वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..*(कॉलम 21 सालों से लगातार) : वे चौंकने लगे बे-वक्त की हवाओं से.... जो कह रहे थे डरते नहीं खुदा से हम....
Praveen Nishee Fri, Sep 11, 2026
छत्तीसगढ़ में जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने 25 मई 13 के चर्चित झीरम घाटी हमले में 10 अभियुक्तों को दोषी माना है, अभियुक्तों को 16 सितंबर को सज़ा सुनाई जाएगी। वैसे फैसला तो हो गया पर अभी भी कई सवाल अनसुलझे हैँ..! पहला सवाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है, हमले के बाद बड़ा सवाल उठा कि क्या सुरक्षा व्यवस्था में चूक थी? झीरम कांड की जांच कर रहे आयोग की सुनवाई में जो तथ्य सामने आए थे वे इसकी चुग़ली करते थे ।बस्तर उस समय देश के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र था। तथ्य बताते हैं कि हमले के कुछ दिन पहले झीरम इलाक़े में तब के सीएम रमन सिंह की विकास यात्रा हुई थी, तब वहां उनकी सुरक्षा के लिए 1786 सुरक्षा कर्मी तैनात थे लेकिन कुछ ही दिन बाद कांग्रेस की विकास यात्रा के लिये झीरम घाटी में सुरक्षा के लिए 218 कर्मियों की तैनाती थी।सुरक्षाकर्मियों की संख्या शामिल नहीं है,जो नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए तैनात होते हैं। दूसरा सवाल राजनीति को लेकर है। ज़ब हमला हुआ छ्ग में भाजपा की सरकार थी और छह महीने बाद नई सरकार के लिये चुनाव होने वाले थे। दोनों दलों के बीच पिछले चुनावों में वोटों का अंतर सिर्फ़ एक फ़ीसदी था। इस अंतर को पाटने के लिए कांग्रेस के तब के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल अच्छी रणनीति के साथ पार्टी को खड़ा कर रहे थे, भाजपा ज़ाहिर तौर पर डरी हुई थी। तब पीएम मनमोहन सिंह,कांग्रेस के बड़े नेता सोनिया, राहुल गांधी ने राज्य का दौरा किया लेकिन राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला लेने से चूक गए, 356 के दुरुपयोग के पूर्व में लगे आरोपों की आंच वे तब तक महसूस कर रहे थे। इसके बाद भाजपा झूठा प्रचार करने में भी सफल रही हमला कांग्रेस की अंदरूनी कलह का नतीजा था। दूसरा यह कि ऐन वक़्त पर परिवर्तन यात्रा का मार्ग बदलने की ही वजह से सुरक्षा पर्याप्त नहीं थी।अगर कांग्रेस का अंदरूनी मामला था,जिसे कांग्रेस के कई नेता सही मानते थे और अपनी ही पार्टी के एक बड़े नेता का नाम लेते थे तो क्या यह सरकार के सहयोग के बिना संभव था?दूसरा इस हमले के बाद स्तब्ध कांग्रेस संगठन अपने ही नेताओं की मौत से उपजी सहानुभूति को चुनाव तक क़ायम न रख सकी,कांग्रेस कार्यकर्ता भी इसके लिए एक जुट नहीं हो सके...!नंद कुमार पटैल और उनके बेटे को घटना स्थल से दूर ले जाकर हत्या करने का कारण भी अभी तक स्पष्ट नहीं है,कॉंग्रेस अब आरोप लगा रही हैऔर मामला हाईकोर्ट भी जा सकता है,पर अभी तक तो यह अनसुलझा ही है!
बस्तर में मिली 3.65 अरब साल पुरानी चट्टान....
भारत के भू- वैज्ञानिक इतिहास में छत्तीसगढ़ के बस्तर में हुई एक खोज ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है।छत्तीसगढ़ के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में वैज्ञानिकों को ऐसी चट्टानों के प्रमाण मिले हैं,जिनकी उम्र करीब 3.65 अरब साल आंकी गई है! इसका मतलब है पृथ्वी ज़ब शुरु आती ठोस परत आकार ले रही थी,तब आज का बस्तर क्षेत्र उसके प्राचीन भू-भाग का हिस्सा बन चुका था,आईआईएस ईआर भोपाल, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के अध्ययन ने भारत के सबसे पुराने ज्ञात भू- भाग को लेकर चली आ रही धारणा को नया मोड़ दिया है। आखिर चट्टानों में ऐसा क्या मिला और इससे पृथ्वी के इतिहास की कौन-सी गुत्थी भी सुलझ सकती है? अब तक भारत के सबसे पुराने भू-भाग की बात होती थी तो झारखंड का सिंहभूम क्षेत्र सबसे पहले सामने आता था। सिंह भूम क्रेटान को देश के प्राचीनतम स्थिर भू- भागों में गिना जाता रहा है, जिनकी उम्र करीब 3.5 अरब साल आंकी गई है,बस्तर क्रेटान से मिले प्रमाण इस तस्वीर को और पुराना कर रहे हैं, आईआईएसईआर भोपाल के अर्थ एंड एन वायरन मेंटल साइंसेज के वैज्ञानिकों कौशिक सत्पथी,प्रीतम नासिपुरी और अभिजीत भट्टाचार्य तथा दक्षिण कोरिया के बेसिक साइंस इंस्टीट्यूट कीवूकयी ने अध्ययन किया है, शोध में बस्तर क्षेत्र की कुछ चट्टानों में ऐसे भी खनिज मिले, जिनकी उम्र करीब3.65 अरब साल निर्धारित की गई है यानी भारत की धरती के प्राचीन इतिहास की समय रेखा करीब 15 करोड़ साल और भी पीछे जा सकती है।वैज्ञानिकों ने दक्षिण-पश्चिम बस्तर भोपालपटनम, बीजापुर के आसपास से चट्टानों के नमूने इनमें मौजूद जिरकॉन नाम के बेहद महत्वपूर्ण खनिज कणों को अलग किया गया,जिरकॉन की खासियत यह है, निर्माण के समय इसमें मौजूद कुछ रेडियोधर्मी तत्व समय के साथ एक निश्चित दर से बदलते रहते हैं।
बकरा-सूअर पर 15.40 लाख
खर्च होगा, बस्तर दशहरा में......
बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा के आयोजन का बजट पिछले साल की तुलना में बढ़ गया है। 2026 में 1 करोड़ 22 लाख 53 हजार ₹ खर्च प्रस्ताव के विरुद्ध खर्च 1 करोड़ 11 लाख 39 हजार ₹ रहा था। इस बार करीब 11.14 लाख ₹ ज्यादा खर्च प्रस्तावित है। पारंपरिक रस्मों में उपयोग होने वाले बकरा -सूअर और शराब पर होने वाले खर्च को लेकर चर्चा हो रही है। उत्सव समिति के सचिव, तहसीलदार के अनुसार बकरा-सूअर पर15.40 लाख ₹, दशमी सामग्री व शराब पर 4.13 लाख यानि कुल 19.52 लाख ₹ प्रावधान किया है। पिछले साल इन मदों पर करीब 17. 75 लाख ₹ खर्च हुए थे।इस लिहाज से इन मदों का खर्च भी बढ़ा है।बस्तर दशहरा की अलग अलग रस्मों को पूरा करने के लिए बजट में चावल से लेकर किराना, फल-फूल,भोग कपड़ा, रथ की लकड़ी तक का इंतजाम किया गया है।चावल पर 2.31 लाख, किराना 10.98 लाख, विदाई रस्म पर 5.40 लाखऔर विद्युत सजावट पर 10.61 लाख प्रस्तावित हैं। कुश्ती प्रतियोगिता के लिए 9.26 लाख और डीजल के लिये 10.71 लाख रखे गए हैं।रथ-कपड़ा, रंगाई -पुताई, पटाखे प्रचार- प्रसार पर अलग- अलग राशि प्रस्तावित है।बकरा -सूअर15.40 लाख, कपड़ा 15.40 लाख, रंगाई-पुताई 11. 72 लाख, डीजल 10. 71 लाख, विद्युत सजावट 10.61 लाख, किराना 10.98 लाख, कुश्ती 9. 26 लाख ₹ प्रस्तावित हैं।दशहरा रस्मों के साथ व्यवस्थाओं पर भी बड़ा खर्च होगा।
भगत छ्ग तो भूपेश
असम के प्रभारी 
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव किया है।कांग्रेस ने पंजाब में महासचिव प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी अब सचिन पायलट को दे दी है। इसके साथ ही,भूपेश बघेल अब तक पंजाब के प्रभारी थे,को अब असम में नई जिम्मेदारी महासचिव प्रभारी के तौर पर दे दी गई है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र,आंध्रप्रदेश और गुजरात के प्रभारी को बदला गया है।भूपेश बघेल असम, रणदीप सुरजेवाला गुजरात, सचिन पायलट पंजाब, का महासचिव प्रभारी बनाया है।इसके अलावा, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़,श्रीवेला प्रसाद को महाराष्ट्र,पीवी मोहन को आंध्रप्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है। साथ ही रणदीप सुरजेवाला कर्नाटक में प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
और अब बस....
0 छत्तीसगढ़ में 202 आईएएस अफसरों का कोटा है और अभी 175 पोस्टेड हैँ, इनमें भी 23 अफसर प्रतिनियुक्ति पर हैं।
0छ्ग सरकार ने रिटायर दूर संचार अफसर बी के छबलानी को 1 साल के लिये ओएसडी नियुक्त किया है।
0छ्ग भाजपा अब महिलाओं के बाद युवाओं को भी रिझाने में लग गई है।
0सरगुजा जिले के दरिमा तहसील कार्यालय में घुस पटवारी से मारपीट करने वाले भाजपा नेता जितेन्द्र कुजूर उर्फ मोनू कुजूर के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई की गई है।
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