Advertisment

12th August 2026

BREAKING NEWS

हर घर तिरंगा एवं नशा मुक्त भारत अभियान के तहत भव्य जागरूकता रैली

JBCCI गठन और तत्काल वेतन वार्ता की मांग; महिला श्रमिकों ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने बच्चों को खिलाई कृमिनाशक दवा

योग शिक्षकों को एकजुट कर बनी नई जिला कार्यकारिणी, नीलू सिंह को सर्वसम्मति से जिलाध्यक्ष की कमान

PIB के वार्तालाप कार्यक्रम में कलेक्टर, मीडिया और युवाओं ने साझा किया नशामुक्त भारत का संकल्प;

वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से...{किश्त 279} : *क्या बस्तर में 70 हजार साल पहले मानव सभ्यता विकसित थी...?*

Praveen Nishee Wed, Aug 20, 2025

जगदलपुर जिले के बस्तर में 70 हजार साल पहले से मानव सभ्यता विकसित हुई थी?इस खुलासे से बस्तर के प्रागैतिहासिक काल के अभी तक ज्ञात इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया है। बस्तर वि वि एंथ्रोपोलॉजी विभाग की प्राध्यापक डॉ. सुकृता तिर्की के अनुसार जल स्रोत्रों से चाकू छीलन, छेद करने वाले औजार,तीर की नोंक,शैल चित्र और हाथ से चलाने वाले हथियार मिले हैं।बस्तर वैसे कई मामलों में लोगों की उत्सुकता का कारण बना हुआ है,वहां की जलवायु,जंगल, प्राकृतिक गुफाओँ,पुरातन सभ्यता, झरने,पुरातत्विक स्थल चर्चा में रहे हैं वहीं हाल ही खोज ने प्राचीन मानव बसाहट पर भी चर्चा शुरू कर दी है। जगदलपुर जिले के बस्तर में 70 हजार साल पहले से मानव सभ्यता विकसित हुई थी...?क्षेत्रीय कार्यालय मानव विज्ञान सर्वे क्षण,कर्मा विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी विभाग ने 5 साल की अथक मेहनत से कुछ तथ्य जुटाए हैं।इस खुलासे से बस्तर के प्रागैतिहासिक काल के अब तक के इति हास में नया अध्याय जुड़ गया है।सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण केशकाल के उपर बेड़ी गांव की चट्टानों में मिल शैलचित्र हैं।सूत्रों का कहना है,शैलचित्र के सटीक काल निर्धारण के लिए कोई लैब नहीं होने से डेटिँग कर वाना कठिन हो गया है।शैल चित्र के सटीक काल निर्धारण के लिए अब लखनऊ तक फाइलें चल रहीं हैं। पता चला है कि नवंबर में इस खोजबीन का दूसरा चरण शुरू होगा,बाद डेटिंग की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।शैलचित्र के अलावा शोधार्थियों ने अबूझमाड़, बीजापुर, सुकमा, बारसूर, दंतेवाड़ा से गुजरने वाली प्रमुख नदियों के आसपास पाषाण कालीन उपकरण तलाश लिये हैं।

डेटिंग से निर्धारित

होगा कालखंड....

मानव विज्ञान सर्वेक्षण के सूत्रों की मानें तो केशकाल के पास की पहाड़ी में जो शैलचित्र मिले हैं। सामूहिक शिकार, परिवार एवं हथेली के चित्र साफ नजर आ रहे हैं, इनकी डेटिंग हो जाएगी तो सटीक काल निर्धारण हो पाएगा। छग में ऐसी सुविधा नही होने से अब तक ऐसे शैलचित्र रहस्य ही बनकर रह गए हैं। चट्टानों की ओट में मिले शैलचित्र को मौसम एवं मानवीय दखलअंदाजी से नुकसान पहुंचने की आशंका भी है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें