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रोशन अवस्थी के कलम से.......... : धान तस्करों का पहला विकेट गिरा — शुरू हुआ ‘धान का खेला’!

Praveen Nishee Thu, Oct 9, 2025

अमलीपदर। गरियाबंद। धान का सीजन शुरू होते ही सीमावर्ती इलाकों में अब अवैध धान परिवहन की “लीग मैच” शुरू हो चुकी है। मैदान वही पुराना — अमलीपदर, देवभोग और ओडिशा की सीमा — पर इस बार पहले ओवर में ही पहला विकेट तहसीलदार ने उड़ा दिया।

छैलडोंगरी के पास तहसीलदार सुशील कुमार भोई ने साहसिक कार्रवाई करते हुए एक पिकअप वाहन (CG 07 AY 0762) को रोका। जांच में वाहन से करीब 55 बोरी अवैध धान बरामद हुआ। पूछताछ में चालक न तो कोई कागज दिखा सका, न ही स्रोत बता सका। नतीजा — गाड़ी सीधी देवभोग थाना के सुपुर्द कर दी गई।

कहा जा रहा है कि यह सिर्फ “पहला विकेट” है।

अब देखना यह है कि इसी तरह का मैच पूरी क्षेत्र में आगे तक चलता है या फिर “मैच फिक्सिंग” में बदलकर खेल खत्म, पैसा हजम वाला फार्मूला दोहराया जाता है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, उड़ीसा से रोजाना सैकड़ों ट्रक और पिकअप वाहन धान लेकर छत्तीसगढ़ की सीमा में दाखिल हो रहे हैं। यह धान स्थानीय गोदामों और किसानों के घरों में “डंप” किया जा रहा है ताकि सरकारी खरीदी के वक्त इसे समर्थन मूल्य में बेचा जा सके।

सवाल बड़ा है —

क्या प्रशासन इस “धान प्रीमियर लीग” को रोक पाएगा,

या फिर अंपायर (अधिकारी) और खिलाड़ी (तस्कर) दोनों मिलकर खेल बिगाड़ देंगे? और दर्शक रूपी भोले भाले जनता को फिर से ठेंगा दिखाया जाएगा और सरकार का लाखों करोड़ों रुपए लूट लिया जाएगा ।

सहकारी समितियों में खरीदी शुरू होने से पहले ही यह अवैध खेल तेज हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ समिति कर्मचारियों की भी इस “मैच फिक्सिंग” में इनसाइडर पार्टनरशिप की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कई किसानों के पट्टा को गिरवी रखकर सहकारी समितियां के कर्मचारियों के द्वारा इस मैच फिक्सिंग को अंजाम दिया जाता है जिसमें, पिच क्यूरेटर के भूमिका, सहकारी बैंक के कुछ कर्मचारी निभाते हैं । इस पूरी मैच का सिक्योरिटी व्यवस्था देखने वाले विभाग के भूमिका भी संदेहास्पद नजर आता है । यह मैच फिक्सिंग का खेल सरकार के नाक के नीचे होने के बावजूद सरकार इस विषय को गंभीरता से ना लेना भी खेल के मैच रेफरी, टूर्नामेंट को आयोजन करने वाले आयोजन समिति और संस्था के ऊपर भी सवाल खड़ा हो रहा है । हर चेक पोस्ट पर तीसरी आंख लगने के बावजूद अंपायरों के द्वारा रिप्ले ना देखकर सीधे डिसीजन देना भी उनका पारदर्शिता पर सवाल खड़ा हो रहा है जिसको लेकर लोगों का यह कहना है कि इस खेल के सिस्टम के ऊपर से भरोसा टूटता जा रहा है ।

सरकार भले ही दावा करे कि सीमाओं पर कड़ी निगरानी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।

अगर वक्त रहते सीमाओं पर स्थायी नाका और निगरानी टीम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में धान का यह खेल सरकार के लिए करोड़ों रुपये का नुकसान बन सकता है।

फिलहाल अमलीपदर तहसीलदार की यह कार्रवाई इस सीजन की पहली “स्ट्राइक” मानी जा रही है।

अब जनता की निगाहें अगले विकेट पर हैं

क्या अगली गेंद पर “धान माफिया” क्लीन बोल्ड होगा

या फिर मैच फिक्सिंग में अंपायरों के द्वारा “नो बॉल” घोषित कर दी जाएगी —

यह समय ही बताएगा।

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