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दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल का नया कीर्तिमान : कन्नड, गुजराती, छत्तीसगढ़ी सहित पांच भाषाओं में प्रस्तावना पाठ

Praveen Nishee Thu, Nov 27, 2025

मनेंद्रगढ़ । एमसीबी। दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल,मनेंद्रगढ़ में देशभक्ति की गूंज और संविधान दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष प्रार्थना सभा के साथ हुआ, जिसमें विद्यालय के छात्र अरनव तिवारी ने संविधान दिवस के महत्त्व से अवगत कराया उसके बाद कक्षा नवमीं की छात्रा वरीशा ने सभी विद्यार्थियों को संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों से अवगत कराया। इसके पश्चात् विद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर बसंत कुमार तिवारी ने विद्यार्थियों को संविधान के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने भारत के संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा और इसके निर्माताओं के कठिन परिश्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि यह दस्तावेज़ हमारे देश की एकता, समानता और न्याय की मजबूत नींव है। डॉक्टर तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, जिन्हें संविधान निर्माता के रूप में जाना जाता है, ने अपने अद्भुत ज्ञान और दूरदर्शिता से इस महान दस्तावेज़ की रचना की। उन्होंने कहा था— “हमारा संविधान केवल कानूनी दस्तावेज़ नहीं है, यह जीवन की एक दर्शनशैली है।

हमें गर्व होना चाहिए कि हम ऐसे देश में रहते हैं जहाँ हमें बोलने, सोचने और अपनी राय रखने की आजादी है। लेकिन साथ ही हमें अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए — जैसे राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, पर्यावरण की रक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना।आज के दिन आइए, हम सब यह संकल्प लें कि संविधान में निहित मूल्यों का सम्मान करेंगे और एक जिम्मेदार नागरिक बनकर अपने देश को मजबूत, एकता और सद्भाव से परिपूर्ण बनाएंगे। विद्यालय में गणित की वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती सोनल धवन ने इस विशेष अवसर पर अपने संभाषण में कहा कि आज का दिन हमारे राष्ट्र के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान स्वीकार किया गया था, और 26 जनवरी 1950 से इसे पूर्ण रूप से लागू किया गया।संविधान हमारे देश की आत्मा है। यह हमें बताता है कि हमारे अधिकार क्या हैं, हमारे कर्तव्य क्या हैं और एक नागरिक के रूप में हमें किस प्रकार जीवन जीना चाहिए। हमारे संविधान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सभी भारतीयों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व की भावना प्रदान करता है।

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में विद्यालयी छात्र- छात्राओं ने कन्नड, गुजराती, छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अंग्रेजी जैसे पांच भाषाओं में संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर ‘विविधता में एकता’ की भावना को साकार कर दिखाया। इस प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों के हृदय में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित किया।विद्यालय परिसर में संविधान के प्रति सम्मान और निष्ठा की प्रतिध्वनि सुनाई दी तथा संकल्प लिया गया कि प्रत्येक विद्यार्थी संविधान के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएगा। राष्ट्रगीत के साथ इस विशेष प्रार्थना सभा का समापन किया गया।

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