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रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई : नारी शक्ति की जो मिसाल पेश की,वह अद्भुत अकल्पनीय और अनुकरणीय है- चंपादेवी पावले

Praveen Nishee Wed, Jun 25, 2025

मनेंन्द्रगढ। एमसीबी । बड़ादेव गोंड महासभा एवं सर्व आदिवासी समाज जिला एम सी बी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय इतिहास की महान वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर मनाया गया। आमंत्रित अतिथियों द्वारा सर्वप्रथम रानी दुर्गावती के छायाचित्र पर माल्यार्पण,पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में अतिथियों द्वारा अपने अपने विचार रखे गये। मुख्य अतिथि वरिष्ठ नागरिक दलप्रताप सिंह उर्रे ने इस पर सभा को संबोधित करते हुये कहा कि गढमंडला की वीरांगना महारानी दुर्गावती का साहस शौर्य और पराक्रम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उनका स्वाभिमान और आत्म सम्मान पूर्ण जीवन हम सब के लिए प्रेरणादायक और सदैव रहेगा।

कार्यक्रम अध्यक्ष एवं सर्व आदिवासी समाज जिला एमसी बी के अध्यक्ष शरण सिंह ने इस अवसर पर रानी दुर्गावती के जीवन पर प्रकाश डालते हुये बतलाया कि रानी दुर्गावती का जन्म चंदेल वंश के राजा कीरत सिंह के यहां 5 अक्टूबर 1524 को दुर्गा अष्टमी के दिन हुआ था।दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया था।यथा नाम तथा गुणा: के मर्म को भी उन्होंने अपने जीवन में अक्षरश: साबित किया।अठारह वर्ष की आयु में उनका विवाह गोड राजा दलपत शाह के साथ हुआ। विवाह के बाद अल्प समय पश्चात ही उनके पति का 1548 में असामयिक निधन हो गया।पति की मृत्यू के पश्चात उन्होंने अपने पांच वर्षीय पुत्र बीर नारायण सिंह को सिंहासन पर बैठाकर राज-काज की बागडोर अपने हाथ में लेकर कुशलतापूर्वक राज काज का संचालन कर रहीं थीं।उनके राज में प्रजा बहुत प्रशन्न व सुखी थी। विशिष्ट अतिथि व पूर्व विधायक चंपादेवी पावले ने इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुये कहा कि रानी दुर्गावती अविभाजित म प्र के गोंडवाना राज्य गढमंडला रियासत की रानी थी।उनका जीवन काफी संघर्ष पूर्ण था,लेकिन फिर भी उन्होंने धैर्य साहस और आत्मविश्वास से सभी प्रकार की चुनौतियों का डटकर मुकाबला करते हुये नारी शक्ति की जो मिसाल पेश की,वह अद्भुत अकल्पनीय और अनुकरणीय है।

विशिष्ट अतिथि एवं जन जाति गौरव समाज संभाग सरगुजा के अध्यक्ष परमेश्वर सिंह ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुये बतलाया कि राष्ट्र की अमर शहीद वीरांगना रानी दुर्गावती बचपन से ही घुड़सवारी अस्त्र शस्त्र विद्या तीर,तलवार और बंदूक चलाने में विशेष निपुण थीं। विवाहोपरांत व उनके पति के असामयिक मृत्यू के पश्चात उन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिये पचास से अधिक लड़ाईयां लड़ी और सभी में उन्होंने विजय हासिल की। तत्कालीन मुगल सम्राट अकबर की सेना को भी उन्होंने तीन तीन बार पराजित किया।ऐसी शक्तिशाली, महान योद्धा , शौर्य ,पराक्रम और नारी अस्मिता की प्रतीक रानी दुर्गावती का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है व सदैव रहेगा।

विशिष्ट अतिथि सुजीत सिंह ने रानी दुर्गावती को महान देशभक्त व जन जन का प्रकाश पुंज बतलाया। उनके आदर्शो को आज हम सबको आत्मसात करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम को अमोल सिंह मरावी, जिला पंचायत सदस्य अनीता सिंह व ग्रा पं डंगौरा के सरपंच कमला सिंह द्वारा भी संबोधित किया गया।कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रम्हा सिंह शिक्षक व आभार प्रदर्शन संतोष सिंह चौघडा सरपंच द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सरोधन सिंह, महेंद्र सिंह, देवन सिंह, प्राण सिंह, शिवनारायण सिंह, कौशिल्या सिंह, कृष्णा सिंह, सुखमंती सिंह, फूलमती सिंह, सावित्री सिंह, विमला रौतिया, भारत सिंह, गजराज सिंह, आदि सहित भारी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे।

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