Advertisment

5th September 2026

BREAKING NEWS

220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में सेवा भारती ने शुरू की निःशुल्क गर्म पानी की सुविधा

निष्ठा, भक्ति भाव और उत्साह से मनाया जा रहा है जन्माष्टमी त्योहार

मैंने दीवार पर क्या लिख दिया खुद को एक दिन..... बारिशें होने लगी मुझको मिटाने के लिये.....

प्रेम, करुणा, सद्भाव और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़े-अश्वनी वर्मा

धूमधाम से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

राम मंदिर, खाटू श्याम मंदिर एवं राधा कृष्ण मंदिर में : निष्ठा, भक्ति भाव और उत्साह से मनाया जा रहा है जन्माष्टमी त्योहार

Praveen Nishee Fri, Sep 4, 2026

मनेद्रगढ़। एमसीबी । स्थानीय राम मंदिर, खाटू श्याम मंदिर एवं राधा कृष्ण मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक संस्थानों में जन्माष्टमी का पावन पर्व काफी उत्साह निष्ठा एवं भक्ति भाव से मनाया गया। जन्माष्टमी पर्व पर योगेश्वर कृष्ण की पोशाक में विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के बच्चों ने अद्भुत झांकी प्रस्तुत की।

इसी क्रम में केंद्रीय विद्यालय रेलवे प्रक्षेत्र के छात्र योग्य वीर सिंह , ने योगेश्वर भगवान कृष्ण की मनमोहक जीवंत रूप ने दर्शकों को प्रभावित किया। मनेद्रगढ़ के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस अवसर पर लड्डू गोपाल, भगवान कृष्ण के कपड़े, पीत वस्त्र एवं झूले एवं चमकीली पोशाके एवं मिष्ठान बड़ी संख्या में लोग खरीदते नजर आए। जन्माष्टमी के इस धार्मिक अनुष्ठान के कारण बाजारों में दिनभर जन्माष्टमी के अवसर पर भारी भीड़ लगी रही।

जन्माष्टमी पर्व को आपसी सामंजस्य एवं समरसता से जोड़ते हुए पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय ने कहा कि - जन्माष्टमी केवल व्रत पूजा और झांकियां तक सीमित धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि या अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और समाज में एकता एवं सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देने वाला सद्भावी त्यौहार है। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण का जीवन व्यावहारिक और प्रगतिशील सामाजिक चेतना का अनुपम उदाहरण रहा है। श्री उपाध्याय ने पौराणिक संदर्भों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि -कंस के अत्याचारों के विरुद्ध भगवान कृष्ण का संघर्ष हमें निर्बलों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना सिखाता है। ऊंच-नीच भेदभाव एवं छुआछूत से परे जन्माष्टमी त्योहार को सामाजिक सद्भाव एवं समरसता से जोड़ते हुए अध्यात्मिक गुरु उपाध्याय ने कहा कि द्वारकाधीश होकर भी भगवान कृष्ण एक निर्धन सुदामा को गले लगाए एवं ग्वालों के साथ मिलकर माखन बांटना यह संदेश देता है कि समाज में उच्च नीच और वर्ग भेद की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा जन्माष्टमी का यह संदेश समझने की जरूरत है कि समाज को आज सद्भावना एकता की जरूरत है और भगवान कृष्ण की गीता का भी यही संदेश है। हमें गीता के निष्काम कर्म योग और सामाजिक कर्तव्यों को गहराई से आत्मसात करने की आवश्यकता है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें