वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..{कॉलम 20 सालों से लगातार } : मैंने वक्त से पूछा मेरा कसूर क्या था... वो हँसा और बोला,तूने हर किसी को अपना समझा...
Praveen Nishee Sat, Nov 22, 2025
सन 1960 यानि करीब 65 साल पहले कृष्ण चन्दर ने एक कहानी 'जामुन का पेड़' व्यंगात्मक लिखकर सरकारी अधिकारियों, नौकरशाहों के कामकाज पर तंज किया था, कमोवेश हालात आज भी नहीं सुधरे हैं,देश के कुछ प्रदेशों में सीएम,मंत्रियों की अधिकारी नहीं सुनते हैं,जहां कमजोर सीएम हैं वहाँ के हालत तो और भी ख़राब हैं..? वैसे यह कहानी आईसीएसई के पाठ्यक्रम से 2020-2021 में हटा दी गई क्योंकि इसे सरकार की आलोचना के तौर पर देखा गया।जामुन का पेड़" कृष्ण चंदर की एक प्रसिद्ध व्यंग्य कहानी है, जिसमें एक सरकारी दफ्तर की लालफीताशाही पर कटाक्ष किया गया है। कहानी एक आदमी के इर्द -गिर्द घूमती है जो तूफान से गिरते हुए जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता है। प्रशासन उसे बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई नहीं करता,फाइलें कई विभागों में इधर- उधर घूमती रहती हैं, जब तक फैसला आता है, तब तक उस आदमी की मृत्यु हो जाती है। घटना की रात के तूफान में सचिवालय के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर जाता है, उसके नीचे एक आदमी दब जाता है। माली से चपरासी, चपरासी से क्लर्क, क्लर्क से सुपरिंटेंडेंट तक सूचना पहुंचती है। लोग पेड़ को काटना नहीं चाहते, क्योंकि यह एक फलदार 'महत्वपूर्ण' पेड़ है, समस्या को हल करने के बजाय, विभिन्न अधिकारी फाइल को एक दूसरे के पास भेजते रहते हैं। फाइल क़ृषि, बागवानी, वन विभाग में घूमती रहती है,फिर दबे व्यक्ति के शायर होने का पता चलने पर संस्कृति, साहित्य अकादमी तक फाइल पहुँचती है, फिर पता चलता है,जामुन का पेड़ किसी विदेशी मेहमान ने लगाया है, तो फिर विदेश विभाग से होते हुए फाइल अंततः पीएम तक पहुंचती है। एक तरफ जहां आदमी की जान की परवाह नहीं की जाती, वहीं दूसरी तरफ दो देशों के संबंधों और पेड़ के महत्व को प्राथमिकता दी जाती है।आखिरकार, पेड़ काटने का फैसला आता है और फाइल पूरी हो जाती है, तो पता चलता है, पेड़ के नीचे दबा हुआ आदमी दम तोड़ चुका है। 'फाइल परम्परा' आज भी बदस्तूर जारी है.....?
पुलिस आयुक्त प्रणाली
की फिर सुगबुगाहट....
रायपुर में पुलिस आयुक्त प्रणाली नए साल में लागू करने को लेकर एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है।नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर सरकार और पीएचक्यू दोनों स्तरों पर मंथन जारी है। पद के लिए एडीजी या आईजी रैंक के विकल्पों पर गंभीरता से विचार हो रहा है,राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली 1 जनवरी से लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है, डीजीपी की ओर से गठित कमेटी ने अक्टूबर में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। ओडिशा,मप्र के कमिश्नरेट मॉडल को आधार बना दो विकल्प सुझाए गए थे। साथ ही दोनों मॉडलों के फायदे, चुनौतियां, स्टाफिंग पैटर्न का तुलनात्मक विश्लेषण भी इसमें शामिल है, इसके बाद ऐसी चर्चा थी, रायपुर में 1 नवंबर से पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की जाएगी, पुलिस मुख्यालय ये तय नहीं कर पाया किस स्तर अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए,उसके चलते कमिश्नर प्रणाली सिस्टम अटक गया था।अब फिर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने तैयारी शुरू हो गई है, साथ ही गृह विभाग लगातार समीक्षा में जुटा है, ताकि नए सिस्टम में किसी तरह की कमी न रह जाए,विभागीय सूत्र के अनुसार, मौजूदा एसपी- सीएसपी पैटर्न पर जिले का स्टाफ पहले से ही दबाव में है, नई व्यवस्था में बड़े रैंक के अधिकारियों की तैनाती बेहद आवश्यक मानी जा रही है,अक्टूबर में सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट था कि रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू करनेके लिए 500 से अधिक नए स्टाफ की नियुक्ति अनिवार्य होगी,इसके साथ ही कई विभागीय संरचना में बद लाव,नई शाखाओं का गठन और ट्रैफिक व्यवस्था को पुनर्गठित करना भी जरूरी बताया गया है।सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में डीजीपी कॉन्फ्रेंस के बाद आईजी और एस पी स्तर पर बड़े फेरबदल देखने को मिल सकता है, ताकि कमिश्नरेट के लिए आवश्यक प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा सके,माना जा रहा है कि रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिसिंग में तेजी, जवाबदेही, कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।
बड़ा नक्सली लीडर हिड़मा
मारा गया, कौन था...
1 करोड़ का इनामी,5 राज्यों की पुलिस जिसकी तलाश में थी,बस्तर के मूल निवासी हिदमा मंडावी, पत्नी राजे के साथ मुठभेड़ में मारा गया।कद-काठी में छोटे से दिखने वाले हिडमा का नक्सली संगठन में बड़ा नाम था। 13 साल की उम्र में संगठन में शामिल होने वाला हिदमा,नेतृत्व क्षमता, खूंखार प्रवृत्ति के चलते ही टॉप सेंट्रल कमेटी का सदस्य बना दिया गया। उसकी पर वरिश उस समय हुई जब सुकमा में नक्सली घटनायें चरम पर थीं। हिडमा दसवीं तक पढ़ा था। हमेशा कड़ी सुरक्षा में रहनेवाला हिदमा अपने साथ हमेशा एक नोट बुक लेकर चलता था, वह अपने नोट्स लिखता रहता था। 2010 में ताड़मेटला हमले में सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत में हिड़मा का नाम आया था। इसके बाद साल 2013 में झीरम हमले में भी हिडमा की भूमिका थी। इस हमले में कई बड़े कांग्रेसी नेताओं सहित 31 लोग दिवंगत हो गये थे। 2017 में बुरका पाल में हुए हमले में हिडमा की अहम भूमिका थी।इस हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गये थे। हिडमा ने फिलीपींस में गोरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग ली थी। खैर पति -पत्नी का दाह संस्कार सुकमा के पूवर्ती गांव में किया गया।
'पंडुम कैफ़े' छ्ग सरकार
की अभिनव पहल....
आप एक कैफे में बैठे हैं। आपने कॉफी ऑर्डर की है, जिसे सर्व करने एक वेटर आपकी टेबल पर आता है। आप सुकून से बैठ कॉफी पीते हैं, तभी आपको पता चलता है, जो हाथ आपकी टेबल पर कॉफी सर्व कर रहे थे, वो कभी एके-47 चलाते थे और जंगलों में आईईडी बिछाते थे।यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक नई पहल है। सीएम विष्णु देव साय ने जगदलपुर में 'पंडुम कैफ़े' का उद्घाटन कर बस्तर में सामाजिक- आर्थिक बदलाव की नई शुरुआत की है,यह कैफ़े नक्सली हिंसा के पीड़ितों, आत्मसमर्पण कर चुके लोगों को पुनर्वासित करने उन्हें सम्मानजनक आजी विका प्रदान करने की छग सरकार की अहम पहल है। 'पंडुम कैफ़े' जगदलपुर की पुलिस लाइन परिसर में खोला गया है। इसके पीछे बस्तर के आईजी सुंदरराज पी• की बड़ी भूमिका है।
और अब बस.....
0 दसवीं बार बिहार के सीएम बने नीतीश कुमार।
0रायपुर में रहनेवाले एक पूर्व मंत्री के निवास में आज भी सबसे अधिक भीड़ रहती है....।
0छग के महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राजभवन ने इस्तीफा मंजूर कर लिया है।
0 भाजपा सांसद भोजराज नाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मज़ाकिया अंदाज में कहा कि वो उस अधिकारी के नाम से नींबू काटेंगे जो फोन नहीं उठाता...ये बयान हंसी का विषय बना तो चर्चा में भी आ गया है!
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