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रोशन लाल अवस्थी की कलम से.... : बाबा भूतेश्वरनाथ की नगरी में धर्म और भक्ति का ज्वार,श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन अमृत मंथन और कृष्ण जन्मोत्सव ने मोहा मन

Praveen Nishee Sun, Aug 31, 2025

गरियाबंद।(GDNews) बाबा भूतेश्वरनाथ की पावन नगरी गरियाबंद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में आज अमृत मंथन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य झलकियों ने श्रद्धालुओं को आत्मिक आनंद से सराबोर कर दिया। चारों ओर भक्ति का ऐसा अद्भुत वातावरण बना मानो स्वयं देवताओं ने आकर इस आयोजन की शोभा बढ़ा दी हो।

विख्यात कथा वाचक आचार्य पं. श्री प्रेम किशोर शर्मा (तूता, नया रायपुर) ने आज कथा का शुभारंभ करते हुए कहा –

“समुद्र मंथन केवल देव–दानव का प्रसंग नहीं है, यह हमारे जीवन का सत्य है। जब मनुष्य अपने भीतर के असुर और देवताओं को साधता है, तब जीवन में अमृत स्वरूप भक्ति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। उसी प्रकार कृष्ण जन्म हमें यह शिक्षा देता है कि अधर्म चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, अंततः धर्म और सत्य की ही विजय होती है।”

ज्यों ही कथा वाचक ने अमृत मंथन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, पंडाल “हर-हर महादेव” और “जय श्रीहरि” के नारों से गूंज उठा। समुद्र मंथन की झांकी में मंदाराचल पर्वत और वासुकी नाग का अद्भुत चित्रण देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए। अमृत कलश के प्रकट होते ही पूरा वातावरण जयघोषों से भर गया।

इसके पश्चात जब कथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर पहुँची तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। आधी रात के समय कारागृह में देवकी–वासुदेव के घर कृष्ण अवतार का प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के नारों से गूंज उठा। मंच पर प्रस्तुत सजीव झांकी में वासुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को यमुना पार ले जाने का दृश्य देखकर भक्तजन भाव-विह्वल हो उठे। कई श्रद्धालु तो खुशी और भक्ति के आंसुओं से सराबोर हो गए।

कथा के दौरान महिला मंडलियों द्वारा प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों ने वातावरण को और भी दिव्यता से भर दिया। ढोलक, मंजीरे और करताल की ताल पर जब भक्तजन झूम उठे तो पूरा पंडाल एक विराट आध्यात्मिक उत्सव में बदल गया।

आचार्य पं. प्रेम किशोर शर्मा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा –“कृष्ण का जन्म हमें यह संदेश देता है कि जब-जब अधर्म का अंधकार फैलता है, तब-तब धर्म रूपी सूर्य का उदय अवश्य होता है। जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, अंततः धर्म, सत्य और प्रेम की ही विजय होती है।”

श्रीमद्भागवत कथा का यह आयोजन आगामी दिनों तक इसी भव्यता और आस्था के साथ जारी रहेगा। प्रतिदिन भक्तगण हजारों की संख्या में यहाँ पहुँचकर अमृतमयी कथा का श्रवण कर रहे हैं और आत्मिक आनंद प्राप्त कर रहे हैं।

बाबा भूतेश्वरनाथ की धर्मनगरी गरियाबंद इन दिनों सचमुच आध्यात्मिक धाम बन गई है, जहाँ हर कोई भक्ति रस में डूबकर अपने जीवन को धन्य मान रहा है

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