जमीन के रखवालों की लड़ाई हाई कोर्ट के बाद विधानसभा पहुँची : छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक आर.आई. विभागीय परीक्षा 2024 चयनित पटवारियों के ख़िलाफ़ पटवारी संघ
Praveen Nishee Fri, Jul 18, 2025
( वरिष्ठ पत्रकार नयन दत्ता की कलम से )
आमतौर पर देखा जाता है कि कोई भी कर्मचारी संगठन या यूनियन अपने सदस्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करता है, उनके लिए अपने अधिकारियों या मैनेजमेंट से लड़ जाता है। मगर छत्तीसगढ़ में इन दिनों ज़मीन से जुड़े सबसे बढ़े विभाग राजस्व विभाग में एक अनूठी लड़ाई चल रही है। जिसने पूरे डिपार्टमेंट को धीरे धीरे दो खेमों में बाँट दिया है।जिन पटवारियों का चयन आर आई के पद पर हुआ है उनका विरोध वही पटवारी कर रहे है जो पहले हुई इस तरह की परीक्षा में असफल हो गये थे।ये लड़ाई ओल्ड वर्सेज़ न्यू या अनुभव और जवानी की जंग नहीं कही जा सकती क्योंकि इसमें जो भी हारेगा नुक़सान सरकार का होगा, नुक़सान छत्तीसगढ़ की आम जनता का होगा।
> पटवारी संघ बनाम चयनित पटवारियों कि लड़ाई पहुंची विधानसभा सदन तक
> राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा चयन विवाद –
> मामला पटवारी बनाम पटवारी कि राजस्व निरीक्षक में पदोन्नति को लेकर
> विवाद का कारण – पदोन्नति कि चाह, क्योंकि पहले कि भांति पटवारी बनने में वो जलवा अब रहा नहीं है , अक्सर आपने देखा होगा कि अन्य विभाग में वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन का प्रचलन है इसी प्रकार 2014 के पूर्व पटवारी से राजस्व निरीक्षक बनाने के लिए भी यही आधार राजस्व विभाग में भी लागू था किन्तु इसमें अधिकार यह पाया गया कि पटवारी लोग राजस्व निरीक्षक में प्रमोशन लेते ही नहीं थे जबकि प्रमोशन कि मूल अधिकार है ये खुद जान बुझ कर अपने अधिकार से वंचित रहना पसंद करते थे क्योंकि पटवारियों का जलवा ही कुछ और था ,इस प्रकार इस प्रक्रिया में आर.आई में पद भर नहीं पाते थे एवं शासन एवं लोगो का कार्य प्रभावित रहता था इसी सब बातो के चलते 2014 में छ०ग० भू अभिलेख नियमावली भाग 2 अध्याय 1 में संसोधन कर एवं छत्तीसगढ़ भू अभिलेख तृतीय श्रेणी अराजपत्रित (कार्यपालिक एवं तकनिकी )सेवा भर्ती नियम , 2014 को लागु कर प्रमोशन के तरीके को बदल दिया गया अब जिससे आर .आई बनाना है वो परीक्षा में शामिल होगा मेरिट के आधार पर प्रमोशन कि पात्रता बानाई गई I इस नियम के तहत चार बार परीक्षा आयोजित कि गई 2016,2017, 2018 एवं 2024 में I वर्ष 2016, 2017, 2018 में हुए परीक्षा कि भाँती ही 2024 में परीक्षा का आयोजन हुआ जिसका प्रमाण उच्च स्तरीय समिति के निष्कर्ष के बिंदु क्रमांक 10 में स्पष्ट लिखा है कि परीक्षा पूर्व वर्षो में आयोजित परीक्षाओ कि भांति ही किया गया है I 2024 में कि तरह ही 2016 2017 2018 में भी ओएमआर शीट में मोबाइल न० एवं नाम का उल्लेख किया गया था I और आपत्तिकर्ता पटवारी संघ के पदाधिकारी खुले आँखों से ये समस्त परीक्षाओ में शामिल हुए थे और इन्हें कोई आपत्ति उस समय नहीं थी I चूँकि 2024 कि परीक्षा 2018 के बाद हुई 6 वर्ष बाद 6 वर्षो में पटवारी पद का जलवा एवं अन्य सुखाचार में कमी आई और विभागीय कार्य ऑनलाइन होने के कारण कार्य में कसावट आई I अब पटवारियों का रुझान आर.आई कि तरफ बढ़ा I अब वरिष्ठ पटवारी भी प्रमोशन में आर.आई बनाना चाहने लगे किन्तु इस एग्जाम में मेरिट में आधार पर प्रमोशन पाना अब इनके लिए कठिन हो चूका जो था I इसी चाह के कारण 2024 के विभागीय परीक्षा में विवाद शुरू हुआ I
> दिनांकवार घटना क्रम –
> 🔹25सितम्बर2023:
> राजस्व विभाग द्वारा राजस्व निरीक्षक पद पर विभागीय परीक्षा आयोजित करने हेतु विज्ञापन जारी की गई। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न जिलों से पात्र पटवारियों से आवेदन मांगे गए I
> 🔹07जनवरी2024:
> राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण विभागीय परीक्षा रायपुर के 6 परीक्षा केंद्रों में पर्यवेक्षकों एवं केंद्राध्यक्षों की उपस्थिति में संपन्न हुई
> 🔹16जनवरी2024:राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 के मॉडल आंसर जारी किए गए
> 🔹29 जनवरी 2024:
> राजस्व पटवारी संघ द्वारा परीक्षा संचालन की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज करते हुए आरोप लगाए गए कि अभ्यर्थी एक-दूसरे के पारिवारिक रिश्तेदार हैं जिनको आस पास बैठाया गया । उच्च स्तरीय जांच 5 बिंदुओं में करने की मांग शासन से किया
> साथ ही राजस्व पटवारी संघ द्वारा विधिवत परीक्षा आयोजन के पश्चात एवं विभागीय परीक्षा में सम्मिलित होने के बाद भी राजस्व मंत्री, टंकराम वर्मा को वरिष्ठता के आधार पर पटवारियों को राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति देने की मांग यह दर्शाता हैं कि वे आयोजित परीक्षा से नाखुश थे और दिनांक 16.01.2024 को राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 के मॉडल उत्तर जारी होने के पश्चात शिकायतकर्ताओं को जब यह प्रतीत हो गया कि उनका इस परीक्षा में चयन होना संभव ही नहीं तब उन्होंने इस परीक्षा को कैसे भी करके निरस्त करवाने की योजना बनाई और समस्त प्रकार की मनगढ़ंत शिकायत करना प्रारंभ किए
> 🔹29फरवरी2024::राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 के परीक्षा परिणाम जारी किए गएl
> 🔹11 मार्च 2024:राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 को निरस्त कराने हेतु 7 अचयनित अभ्यर्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका WPS 1832 OF 2024 दायर की गई
> 🔹16 अप्रैल 2024:माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा WPS 1832 ऑफ 2024 में याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए याचिका को खारिज करते हुए कहा परीक्षा का संचालन नियमानुसार हुआ है
> 🔹05 अगस्त2024:विभाग द्वारा परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों के 5 वर्ष पूर्ण होने का प्रमाण समस्त जिला कलेक्टर से मांगा गया
> 🔹23अगस्त2024:
> छत्तीसगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 के जांच हेतु एक 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया तथा उन्हें 15 दिनों के भीतर इस परीक्षा में हुई अनियमितता की जांच करके जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने आदेशित किया गया
> 🔹23अक्टूबर2024:
> विभाग द्वारा जिला कलेक्टरों से प्राप्त जानकारी के आधार पर समस्त चयनित अभ्यर्थियों के 5 वर्ष पूर्ण होने का सत्यापन कर पात्रता सूची जारी की गई
> 🔹26नवंबर2024:
> जांच समिति के गठन से लगभग 3 महीने बीत जाने पर भी जब कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया गया तब 4 चयनित अभ्यर्थियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका WPS 7889 of 2024 दायर की जिसमें सचिव राजस्व विभाग,संचालक राजस्व विभाग,आयुक्त भू अभिलेख एवं उच्च स्तरीय जांच कमेटी को पार्टी बनाया गया I
> 🔹 29 नवंबर 2024: उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर होते ही 3 दिनों के अंदर ही दिनांक 29.11.2025 को केडी कुंजाम समिति ने अपना जांच प्रतिवेदन तैयार कर दिनांक 02.12.24 को सामान्य प्रशासन को जमा कर दी चूंकि यह रिपोर्ट हड़बड़ी में बनाई गई इसलिए इस में बहुत सारी तथ्यात्मक त्रुटियां थी चयनित अभ्यर्थियों को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बगैर बिना बयान तथा बिना परीक्षा केंद्रों के अभ्यर्थियों के बैठक व्यवस्था की जांच व पर्यवेक्षकों केंद्राध्यक्षों के बयान लिए बिना ही रिपोर्ट में चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ तथ्य दिए गए
> राजस्व पटवारी संघ के द्वारा पूर्व के दिनांक 29.1.2024 में दिए गए अपने ज्ञापन में 5 बिंदुओं में परीक्षा संचालन एवं परीक्षा की प्रक्रिया के संबंध में शिकायत किया गया था परन्तु माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा WPS 1832 ऑफ 2024 में परीक्षा संचालन एवं प्रक्रिया को सही बताए जाने के बाद राजस्व पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने अपने शिकायत का स्वरूप बदल कर परीक्षा में गड़बड़ी या धांधली कर दी इससे स्पष्ट है कि पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने जानबूझकर परीक्षा को निरस्त कराने हेतु शिकायत का स्वरूप ही बदल दिया
> कुंजाम समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन की तथ्यात्मक त्रुटियां
> जांच समिति ने शिकायत में उल्लेखित अभ्यर्थियों को सुनवाई का मौका दिए बिना केवल शिकायतकर्ता के बयान लिए और एकतरफा निष्कर्ष निकाला
> जांच समिति ने अपने प्रतिवेदन के उच्चस्तरीय जांच समिति के निष्कर्ष बिंदु क्रमांक 3 में कहा कि राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 में पूर्व वर्ष में हुए विभागीय परीक्षा की भांति OMR Sheet इस्तेमाल किया गया था जिसमें मोबाइल नंबर आदि जानकारी पूर्व परीक्षाओं की भांति उल्लेखित थी अर्थात विभागीय परीक्षा 2024 में कुछ नई जानकारी नहीं मांगी गई थी यह OMR शीट पूर्व परीक्षाओं की भांति थी शिकायतकर्ताओं ने पूर्व वर्षों में भी विभागीय परीक्षाओं में भाग लिया था परन्तु उन्हें तब कोई आपत्ति नहीं थी केवल विभागीय परीक्षा 2024 में ही इस जानकारी को देने से आपत्ति हुई I
> उच्च स्तरीय जांच समिति के निष्कर्ष बिंदु क्रमांक 4 में कहा गया है कि शिकायत में उल्लेखित 7 पटवारियों के अनुक्रमांक परीक्षा केंद्रों परीक्षाफल की जानकारी से ज्ञात होता है कि 7 मै से से केवल 3 पटवारी ही परीक्षा में चयनित हुए बाकी 04 चयनित नहीं हुए इससे स्पष्ट था कि शिकायतकर्ताओं के शिकायत झूठे थे जानबूझकर 7 पटवारियों के खिलाफ बिना किसी प्रकार की सबूत और प्रारंभिक जांच किए पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने दुर्भावनापूर्वक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कर चयन परीक्षा पर सवाल उठाएं
> उच्चस्तरीय जांच समिति के निष्कर्ष बिंदु क्रमांक 5 में कहा गया है कि “शिकायत में उल्लेखित पारिवारिक रूप से संबंधित अभ्यर्थियों के विभाग द्वारा प्रदाय जानकारी अनुसार22 अभ्यर्थियों को आस पास अनुक्रमांक प्रदान किए गए तथा वे समस्त चयनित हुए” इस तथ्य को समिति ने बिना अभ्यर्थियों के बयान तथा बिना चयन परीक्षा के चयन सूची,परीक्षा केंद्रों के बैठक व्यवस्था की जांच और परीक्षा केंद्रों में उपस्थित पर्यवेक्षकों व केंद्राध्यक्षों के बयान लिए बिना ही निष्कर्षित किया और 22 अभ्यर्थियों के छबि सामाजिक रूप से धूमिल कियाl जब कि सच्चाई यह है कि इस विभागीय परीक्षा में 72 पारिवारिक रूप से संबंधित अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे जिसमें मात्र 13 पारिवारिक रिश्तेदार सफल होते है और उन 13 सफल अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों के बैठक व्यवस्था की जांच करने पर स्पष्ट है कि केवल दो पारिवारिक रिश्तेदार को आगे पीछे अनुक्रमांक 241797 एवं 241798 प्राप्त हुआ और आगे पीछे बैठे थे उनका चयनं हुआ है एवं 11 पारिवारिक रिश्तेदार जिनका चयन हुआ वो अलग अलग बैठ थे जिनका अनुक्रमांक में काफी अन्तर है ,किन्तु 3 और ऐसे पारिवारिक रिश्तेदार थे जो भाई भाई ,बहन बहन या फिर भाई बहन थे जो भी आगे पीछे बैठे थे किन्तु वे 32 लोगो का चयन नहीं हुआ तथा कुल 59 पारिवारिक रिश्तेदार चयनित नही हुए फिर भी उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने केवल 22 अभ्यर्थियों के बिना बयान बिना परीक्षा फल की जांच एवं बिना परीक्षा केंद्रों के सीटिंग अरेंजमेंट और पर्यवेक्षकों केंद्राध्यक्षों के बयान बिना अपना निष्कर्ष दिया है lयहां यह उल्लेख करना भी आवश्यक है कि राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 में परीक्षा संचालनकर्ताओं ने पिता के नाम के आधार पर अभ्यर्थियों को अनुक्रमांक प्रदान किया अर्थात पिता के नाम पर रेंडमाइजेशन किया था पूर्व वर्षो कि भाँती l
> फिर भी जांच समिति ने बिना रेंडमाइजेशन करने वाले अधिकारी कर्मचारी या किसी तकनीकी विशेषज्ञ के बयान लिए बिना ही यह निष्कर्ष निकाला कि रेंडमाइजेशन का अनुसरण नहीं किया है
> जांच समिति ने जिन 22 अभ्यर्थियों को पारिवारिक रूप से संबंधित है उनका नाम कि सूची नहीं दिया जिससे यह प्रतीति होता है कि भ्रामक तथ्यों को प्रतिवेदित किया
> उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि उच्च स्तरीय जांच समिति ने इस बिंदु पर कोई जांच की ही नहीं है और बिना जांच के निष्कर्ष क्रमांक 05 में शिकायतकर्ताओं के ही शब्द प्रतिवेदित कर दी जो जांच अधिकारियों के जांच प्रक्रिया पर निश्चित ही एक सवाल उठाते है
> जांच समिति ने अपने अंतिम निष्कर्ष बिंदु क्रमांक 10 में यह बात स्पष्ट भी किया है कि शिकायतकर्ताओं द्वारा कोई ठोस साक्ष्य सबूत प्रस्तुत नहीं किए गए एवं राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 का संचालन पूर्व वर्षों की भांति भूअभिलेख में उल्लेखित प्रावधानों के अनुरूप नियमानुसार आयोजित की गई है अर्थात शिकायतकर्ताओं ने कोई ठोस साक्ष्य या सबूत के बिना ही इस परीक्षा को धांधली बताया और सिर्फ परीक्षा को निरस्त कराने हेतु कुछ भी शिकायत दर्ज कराया था शासन ने बिना कोई ठोस साक्ष्य या सबूत बिना ही आज इस परीक्षा में गड़बड़ी हुई करके चयनित अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण को रोक कर उनके पदोन्नति के अधिकार से भी वंचित कर दिया
> जांच समिति ने इसी निष्कर्ष बिंदु क्रमांक 10 में अंतिम में यह कहा कि“परीक्षा संचालन में उपरोक्तानुसार त्रुटियां विद्यमान है जिस पर आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रतिवेदन प्रशासकीय विभाग को अग्रेषित किया गया है” जब कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने WPS 1832 OF 2024 में स्पष्ट आदेशित किया था कि एक बार परीक्षा में खुली आंखों से सम्मिलित होने के पश्चात परीक्षार्थी परीक्षा संचालन एवं उसकी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठा सकते तथा उसी याचिका में स्वयं राज्य सरकार ने कहा कि“याचिकाकर्ता ने परीक्षा में पूरी जानकारी और समझ के साथ भाग लिया था, और अब वह परीक्षा की प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते ।उन्होंने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय Anupal Singh & Others बनाम उत्तरप्रदेश राज्य, (2020) 2 SCC 173 का हवाला दिया ।जब वह परीक्षा में असफल हो गए, तभी उन्होंने इसकी वैधता को चुनौती दी है, जो कि विधिसम्मत नहीं है ।उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राज्य द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई थी और सभी उम्मीदवारों को बराबरी का अवसर दिया गया, अतःयह याचिका खारिज की जानी चाहिए।“
> उसके बावजूद भी उच्चस्तरीय जांच समिति ने परीक्षा संचालन प्रक्रिया पर सवाल उठाया और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को नजर अंदाज़ किया
> 🔹 14 जनवरी 2025: माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा WPS 7889 ऑफ 2024 में 15 दिवस में चयनित अभ्यर्थियों को राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण में भेजने हेतु शासन को आदेशित किया था और मजे की बात की इस वाद में स्वयं शासन ने 15 दिवस में निर्णय लेकर प्रशिक्षण प्रारंभ करने की बात कही थी उक्त आदेश के पालन न किये जाने के सम्बन्ध में न्यायालय के आदेश कि अवहेलना का प्रकरण माननीय उच्च न्ययालय में विचाराधीन है
> 🔹16 जनवरी 2025: माननीय उच्च न्यायालय द्वारा WPS 7889 ऑफ 2024 में 15 दिनों में प्रशिक्षण में भेजने का फैसला देने के बाद भी आनन फानन में राजस्व विभाग के अवर सचिव द्वारा ACS गृह विभाग को राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 की जांच हेतु पत्राचार किया गया एवं मामले को टाल दिया गया
> शासन उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट प्राप्ति के पश्चात 2 महीनों तक इस रिपोर्ट में कोई निर्णय नहीं लेती ,लेकिन जैसे ही उच्च न्यायालय ने दखल दिया और 15 दिनों में प्रशिक्षण भेजने की बात कही तब शासन गृह विभाग को जांच हेतु पत्राचार करती है जान बुझ कर मामले को टालती है
> 🔹 31 जनवरी 2025: जब राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण विभागीय परीक्षा वर्ष 2024 उत्तीर्ण अन्य अभ्यर्थियों ने देखा कि शासन 2 याचिकाओं में कुछ भी बात न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर रही तब लगभग 134 अभ्यर्थियों ने एक जूट होकर उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका क्रमांक WPS 1205 और 1206 दिनांक 31.01.2025 दायर की
> शासन द्वारा मामले को एक बार फिर नई एजेंसी EOW/ACB से जांच कराने का एक नया पत्र दिनांक 04.03.2025 को जारी कर दी जाती है मगर छत्तीसगढ़ शासन कब तक इस जांच पूर्ण कर लेगी ऐसा कोई भी समय सीमा निर्धारित नहीं कर पाई है बार बार शासन के द्वारा मामले को इरादतन रूप से टालने में लगी है क्यूकि शासन की मंशा साफ दिख रही है कि पदोन्नति के मामले को टाल कर परीक्षा निरस्त करना में है जिससे कि पटवारी संघ के पदाधिकारीयो का वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन कर सके ,
> अब यक्ष प्रश्न तो यह है कि छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व विभाग के वर्तमान कर्ताधर्ता पटवारी संघ के पदाधिकारीयो के अनुसार क्यों चल रहे है? यह गुढ़ रहस्य तो शासन ही जाने , पटवारी संघ के पदाधिकारीयो के हठ के आगे बाक़ी सब कुछ फीका पड गया है।
> और अब छत्तीसगढ़ शासन ना तो छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के आदेशो को मानने को तैयार है और न ही अपने राजस्व विभाग कि सही सिफारिश को मानने को तैयार है।मगर दिन बा दिन बढ़ते राजस्व के पेंडिंग मामले इस बात की गवाही देते है की सरकार ईमानदारी से अपनी मेहनत से चुनकर आये पटवारियों को आर आई के पद पर पद्दोन्नति जल्दी देने मूड में नहीं है ।और इधर चयनित पटवारी भी अपनी इस लड़ाई को इंसाफ़ मिलने तक चालू रखना चाहते है चाहे इसके लिए दिल्ली तक जाना पड़े।
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