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दैविक शक्ति से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करती है : मरहीमाता मंदिर: छत्तीसगढ़ का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल

Praveen Nishee Sun, Sep 21, 2025

मनेंद्रगढ़ । एमसीबी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 470 किलोमीटर दूर स्थित मरहीमाता मंदिर एक ऐसा प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो अपनी दैविक शक्ति से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करता है। यह मंदिर भरतपुर विकासखंड के आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित है, जहां बैगा जनजाति के लोग रहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मरहीमाता देवी अपने भक्तों को दर्शन देती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

यह मंदिर आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करता है। मरहीमाता मंदिर की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति का भी अनुभव होता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित करता है।

"मरहीमाता मंदिर: छत्तीसगढ़ का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, जहां देवी की दैविक शक्ति से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित यह मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति का अनुभव करें।"

बसंती कुशवाहा श्रद्धालु ने बताया कि एक यादव गाय चरा रहा था और आकर बताया बैगा पुजारी को कि माता ने सपना दिया है कि मैं यहां डोंगरी में हूं। इसके बाद बैगा पुजारी ने पूरे गांव में मुनादी कराई और सभी गांव के लोग गए और खुदाई कराई गई। खुदाई के बाद मरही माता को निकालकर एक पेड़ में स्थापित किया गया। मरही माता के मंदिर के पास एक नदी बहती है और इस पार शंकर भगवान का मंदिर है। यहां दिन-रात मंदिर में भक्तों की भीड़ बनी रहती है और लोग बहुत दूर से आते हैं। मरही माता के प्रति लोगों की गहरी आस्था है और वे अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के लिए माता के दरबार में आते हैं। मरही माता का मंदिर न केवल धार्मिक महत्व का केंद्र है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थल भी है। यहां के मेले और उत्सवों में लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

विनोद कुमार बैगा ने बताया कि मरही माता के नाम से जाना जाता है। यहां जो भी श्रद्धालु मनोकामना लेकर आता है, उसका मनोकामना पूर्ण हो जाता है। माता को चुनरी, अगरबत्ती, नारियल चढ़ाया जाता है। यहां हर त्योहार में माता के दर्शन को श्रद्धालु आते हैं। यहां बकरा की बलि चढ़ाई जाती है, जिसकी भी मन्नत पूरी होती है, वह बकरा की बलि माता को चढ़ाता है।

माता की कृपा से लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। माता का मंदिर एक पवित्र स्थल है, जहां लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए आते हैं। माता की पूजा करने से लोगों को शांति और सुख मिलता है। माता की कृपा से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

सरपंच प्रेमलाल सिंह ने बताया कि माता हमारे गांव का रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लोग दूर-दराज से आते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माता की पूजा करने के लिए छत्तीसगढ़, एमपी, महाराष्ट्र और दूरदराज से लोग आते हैं। माता को काली चूड़ी और कंठी चढ़ाई जाती है, जो वृक्ष में बिराजमान हैं। माता इसी में निवास करती हैं और लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

माता की पूजा करने से लोगों को शांति और सुख मिलता है। माता की कृपा से लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। माता की पूजा करने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के बाद माता का आभार व्यक्त करते हैं। माता का मंदिर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो लोगों को आध्यात्मिक शांति और सुख प्रदान करता है।

माता की पूजा करने से लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद मिलती है। लोग माता की पूजा करने के लिए विभिन्न अनुष्ठानों का आयोजन करते हैं और माता की कृपा प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्री चढ़ाते हैं। माता की पूजा करने से लोगों का जीवन सुखमय और समृद्धशाली बनता है।

कुल मिलाकर, मरहीमाता मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो अपनी दैविक शक्ति से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करता है। यह मंदिर आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति का अनुभव करने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं।

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