रोशन लाल अवस्थी की कलम से : शिकवा शिकायत के बाद भी तगड़ी सेटिंग के बीच झोलाछाप डॉक्टरो पर कार्यवाही नहीं
Praveen Nishee Sat, Sep 6, 2025
देवभोग । गरियाबंद। गांव गांव के जानलेवा झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत के बाद भी तगड़ी सेटिंग के बीच कार्यवाही नहीं हो पाया है जबकि लतीफ खान ने समाधान शिविर में लिखित शिकायत कर बिना डिग्री के ईलाज कर रहे प्रैक्टिशनर पर कार्यवाही की मांग किया रहा लेकिन ना कार्यवाही का पता है और झोलाछाप डॉक्टरों की घातक इलाज को रोकने की पहल हो रही है इससे झोलाछाप डॉक्टरों की जिम्मेदारों से सेटिंग का अंदाजा लगाया जा सकता है जबकि ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के ईलाज से मौत होने की खबर सुर्खिया बटोरती है बावजूद इसके मुख्यालय से लेकर गांव-गांव में बसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जिला प्रशासन का एक्शन देखने को नहीं मिला। जबकि इन कथित डॉक्टरों के इलाज के कुछ दिनों बाद मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिससे स्वास्थ्य विभाग भली-भांति अवगत है। लेकिन आंख कान बंद कर बैठे दिखाई पड़ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य केंद्र एवं उप स्वास्थ्य केंद्र की नाकामी छुपाने में भी सफल हो जाते हैं । तभी आम मरीज ब्लॉक के शासकीय अस्पताल की अव्यवस्था को देख या धरमगढ़ इलाज के लिए जाते हैं या फिर झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे हैं। शायद यही वजह है कि लगातार शिकवा शिकायत के बाद अधिकारी एक दूसरे पर कार्यवाही का जिम्मा डाल कर पल्ला झाड़ रहे हैं। जिसके चलते सप्ताह भर में नए-नए कथित डॉक्टर विकासखंड में देखने को मिल रहा है। और यह डॉक्टर घर-घर जाकर ग्लूकोस बॉटल मलेरिया सहित अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज काफी हाई डोज से कर रहे हैं और इलाज का साइड इफेक्ट देख अंतिम समय मुख्यालय के झोलाछाप डॉक्टर या शासकीय अस्पताल के साथ अन्य जगह रेफर कर देते हैं। जानकारों की माने तो ब्लॉक के गांव गांव 56 से अधिक झोलाछाप डॉक्टर ने अपना डॉक्टरी का जाल बिछा रखा है। बकायदा इनके बीच मुकाबला भी देखने को मिलता है। ग्रामीणों को हल्की बुखार देख मलेरिया की डोज देकर भोले-भाले ग्रामीणों को अपने पाली में कर लेते हैं। जबकि उड़ीसा पर टेस्ट कराने पर मलेरिया नहीं होने का मामला भी कई बार सामने आ चुका हैं । यही कारण है सबसे ज्यादा मलेरिया की दवाई बेचे जाती हैं। जबकि प्रमाणित लैब से टेस्ट कराने के बाद ही डिग्री धारी डॉक्टरों से इलाज करने का नियम है ।लेकिन बिना डिग्री के डॉक्टरों की पर्ची से बिना प्रमाणित और बिना लाइसेंस के पैथोलॉजी पर ब्लड मल मूत्र शुगर सहित अन्य का टेस्ट कराया जाता है। और उक्त टेस्ट के आधार पर कथित डॉक्टर इलाज भी कर देते हैं। बाकायदा इसके लिए झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा पैथोलॉजी संचालकों से कमीशन लेने की बात भी सामने आती है। इससे मरीजों को शारीरिक नुकसान उठाने के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। यही कारण है कि इस लूटपाट को बंद कराने जनप्रतिनिधियों ने एड़ी चोटी लगा दिया है। लेकिन तगड़ी सेटिंग के बीच झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध अब तक शिकायत बेअसर नजर आ रहा है
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