

मनेंद्रगढ़ से अनूपपुर तक साइकिलिंग कर दिया फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति का संदेश

प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ ने : पेंशन मुद्दे पर जताई नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी

Praveen Nishee Thu, Mar 26, 2026

मनेंद्रगढ़ (एमसीबी)। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के उपप्रांत अध्यक्ष दिनेश सिंह एवं संभाग अध्यक्ष हजरत अली ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कहा है कि वर्ष 1998 में नियुक्त शिक्षकों के साथ शासन द्वारा लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान स्थिति में वर्ष 2028 तक लगभग 90 से 92 प्रतिशत शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे, जिन्हें पेंशन के रूप में एक रुपये भी प्राप्त नहीं हो रहा है। वहीं वर्ष 2035 तक लगभग सभी शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे, जिन्हें अत्यंत कम पेंशन मिलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि 30 वर्षों की सेवा के बाद 62 वर्ष की आयु में कोई शिक्षक बिना पेंशन के सम्मानजनक जीवन कैसे जी सकता है।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग के रिक्त पदों पर हुई थी और वेतन भी शिक्षा विभाग द्वारा पंचायत के माध्यम से दिया जाता था। बावजूद इसके उन्हें पंचायत कर्मी माना गया, जो समझ से परे है। वर्ष 2018 में विभाग में संविलियन के बाद भी पूर्व सेवा को शून्य मान लिया गया, जिससे शिक्षकों को भारी नुकसान हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि संघ द्वारा कई बार विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, वित्त सचिव एवं शिक्षा सचिव को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया गया है। शिक्षकों ने यह भी मांग की है कि वे सभी 2004 से पूर्व नियुक्त हैं, इसलिए उन्हें पेंशन सेवा अधिनियम 1976 के तहत पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। साथ ही, मध्यप्रदेश शासन द्वारा पूर्व में स्थानीय निकाय कर्मचारियों को संविलियन के बाद नियुक्ति तिथि से पेंशन देने का उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया।

संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 1998 से सेवा की गणना करते हुए पुरानी पेंशन लागू की जाए, ताकि शिक्षक सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

हालांकि, कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक इस विषय में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। न ही मंत्रिमंडल में चर्चा हुई और न ही संघ के प्रतिनिधियों को विचार-विमर्श के लिए बुलाया गया।

अंत में संघ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो शिक्षक बृहद आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि अब स्थिति “करो या मरो” की हो चुकी है और शासन की उदासीनता उन्हें आंदोलन के रास्ते पर धकेल रही है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें