शिक्षा,संस्कार और अनुशासन को महत्व : सरस्वती शिशु मंदिर मनेंद्रगढ़ में हर्षोल्लास से मनाया गया शिक्षक दिवस
Praveen Nishee Sun, Sep 6, 2026
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। सरस्वती शिशु मंदिर मनेंद्रगढ़ में शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षकों के सम्मान में सुंदर प्रस्तुतियाँ दीं तथा शिक्षक दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। विद्यालय आचार्य श्रीमती नीतू सिंह, कुमारी एस शशि ,कला कुमारी ,अंजू और श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को शिक्षा,संस्कार और अनुशासन के महत्व से अवगत कराते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम के बीच में विद्यालय के व्यवस्थापक दिनेश्वर मिश्रा ने अपने शब्दों में बच्चों के अनुशासन और डॉ राधाकृष्णन के जीवन के बारे में तथा उनके त्याग बलिदान के बारे में बच्चों को बताया तथा विशिष्ट अतिथि नीरज अग्रवाल ने शिक्षकों के कार्य कर्तव्य के बारे में कहा तथा चंद्रगुप्त और चाणक्य के जीवन का उदाहरण देते हुए त्याग और बलिदान की प्रेरणा दी और उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब केवल पैसा कमाना नहीं बल्कि एक अच्छा इंसान बना सही और गलत में अंतर समझना अपनी संस्कारों को मजबूत करना और समाज के प्रति अपनी कर्तव्यों को निभाना इसी कार्यक्रम के आगे अतिथि माननीय धर्मेंद्र पटवा जी ने अपने बातों में कहा कि गुरु ही वह होते हैं जो अपने शिष्य को अपने पीछे नहीं बल्कि अपने से आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं वह क्या केवल ज्ञान नहीं देते बल्कि जीवन में सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देते हैं और हर कदम पर सफलता की ओर आगे बढ़ने का मार्गदर्शन करते हैं
इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने शिक्षाविद् एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। विद्यार्थियों ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं।
कार्यक्रम का समापन गुरुजनों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हुए किया गया। पूरा विद्यालय परिसर “गुरु का सम्मान, राष्ट्र का सम्मान” की भावना से ओत-प्रोत नजर आया। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य जी ने सभी का आभार व व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु और शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करना है और उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों आचार्य एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया । तथा वंदे मातरम करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।

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