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दो झोलाछाप डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने उनकी तलाश शुरू : झोलाछापों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, बंद हुए कई क्लिनिक – फरार हुए नकली डॉक्टर

Praveen Nishee Thu, Aug 28, 2025

अमलीपदर। गरियाबंद। पेंड्रा गांव में इलाज के नाम पर लापरवाही से एक ग्रामीण की मौत के बाद आखिरकार स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। बुधवार को फरार दो झोलाछाप डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी। इसी क्रम में डॉ. हरीश चौहान के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम ने मैनपुर, अमलीपदर और आसपास के क्षेत्रों में औचक जांच अभियान चलाया।

जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। स्वर्णाबहाल के एक हाईस्कूल शिक्षक के क्लिनिक से बीपी मशीन, स्टेथोस्कोप, सिरिंज और संदेहास्पद दवाइयाँ बरामद की गईं। सूत्रों का कहना है कि उसने अन्य दवाइयाँ और लैब उपकरण पड़ोस व स्कूल लैब में छिपा दिए। अमलीपदर स्थित अंजना बंगाली क्लिनिक समेत कई अन्य क्लिनिक अचानक ताले में बंद मिले। वहीं खडारीपारा में एक वेटनरी डॉक्टर भी इंसानों का इलाज करता है, वो भी कार्रवाई की भनक मिलते ही उसका क्लिनिक भी बंद हो गया।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि हर बार कार्रवाई से पहले झोलाछाप डॉक्टरों को खबर कैसे मिल जाती है? उनके पास महंगी और प्रतिबंधित दवाइयाँ कहां से आती हैं और भंडारण कहां होता है? और सबसे बड़ा सवाल – आखिर इन्हें संरक्षण कौन दे रहा है?

अनुमान है कि जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या एक हजार से अधिक है। बिना डिग्री और चिकित्सकीय ज्ञान के ये इलाज कर लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ औचक जांच काफी नहीं, बल्कि गिरफ्तार कर सख्त सजा देना जरूरी है, वरना कुछ दिनों बाद ये क्लिनिक फिर से खुल जाएंगे।

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