मनेद्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर जिला गठन पर विशेष : लगभग दो सौ वर्षों बाद पुनः विभाजन
Praveen Nishee Tue, Sep 9, 2025
9 सितंबर 2022 को छत्तीसगढ़ के 32 में जिले के रूप में अस्तित्व में आया मनेंद्रगढ़- चिरमिरी- भरतपुर जिला जो कोरिया जिले से विभाजित होकर बना और जिले का मुख्यालय मनेंद्रगढ़ में स्थापित किया गया । जिले का इतिहास डॉ. विनोद कुमार पांडेय बताते हैं की पूर्व में कोरिया रियासत में 1600 ई तक राजा बालंद का शासन था ,1750 में मैनपुरी के चौहान वंश के दलथममन शाही व धारमलशाही कोरिया पहुंचे कोरिया में कोल जाति व गोड के बाद चौहान वंश का राज्य स्थापित हुआ, यह अपने को सम्राट पृथ्वीराज का वंशज मानते हैं कुछ समय उपरांत ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों नागपुर के मोड़ेजी भोसले के परास्त हो जाने के बाद संभवतः छत्तीसगढ़ के राज्य ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आ गए, इसी के साथ कोरिया राज्य भी ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आ गया, 24 दिसंबर 1819 में राजा गरीब सिंह के स्वीकृत करारनामा के अनुसार राज्य 400 वार्षिक अंग्रेजों को देगा, तथा चांगभखार रियासत (जनकपुर) कोरिया की सामंती अधीनता होने के कारण 386 रुपए कोरिया राज्य के माध्यम से कंपनी को देगा
डॉ. पांडेय बताते हैं कि गरीब सिंह के बाद राजा अमोल सिंहदेव राजा बने सन् 1848 में एक अन्य अनुबंध के अनुसार चांगभखार रियासत देया राशि सीधे ईस्ट इंडिया कंपनी को देने लगा वह कोरिया रियासत से अलग हो स्वतंत्र अस्तित्व में आ गया और उन्हें भैया की उपाधि दी गई, कालांतर में समय के साथ इतिहास बदला और लगभग 200 वर्षों बाद 25 मेई 1998 को रियासत के इसी भाग को कोरिया जिले का गठन हुआ जिसका मुख्यालय बैकुंठपुर बनाया गया तथा क्षेत्रफल 5977.70 वर्ग किलोमीटर था जिस प्रकार 1848 में कोरिया रियासत से अलग होकर चांगभखार रियासत का स्वतंत्र अस्तित्व बना इतिहास बदला और कोरिया जिला से अलग होकर 9 सितंबर 2022 को नवीन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर जिला अस्तित्व में आया जिसका मुख्यालय मनेंद्रगढ़ बना( पूर्व चांगभखार क रियासत तथा कोरिया रियासत का कुछ भाग) मनेंद्रगढ़ -चिरमिरी -भरतपुर जिला कोरिया के उपखंड मनेद्रगढ़ तहसील एवं केल्हारी तथा उपखंड भरतपुर तहसील भरतपुर तथा उपखंड खडगवा -चिरमिरी तहसील एवं चिरमिरी को समाविष्ट करते हुए किसी नवीन जिले का निर्माण किया गया, तथा इसकी सीमाएं उत्तर में तहसील कुसमी जिला सीधी सिंगरौली दक्षिण में तहसील पोड़ी उपरोड़ा जिला कोरबा एवं तहसील रामानुजनगर जिला सूरजपुर पूर्व में तहसील बैकुंठपुर एवं सोनहत तथा पश्चिम में गौरेला- पेंड्रा- मरवाही व अनूपपुर जिला मध्य प्रदेश से मिलती है जिले का क्षेत्रफल 1726. 39 वर्ग किलोमीटर तथा जनसंख्या 2011 के अनुसार 4, 22 ,248 थी ।
जिले के नामकरण के इतिहास को बताते हुए डॉ पांडेय बताते हैं वास्तव में मनेंद्रगढ़ का मूल नाम कारीमाटी था क्योंकि इसके आसपास कोयले का भंडार तथा यहां की भूभाग की मिट्टी काली थी सन 1927 में कारीमाटी में भीषण आग लग गई ।जिससे यह संपूर्ण क्षेत्र जलकर राख हो गया 1930 में रेलवे लाइन के बाद तत्कालीन कोरिया राजा रामानुज प्रताप सिंह ने रेलवे स्टेशन के निकट नगर बसाने का निर्णय लिया तथा इस स्थान का नाम अपने तृतीय पुत्र महेंद्र प्रताप सिंहदेव के नाम पर मनेंद्रगढ़ रखा । चिरमिरी इस स्थान का नाम चिरमिरी क्यों पड़ा इसका कोई प्रमाण नहीं है फिर भी एक मत के अनुसार यह चेरी माई की स्मृति में यहां एक सती मंदिर है जो भग्नावस्था में था चेरी माई के कारण ही इस क्षेत्र का नाम चिरमिरी पड़ा होगा तथा जनकपुर का चांगभखार रियासत से संबंध होने के कारण रियासत का नामकरण माता चांगदेवी के नाम पर किया गया था जो रियासत की कुलदेवी है ।
विज्ञापन