कलेक्टर ने ली समय-सीमा बैठक : विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने दिए कड़े निर्देश
Praveen Nishee Wed, Dec 10, 2025
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। जिला कार्यालय में आज कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में समय-सीमा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न विभागों के कार्यों, लंबित प्रकरणों और आगामी योजनाओं की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की गई।
बैठक की शुरुआत कलेक्टर ने उच्च न्यायालय से संबंधित लंबित प्रकरणों पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए की, जहाँ उन्होंने एसडीएम, बीईओ और जनपद सीईओ खड़गवां को इन मामलों का प्राथमिकता से तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्यायालयीन मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही जिले की जवाबदेही को प्रभावित करती है और प्रशासनिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बनाती है, इसलिए सभी अधिकारी समय-सीमा का पालन करें। बैठक में डीएमएफ मद से स्वीकृत कार्यों, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों, जन शिकायतों तथा सरगुजा प्राधिकरण में लंबित मामलों की बिंदुवार समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि डीएमएफ का उपयोग जिले के विकास की रीढ़ है, इसलिए इससे जुड़े सभी कार्यों को पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित करना अनिवार्य है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि डीएमएफ से कार्य स्वीकृति के लिए अब ऑनलाइन आवेदन ही अनिवार्य रहेगा, ताकि प्रक्रिया डिजिटल, बेहतर मॉनिटरिंग योग्य और रिकॉर्डेड हो सके।
कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों को आगामी नए कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए प्रस्तावों में ग्राम और ग्राम पंचायतों की सूची स्पष्ट रूप से दर्ज की जाए, जबकि नगर पालिका में वार्ड संख्या और वार्ड का नाम अनिवार्य रूप से लिखा जाए। यह निर्देश विकासात्मक कार्यों की सटीक पहचान, भूमिका निर्धारण और क्षेत्रवार प्राथमिकता को सुनिश्चित करेगा। कलेक्टर ने एमसीबी-भरतपुर क्षेत्र के कुल 37 ग्रामों से आए प्रस्तावों की पुनः समीक्षा करते हुए उन्हें प्राथमिकता में शामिल करने कहा। उन्होंने CSR मद से संबंधित कार्यों पर भी टिप्पणी करते हुए निर्देश दिया कि कोई भी नया प्रस्ताव भेजने से पहले यू-चौनल प्रक्रिया का पालन किया जाए, ताकि CSR मद का उपयोग नियमानुसार, पारदर्शी और उचित उद्देश्य हेतु हो। इसी क्रम में कलेक्टर ने विभागों को बैनर और फ्लेक्स बनवाने के लिए निर्धारित दर सूची अभिव्यक्ति की रुचि संस्था से मंगाने के निर्देश दिए, जिससे अनावश्यक खर्च और अनियमितता पर रोक लग सके।
बैठक में जीएसटी रिटर्न से जुड़े विषयों की भी समीक्षा की गई। ADIM-नंदाली परिसर में फिजियोथेरेपी यूनिट, चिरमिरी स्थित मिलानिस भवन में डॉर्मेट्री निर्माण, सीसीटीवी स्थापना, वाटर एटीएम मशीन की उपलब्धता और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े विभिन्न मदों पर भी कलेक्टर ने संबंधित विभागों से ताज़ा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि केल्हारी, घुटरा और खड़गवां क्षेत्रों में कोसा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि स्थानीय महिलाओं एवं समूहों को रोजगार के अवसर मिलें और जिले में रेशम उद्योग का विस्तार हो सके। इसी क्रम में आधार किट वितरण की समीक्षा करते हुए पाया गया कि खड़गवां क्षेत्र में छह आधार किट उपलब्ध हैं। कलेक्टर ने इसके तुरंत उपयोग और जनहित में इसकी सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में जिले के सीईओ ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक मानव संसाधन प्रणाली के तहत विभागों में कई प्रक्रियाएँ डिजिटल रूप से संचालित की जा रही हैं, जिसे और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। कलेक्टर ने तीनों ब्लॉकों में बैठ रहे मत्स्य निरीक्षकों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी मछुआ समूहों को नियमित प्रशिक्षण दें, ताकि उन्हें मत्स्य उत्पादन, संरक्षण, प्रबंधन और विपणन से संबंधित पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके। उन्होंने मत्स्य, पशुधन और उद्यानिकी विभागों को वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए स्वीकृत लोन के लंबित प्रकरणों की सूची तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही कृषि विभाग को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने धान के रकबे को नियंत्रित कर जिले में दलहन, तिलहन, मटर और सरसों जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और विपणन के स्थिर अवसरों को देखते हुए विविध खेती ही किसानों को स्थायी लाभ दे सकती है। इसी क्रम में सभी जनपद सीईओ को निर्देश दिया गया कि वे गांवों में वितरित की गई फसल किट की विस्तृत जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि किसानों को वास्तविक लाभ मिल रहा है।
वहीं कोटाडोल, चैनपुर और देवाडाड़ क्षेत्रों से आए भूमि, NOCऔर खनिज विभाग के प्रकरणों पर भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग को दावा-आपत्ति के निराकरण में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसके साथ ही ई-ऑफिस व्यवस्था पर विशेष चर्चा हुई, जहाँ अपर कलेक्टर विनायक शर्मा ने बताया कि अब तक जिले में लगभग 400 अधिकारी और कर्मचारी ई-ऑफिस सिस्टम पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जिससे सभी पत्राचार, अनुमोदन और नोटिस ऑनलाइन संचालित किए जा रहे हैं। कलेक्टर ने प्ले जेम रजिस्ट्रेशन, स्टेशनरी और फ्लेक्स से संबंधित प्रक्रियाओं को भी पूरी तरह डिजिटाइज करने के निर्देश जारी किए।
बैठक में NRLM, पंचायत संसाधन केंद्रों, कुंवारपुर सब स्टेशन, जनकपुर के 100-बिस्तर अस्पताल, सामुदायिक भवन निर्माण और सनबोरा से पाण्डोपारा मार्ग के प्रकरणों पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। कलेक्टर ने कहा कि जनकपुर का 100 बिस्तर वाला अस्पताल जिला स्वास्थ्य प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण आधार बनने जा रहा है, इसलिए इसके निर्माण में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं होगी। इसी क्रम में सड़क निर्माण, विद्युत सुधार परियोजनाओं और सामुदायिक भवनों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सभी एसडीएम और जनपद सीईओ को अपने-अपने क्षेत्रों में पंचायत भवनों का नियमित निरीक्षण करने के सख्त निर्देश दिए, ताकि ग्राम स्तर के संसाधनों का सही उपयोग और रखरखाव सुनिश्चित हो सके।
कलेक्टर ने बैठक के अंत में स्पष्ट चेतावनी दी कि विकास कार्यों, निर्माण परियोजनाओं और जनहित योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की विश्वसनीयता उसके काम की गति और पारदर्शिता पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बैठक में जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टरों, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, एसडीएम, जनपद सीईओ एवं सभी संबंधित विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

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