वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से....{किश्त 276} : छत्तीसगढ़ में रायपुर, बिलासपुर जिला बना 1861में तो दुर्ग 1906 में
Praveen Nishee Mon, Jul 14, 2025
रायपुर जिला ऐतिहासिक, पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह कभी दक्षिणी कोसल का हिस्सा था,मौर्य साम्राज्य के अधीन माना जाता था।रायपुर हैहय राजाओं की राजधानी रहा है,जो लंबे समय तक छग के पारंपरिक किलों को नियंत्रित करता रहा है। रायपुर शहर 9 वीं शताब्दी से अस्तित्व में है, शहर के दक्षिणी हिस्से में किले के पुराने स्थल और खंडहर देखे जा सकते हैं।जो अब दक्षिण विधानसभा के अंत र्गत आता है ,सात वाहन राजाओं ने दूसरी-तीसरी शताब्दी तक शासन किया।चौथी शताब्दी में ही राजा समुद्रगुप्त ने इस क्षेत्र पर विजय प्राप्त की, पांचवीं- छठी शताब्दी तक आधि पत्य स्थापित किया, उसी के बाद सरभपुरी राजाओं के शासन में आ गया.... पांचवीं-छठी शताब्दी में कुछ समय के लिए नल राजाओं ने इस क्षेत्र पर प्रभुत्व जमाया। बाद में सोमवंशी राजाओं ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया सिरपुर(श्रीपुर-धन की नगरी)को राजधानी बना कर शासन किया। महा शिवगुप्त बलार्जुन इस राज वंश का सबसे शक्तिशाली सम्राट था। उसकी मां, सोम वंश के हर्षगुप्त की विधवा रानी वसाटा ने लक्ष्मण का प्रसिद्ध ईंट मंदिर बनवाया था। तुम्मान के कलचुरी राजाओं ने रतनपुर को राज धानी बनाकर लंबे समय तक इस क्षेत्र पर शासन किया। रतनपुर, राजिम और खल्लारी के पुराने शिलालेखों में कलचुरी राजाओं के शासन कालका उल्लेख है।ऐसा माना जाता है इस वंश के राजा रामचंद्र ने रायपुर शहर की स्थापना की, बाद में इसे राज्य की राजधानी बनाया।रायपुर के बारे में एक कहानी यह है राजा रामचंद्र के बेटे ब्रह्म देवराय ने रायपुर की स्था पना की थी।उनकी राज धानी खलवाटिका (अब खल्लारी) थी। नवनिर्मित शहर का नाम ब्रह्मदेव राय के नाम पर 'रायपुर' रखा गया। उनके समय में ही 1402 में हाजी राजनाइक ने खारुन नदी के तट पर हटकेश्वर महादेव(अब महा देव घाट) का मंदिर बनवाया था। राजा अमरसिंह देव की मृत्यु के साथ ही इस वंश के शासन का पतन हो गया। अमरसिंह देव की मृत्यु के बाद भोंसले राजाओं का क्षेत्र बन गया। रघुजी तृतीय की मृत्यु के बाद,नागपुर के भोंसले से ब्रिटिश सरकार द्वारा ले लिया गया, 1854 में छत्तीसगढ़ को रायपुर में मुख्यालय के साथ अलग कमिश्नरी घोषित किया गया स्वतंत्रता के बाद रायपुर जिले को सीपी एंड बरार में शामिल कर लिया गया, बाद में मध्यप्रदेश में रायपुर एक अहम जिले के रूप में जाना जाता रहा, 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद रायपुर को छत्तीसगढ़ की राजधानी बनाया गया अब राजधानी छत्तीसगढ़ के नाम से देश में जाना जा रहा है।छग का बिलासपुर जिला1861 में बनाया गया था,जब ब्रिटिश शासन के दौरान मध्य प्रांत का गठन किया गया था।बिलासपुर शहर लगभग 400 वर्ष पुराना है, नाम "बिलासा" नामक फिशर- महिला के नाम पर पड़ा, जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ में जिलों का नवगठन कार्यक्रम चलता जा रहा है,वैसे ही लोगों में ये जानने की जिज्ञासा बढ़ रही है कि कौन सा जिला कब बना ?कौन सा जिला सबसे पहले बना और कौन सा जिला सबसे बड़ा और छोटा है ? जनसंख्या की दृष्टि से देखें तो छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जिला राजधानी रायपुर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़ा जिला सरगुजा है। राज्य का क्षेत्रफल, जनसंख्या की दृष्टि से सबसे छोटा जिला गौरेला-पेंड्रा -मरवाही है। रायपुर को सबसे बड़ा जिला इसलिए माना गया है क्योंकि,2011 के जनगणना के अनुसार रायपुर की जनसंख्या 40 लाख से अधिक है। जो उसे छग का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला बनाता है। 2011 के जनगणना के अनुसार राज्य का सबसे छोटा जिला अब गौरेला- पेंड्रा-मारवाही बन गया था। उष्ण कटिबंधीय जलवायु क्षेत्र है।राज्य में छत्तीसगढ़ी व हिन्दी बोली जाने वाली मुख्य भाषा है। रायपुर छ्ग का सबसे बड़ा शहर होने के साथ-साथ राज्य की राजधानी भी है। छग की सीमा उत्तर में मप्र, पश्चिम में महाराष्ट्र, दक्षिण में तेलंगाना,पूर्व में ओडिशा के साथ लगती है। महानदी नदी राज्य के मध्य से होकर बहती है। छग के जंगल, पहाड़ियां खनिजों, प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं। कोयला,लौह अयस्क, बॉक्साइट और मैंगनीज के बड़े भंडार हैं। क्षेत्र में कई जल विद्युत ऊर्जा संयंत्र भी हैं। छग,भारत के सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक है।
छ्ग में जिलों की
शुरुवात कब हुई....
रायपुर जिला सन 1861 बिलासपुर 1861, दुर्ग 19 06,रायगढ1948,सरगुजा 1948, बस्तर 1948, राजनांदगांव 1973,कवर्धा 1998,कांकेर(उत्तर बस्तर)1998,कोरिया 1998, कोरबा 1998 जशपुर 1998, जांजगीर -चाम्पा 1998, दन्तेवाड़ा (दक्षिण बस्तर) 1998, धमतरी 1998, महासमुन्द 1998, नारायणपुर 2007,बीजापुर 2007, बेमेतरा 2012, बालोद 20 12, बलौदाबाज़ार 2012 , बलरामपुर 2012, गरियाबंद 2012, सूरजपुर 2012, कोंडागांव 2012, मुंगेली 2012, सुकमा 2012, गौरेला-पेंड्रा-मारवाही 2020, मोहला-मानपुर 2021, सक्ती 2021, मनेंद्रगढ़ 2021, सारंगढ़ -बिलाईगढ़ 2021....
विज्ञापन